विज्ञापन
विज्ञापन

बिहार से ग्राउंड रिपोर्टः भोजपुर, चंपारण, मिथिलांचल, सीमांचल, कोसी और मगध-पाटलिपुत्र का हाल

Rahul Mahajanराहुल महाजन Updated Tue, 14 May 2019 12:45 PM IST
पूरा बिहार चुनावी संग्राम का सबसे अहम क्षेत्र बन गया है। 
पूरा बिहार चुनावी संग्राम का सबसे अहम क्षेत्र बन गया है।  - फोटो : अमर उजाला
ख़बर सुनें
बिहार में अब लोकसभा चुनाव का केवल एक चरण बाकी है। राज्य में कई दिग्गजों का बहुत ही अहम सीटों पर मुकाबला है। मधेपुरा में आरजेडी की टिकट पर चुनाव जेडीयू नेता शरद यादव लड़ रहे हैं तो वहीं बीजेपी से नाता तोड़ कांग्रेस में शामिल हुए शत्रुघ्न सिन्हा का बीजेपी के केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद के खिलाफ मुकाबला है।
विज्ञापन
बेगूसराय से बेमन से चुनाव मैदान में उतरे केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के खिलाफ राष्ट्रद्रोह के केस से सुर्खियों में आए जेएनयू के पूर्व छात्र नेता कन्हैया कुमार आमने-सामने हैं। जबकि सिवान सीट पर जदयू-बीजेपी गठबंधन से बाहुबली अजय सिंह की पत्नी कविता सिंह और आरजेडी के टिकट पर शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब के बीच टक्कर से पूरा बिहार चुनावी संग्राम का सबसे अहम क्षेत्र बन गया है। 

क्यों अहम बन गया है बिहार का चुनावी संग्राम?  
2019 में केंद्र सरकार बनाने में बिहार भी काफी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। बिहार में कुल 40 विधानसभा सीटें हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 22 और उसके सहयोगी एलजेपी 6 और आरएलएसपी को 3 सीटें मिली थी। हालांकि, अब आरएलएसपी एनडीए से अलग हो गई। वहीं, जेडीयू एक बार फिर एनडीए का हिस्सा बन चुकी है।

बीजेपी पिछले चुनाव की तुलना में 17 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। ऐसे में चुनाव से पहले ही उसकी सीटें घट गई हैं। वहीं, कांग्रेस और आरजेडी एक साथ है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में आरजेडी का ग्राफ बेहतर हुआ है। 2015 विधानसभा चुनाव के नतीजों ने आरजेडी और कांग्रेस के प्रदर्शन से लगता है कि बिहार में महागठबंधन बीजेपी-जेडीयू को ठीक-ठाक चुनौती देगा।

क्यों अलग है ये चुनाव?  
2019 का चुनाव 2009 और 2014 के चुनावों से बेहद अलग है। 2009 में बीजेपी और जेडीयू ने मिलकर चुनाव लड़ा था और आरजेडी और कांग्रेस अगल-अलग चुनावी मैदान में थे। जबकि 2014 में तीन प्रमुख पार्टियों यानी बीजेपी, जेडीयू और आरजेडी अपने बूते पर चुनाव मैदान में थीं। 2019 में बीजेपी, जेडीयू और राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही हैं।

एनडीए को सबसे ज्यादा फायदा जेडीयू के साथ आने से हो रहा है, लेकिन यहां ये बताना जरूरी है कि 2014 लोकसभा चुनावों से पहले ही नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी के नाम का विरोध कर एनडीए से किनारा कर लिया था और बीजेपी ने नीतीश विरोध के नाम पर चुनाव लड़ा था। विपक्षी दलों ने भी महागठबंधन बनाकर लोकसभा चुनाव में एनडीए को बिहार में चुनौती दी है। जिसमें आरजेडी, कांग्रेस, उपेंद्र प्रसाद की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी), जितन राम माझी की हिन्दोस्तान अवाम मोर्चा (हम) और विकासशील इंसान पार्टी शामिल हैं। 

