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जीवन धारा: बाहर के शोर से ज्यादा भीतर की आवाज सुनें, खुद पर विश्वास रखना सार्थक सूत्र

Tue, 13 Oct 2026 09:41 AM IST
रोलो मे Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 13 Oct 2026 09:41 AM IST
सार

कुछ रचने की इच्छा तब तक सहज लगती है, जब तक वह मन में रहती है। लेकिन दुनिया के सामने रखते ही असफलता का भय व दूसरों की प्रतिक्रिया की चिंता हमारी मूल प्रेरणा पर हावी होने लगती है।

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Listen inner voice rather than noise outside believing in yourself meaningful principle
बाहर के शोर से ज्यादा भीतर की आवाज सुनें - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

अक्सर हमें लगता है कि जिन लोगों के भीतर असाधारण विचार जन्म लेते हैं, जिनकी कल्पना दूसरों से अलग होती है या जो दुनिया को देखने का नया तरीका खोज लेते हैं, वे जन्म से ही विशेष होते हैं। लेकिन सृजन की वास्तविक कठिनाई किसी विचार का जन्म लेना नहीं, बल्कि उस विचार के साथ खड़े रहने का साहस जुटाना है। क्योंकि हर नया विचार अपने भीतर एक अनिश्चितता लेकर आता है। हमें नहीं पता होता कि वह सफल होगा या असफल, लोग उसे समझेंगे या अस्वीकार कर देंगे।

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इसलिए कई बार मनुष्य अपनी कल्पना की कमी से नहीं, बल्कि अपने भय के कारण कुछ नया करने से रुक जाता है। हमारे भीतर कुछ रचने की इच्छा तभी तक सरल लगती है, जब तक वह केवल हमारे मन में रहती है। जैसे ही हम उसे दुनिया के सामने रखने के बारे में सोचते हैं, अनेक प्रश्न हमें घेरने लगते हैं। यदि किसी ने हमारे काम को महत्व नहीं दिया तो? यदि हमारी सारी मेहनत के बाद भी परिणाम वैसा नहीं निकला, जैसा हमने सोचा था? धीरे-धीरे इन प्रश्नों का शोर उस मूल इच्छा से बड़ा हो जाता है, जिसने कभी हमें कुछ नया करने के लिए प्रेरित किया था। हम अपनी कल्पना को दूसरों की संभावित प्रतिक्रियाओं के अनुसार बदलने लगते हैं। अंततः हम वही करने लगते हैं, जिसे स्वीकार किए जाने की संभावना अधिक हो, न कि वह जिसे रचने की इच्छा वास्तव में हमारे भीतर थी। कुछ नया करने के लिए उस जगह में प्रवेश करना पड़ता है, जहां कोई निश्चित उत्तर नहीं होता। गलतियां हो सकती हैं और हमारी क्षमताएं भी हमारी कल्पना के अनुरूप काम नहीं कर सकतीं। लेकिन इन कठिनाइयों का होना इस बात का प्रमाण नहीं कि हम गलत दिशा में जा रहे हैं।
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असफलता का भय भी अक्सर इसी अनिश्चितता से पैदा होता है। यदि हमारी रचना स्वीकार नहीं हुई, तो लगता है कि हममें प्रतिभा नहीं है। जबकि किसी प्रयास का परिणाम हमारी पूरी क्षमता का अंतिम निर्णय नहीं होता। जब हम स्वयं को अपनी सफलता व असफलता से थोड़ा अलग देख पाते हैं, तब सीखने और आगे बढ़ने की संभावना खुलती है। साहस का अर्थ है भय के उपस्थित रहने पर भी उस काम की ओर बढ़ना, जिसे हम अपने लिए अर्थपूर्ण मानते हैं। हर नया विचार तुरंत महान नहीं बनता और हर रचनात्मक व्यक्ति को पहचान नहीं मिलती। फिर भी सृजन का मूल्य केवल उसके बाहरी परिणाम में नहीं है। उसमें हमारी स्वतंत्रता, हमारी जिज्ञासा व अपनी संभावनाओं को जानने का प्रयास भी शामिल है। शायद इसलिए कुछ नया रचने का सबसे कठिन हिस्सा अपनी प्रतिभा को सिद्ध करना नहीं, बल्कि अपने भीतर उठने वाली उस आवाज पर विश्वास करना है, जो अभी दुनिया के सामने प्रमाणित नहीं हुई है। (....द करेज टु क्रिएट के अनूदित अंश)
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सूत्र: खुद पर विश्वास रखें
सृजन के लिए प्रतिभा से अधिक साहस की आवश्यकता होती है, क्योंकि कुछ नया करने का अर्थ है अनिश्चितता के बीच कदम रखना और असफलता की संभावना के बावजूद अपनी कल्पना पर विश्वास करना। दूसरों की स्वीकृति के भय में हम अक्सर अपनी मौलिकता खो देते हैं और वही चुनते हैं, जिसे दुनिया स्वीकार करती है। खुद पर विश्वास रखें।

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