उत्तर भारत से ग्राउंड रिपोर्ट: कांग्रेस-बीजेपी के लिए जीत की राह कितनी आसान कितनी मुश्किल?
दिल्ली को यदि जोड़ लें तो पूरे उत्तर भारत में कुल 41 लोकसभा की सीटें हैं। 2014 में हरियाणा में 9, दिल्ली में 7, पंजाब और चंडीगढ़ में 2, हिमाचल प्रदेश में 4 और जम्मू-कश्मीर में 2 सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमा लिया था। गठबंधन की दृष्टि से देखें तो एनडीए की स्थिति पूरे उत्तर भारत में जबरदस्त तरीके से मजबूत थी, लेकिन इस बार भाजपा की स्थिति में अंतर है। विधानसभा चुनावों में हार के बाद पंजाब में कांग्रेस में विश्वास बढ़ा हुआ है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो जमीन पर पार्टी के हालात नाजुक बने हुए हैं।
दरअसल, 10 साल तक सत्ता से बाहर रहने के बाद इस समय नई कांग्रेस की सरकार का कामकाज सुस्त दिखाई दे रहा है, लिहाजा इसका असर लोकसभा चुनाव पर पड़ने की पूरी संभावना है। मसलन जो लोग यह कहने लगे थे कि पंजाब में अकाली-भाजपा के दिन लद गए उनके लिए नतीजे चौंकाने वाले भी हो सकते हैं।संभावना यह जताई जा रही है कि इस बार कांग्रेस कहीं 6 पर न सिमट जाए।
क्या हाल है जमीन पर?
अपनी पारंपरिक सीट, अमृतसर, गुरदासपुर और होशियारपुर सीट से भाजपा ने तीनों उम्मीदवार बदल दिए हैं। सबसे बड़ा परिवर्तन होशियारपुर सीट पर है। आम लोगों में यह धारणा थी कि विजय सांपला बेहद कठोर नेता हैं और उनके नेतृत्व में चुनाव नहीं जीता जा सकता है।
लिहाजा भाजपा के नेतृत्वकर्ताओं ने पूर्व नौकरशाह सोमप्रकाश को कमान सौंपी और वे चुनाव जीतने की स्थिति में दिखाई देते हैं। यही बात बगल के क्षेत्र अमृतसर में भी है। इधर गुरदासपुर में सन्नी देओल के चुनाव में उतर जाने से तीनों लोकसभा क्षेत्र पर व्यापक असर देखने को मिल रहा है।
कैसा है कांग्रेस का हाल?
इधर बठिंडा और फिरोजपुर से बादल खानदान के लोग चुनाव लड़ रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री सरदार प्रकाश सिंह बाद के बेटे सरदार सुखबीर सिंह बादल फिरोजपुर से चुनाव लड़ रहे हैं जबकि बठिंडा से बादल परिवार की बहू हरसिमरत कौर बादल चुनाव मैदान में हैं। इन दोनों सीटों पर बादल के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल की स्थिति मजबूत रही है। जहां तक कांग्रेस की बात है तो प्रदेश में मात्र 2 सीटों पर पार्टी मजबूत दिखाई देती है। पटियाला लोकसभा क्षेत्र से महारानी परनीत कौर की स्थिति उतनी मजबूत नहीं है जितनी होनी चाहिए।
कांग्रेस को पासला गुट वाला साम्यवादी दल परेशान किए हुए है। पासला गुट वालों ने सभी साम्यवादी दलों के साथ ही कुछ छोटे दलों का एक जबरदस्त गठबंधन बना रखा है। यह गठबंधन कितनी सीट लाएगा यह तो पता नहीं, लेकिन इस गठबंधन के वोट कांग्रेस को परेशान करेंगे। यह गठबंधन, आनंदपुर साहिब, गुरदासपुर, अमृतसर, बठिंडा, संगरूर आदि क्षेत्र में जबरदस्त तरीके से वोट को प्रभावित कर रहा है। इसके कारण कांग्रेस की स्थिति कमजोर दिखने लगी है। कुल मिलाकर कांग्रेस को इस बार लोकसभा के चुनाव में एनटी इनकम्बेंसी का सामना करना पर रहा है, जबकि अकाली-भाजपा गठबंधन को चुनाव में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है।
क्या है हिमाचल का हाल?
हिमाचल प्रदेश में दो बटा दो की स्थिति बताई जा रही है लेकिन स्थानीय पत्रकार बलदेव शर्मा कहते हैं- ''प्रदेश सरकार की गलत नीतियों के कारण यहां कांग्रेस फिर से मजबूत स्थिति में आ गई है। हमीरपुर को छोड़कर भाजपा की स्थिति कहीं भी अच्छी नहीं है जबकि हमीरपुर में भी अंतरघात के कारण भाजपा की स्थिति कमजोर हो रही है।''
भाजपा के एक नेता ने नाम नहीं सार्वजनिक करने की शर्त पर कहते हैं- ''प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, केन्द्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सती अनुराग को जीतने नहीं देना चाहते हैं। इन तीनों को डर है कि अगर अनुराग ठाकुर जीत गए तो आने वाले समय में वे प्रदेश के प्रभावशाली नेता होकर उभरेंगे और मुख्यमंत्री के दावेदार भी वही होंगे। इसलिए उनके खिलाफ एक नये प्रकार की मोर्चेबंदी हो रही है।''
क्या है हरियाणा में कठिन है भाजपा की डगर?
हरियाणा में भी भाजपा को इस बार सरकार विरोधी प्रभाव का सामना करना पड़ सकता है। वरिष्ठ पत्रकार अनुप कुमार सैनी कहते हैं- ''इस बार कांग्रेस अंबाला, सोनीपत, कुरुक्षेत्र और रोहतक की सीट पर मजबूत दिखाई दे रही है। 2 सीटों पर भाजपा की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है, इसलिए हरियाणा में इस बार कांग्रेस की कम से कम 6 सीटों पर चुनाव जीतने की प्लानिंग है। जबकि पिछली बार कांग्रेस एक सीट पर सिमट गई थी। दिल्ली में भाजपा अच्छी स्थिति में बताई जा रही है।''
हालांकि दिल्ली के एक भाजपा नेता कहते हैं- ''यहां 3 ही सीटों पर अच्छी स्थिति में है बाकी की सीटों पर टक्कर मजबूत है। यह भी संभव है कि आम आदमी पार्टी 1-2 सीटें निकाल ले।''
जम्मू-कश्मीर में भाजपा की राह
इधर जम्मू-कश्मीर की स्थिति इस बार एकदम उलट है। चूंकि इस बार जम्मू-कश्मीर में भाजपा के 2 मजबूत आधार भाजपा के खिलाफ हो गए हैं। लेह-लद्दाख क्षेत्र के सांसद इस बार भाजपा के खिलाफ हैं जबकि जम्मू क्षेत्र में अपना जबरदस्त प्रभाव रखने वाली जम्मू-कश्मीर पैंथर पार्टी इस बार खुद के बदौलत चुनाव लड़ रही है। इसलिए इस बार जम्मू-कश्मीर में भाजपा की स्थिति कमजोर है। संभावना यह जताई जा रही है कि इस बार भाजपा यहां से 1 भी सीट न निकाल पाए।
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