अगर इन सब पार्टियों के वोट बैंक पर नज़र डालें तो ये साफ दिखाई देगा कि एनडीए ने अगड़ी जातियों (बीजेपी), गैर-यादव ओबीसी खासतौर से अति पिछड़े वर्ग और पासवान वोट का एक समीकरण बनाने की कोशिश की है, वहीं राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने मुस्लिम और यादव वोट के आधार को छोटी पार्टियों के साथ मिलकर बढ़ाने की रणनीति तैयार की है। जिसमें जितन राम माझी के महादलित वोट, उपेंद्र प्रसाद की आरएलएसपी के कुशवाहा वोट और विकासशील इंसान पार्टी के निशाद वोट शामिल हैं। 

इस चुनाव में आरजेडी केवल 19 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जो राज्य की 40 लोकसभा सीटों की आधी भी नहीं है। ये पहली बार है कि आरजेडी बिहार में किसी गठबंधन के बावजूद 25 से कम सीटों पर चुनाव लड़ने जा रही है और लालू प्रसाद यादव के जेल में होने के कारण और चुनाव में शामिल न हो पाने से भी आरजेडी के लिए ये चुनाव उतना आसान नहीं होगा। आरजेडी को अति पिछडे़ वर्ग के वोटों के लिए दूसरे सहयोगी दलों पर निर्भर होना होगा।

किन मुद्दों पर चुनाव है बिहार में? 
बिहार में राष्ट्रीय सुरक्षा, बालाकोट में पाकिस्तान पर भारतीय वायूसेना की कार्रवाई, पुलवामा जैसे मुद्दों पर बात हो रही है। साथ ही विपक्ष इस मुद्दे के सामने रोज़गार, लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बीजेपी के अधूरे वादों को चर्चा में लाने की कोशिश कर रहा है। जबकि आरजेडी ने केंद्र की अगड़ी जातियों के लिए 10 फिसदी आरक्षण का विरोध किया था, तब भी वो चुनाव में इसे मुद्दा नहीं बना पाए हैं।

दूसरी ओर कांग्रेस की न्यूनतम आय योजना यानी न्याय को भी महागठबंधन भुनाने में कामयाब नहीं दिखता। नीतीश कुमार के सड़क, बिजली और पानी के मामले में काम के कारण राज्य में स्थानीय मुद्दे हावी नहीं दिखते। 

राज्य को अगर हम अलग-अलग भागों में बांट कर बात करें तो बिहार में भोजपुर, चंपारण, मिथिलांचल, सीमांचल, कोसी और मगध-पाटलिपुत्र क्षेत्र हैं। आइए जानते हैं क्षेत्र के आधार पर क्या है सीटों का हाल। 
विज्ञापन
आगे पढ़ें

विज्ञापन

Recommended

देखिये लोकसभा चुनाव 2019 के LIVE परिणाम विस्तार से
Election 2019

देखिये लोकसभा चुनाव 2019 के LIVE परिणाम विस्तार से

जानिए अपने शहर के लाइव नतीजों की पल-पल की खबर
Election 2019

जानिए अपने शहर के लाइव नतीजों की पल-पल की खबर

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Most Read

Blog

भाजपा की जीत में मोदी के अलावा इन नेताओं की रही भूमिका, इन्हें मिल सकता है अहम पद

जीत छोटी हो या बड़ी, बिना सांगठनिक आधार के लोकतांत्रिक व्यवस्था में उसकी कल्पना भी बेमानी है। लेकिन यह भी सच है कि सांगठनिक व्यवस्था को प्रेरित करने के पीछे उसके

23 मई 2019

विज्ञापन

पूर्व प्रधानमंत्री समेत इन दिग्गजों को भी मिली हार

2019 लोकसभा चुनाव के परिणाम बेहद आश्चर्यजनक रहे। भाजपा ने एक तरफ अकेले दम पर पूर्ण बहुमत हासिल किया वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस खुद को विपक्ष में खड़े होने लायक भी सीटें इकट्ठा नहीं कर पाई।

24 मई 2019

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Election