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एनआरआई महिलाओं का 'चौकीदार नारे' पर बड़ा बयान, कहा- दोबारा पीएम बने मोदी तो जरूर करें ये काम

Priyamvada Sahayप्रियंवदा सहाय Updated Thu, 23 May 2019 08:11 AM IST
“मैं भी चौकीदार” नारे पर क्यों नाराज हैं एनआरआई महिलाएं?
“मैं भी चौकीदार” नारे पर क्यों नाराज हैं एनआरआई महिलाएं? - फोटो : अमर उजाला
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स्वीडन में रहने वाली भारतीय महिलाओं ने “मैं भी चौकीदार” बनकर अपने कामकाज को सोशल साइट्स पर उछालने वाले नेताओं की ख़ूब खिंचाई की है। यहां रहने वाली भारतीय महिलाओं से जब मैंने देश की मौजूदा राजनीतिक सामाजिक व्यवस्था पर उनकी राय मांगी तो उनका कहना था- अगर देश के पूर्व प्रधानमंत्री से लेकर केंद्रीय मंत्री तक ख़ुद को चौकीदार बता रहे थे फिर महिलाएं अब भी इतनी डरी हुई क्यों रहती हैं? वे घर से अकेली निकलने, मनचाहा करने या पहनने से कतराती क्यों हैं? वो कौन लोग हैं जिनसे वे डर रही हैं?

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आखिर क्या काम है चौकीदार का? 
वे कहती हैं- क्या ये जानना चौकीदार का काम नही। इतने चौकीदारों के होते हुए भारत के साथ अंतरराष्ट्रीय मीडिया भी आए दिन महिला हिंसा, बदसलूकी और अपराध के क़िस्से क्यों लिख रहा है? उनका कहना है कि महिला सुरक्षा और समानता एक ऐसा मुद्दा है जिसके कारण भारतीयों को बाहर में कभी-कभी शर्मिंदगी झेलनी पड़ जाती है। महिलाओं ने कहा कि निर्भया कांड के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की काफ़ी किरकिरी हुई थी। यहां की मीडिया में भी यह मुद्दा ख़ूब उछला।

परिणाम स्वरूप दफ़्तर से लेकर दोस्तों तक में उठते- बैठते इस मुद्दे पर असहज होना पड़ा। फिर विदेशी महिला पर्यटक के साथ छेड़छाड़ व अभद्रता की कहानी छपी। इसके बाद सरकार ने महिला सुरक्षा को लेकर कई घोषणाएं और योजनाएं बनाई। लेकिन मामला वहीं का वहीं रहा। जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछली सरकार बनी तो काफ़ी उम्मीदें बढ़ी थी। लेकिन महिलाओं की सुरक्षा व समानता के मुद्दे पर हालात नहीं सुधर सके। चुनाव नज़दीक आया तो प्रधानमंत्री से लेकर सभी केंद्रीय मंत्री और नेता अपने नाम के आगे चौकीदार लगाने लगे। लेकिन आश्चर्य है कि इतनी बड़ी संख्या में चौकीदारों के होते हुए भी आए दिन महिला हिंसा, यौन उत्पीड़न और भेदभाव की घटनाएं होती रही हैं।

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