पंखों वाली परियों पर आधारित पर्यटन: इंसानों के खाद्यान के लिए भी महत्वपूर्ण हैं तितलियां
तितलियों में अगर परागण (पॉलिनेशन) की क्षमता नहीं होती तो संभवत मानव आबादी के लिए उचित मात्रा में खाद्य पदार्थों की उपज मुश्किल हो जाती।
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कोई भी सौंदर्य हो, मन को सदा खुशी देता है। अंग्रेजी साहित्य के मशहूर कवी जॉन कीट्स ने यह पंक्ति, हो न हो, तितलियों के कोमल सुंदरता से प्रेरित होकर लिखी होगी। तितलियों की कोमलता और सुंदरता का आकर्षण ही कुछ ऐसा है। तितलियों के विषय में कहा जाए तो, सिर्फ सौंदर्य ही उनकी विशेषता नहीं है। अपने स्वाभाविक जीवनशैली के कारण, वे धरती पर सचमुच की सुन्दर पंखों वाली परियां हैं। उनमें परागण (पॉलिनेशन) की क्षमता नहीं होती तो संभवत मानव आबादी के लिए उचित मात्रा में खाद्य पदार्थों की उपज मुश्किल हो जाती।
तितलियों संग अन्य परागण-करता (पोलिनेटर्स) जैसे मधुमक्खी, मोथ, चमगादड़ आदि पर, दुनिया भर की लगभग 75% खाद्य पेड़ निर्भर रहते हैं। अर्थशास्त्रियों ने सभी परागण-कर्ताओं के पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं (इकोसिस्टम सर्विसेज) का मूल्यांकन लगभग 235-577 अरब अमरीकी डॉलर बताया है।
तितलियां खास करके, सब्ज़ियों और हरे शाग के परागण की विशेषज्ञ होती हैं। गाजर, सूरजमुखी, फलियों और पुदीना संबंधित वनस्पतियों का परागण प्रमुख रूप से तितलियों पर ही निर्भर है। जाहिर है कि हमारी थाली तक बहुत सारी हरी भरी सब्ज़ियों को पहुंचाने में तितलियों का बड़ा योगदान है जिसे हम अक्सर अनदेखा करते आए हैं। कदाचित, वह समय आ गया है जब तितलियों के पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के लिए उन्हें सराहना दी जाए।
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आईए देखें, हमारे देश में कौन-कौन सी जगहों में तितलियों को प्रचुरता में देखा जा सकता है। अक्सर इन जगहों को तितली उद्यान (बटरफ्लाई गार्डन) के नाम से जाना जाता है। यानी कि एक ऐसा गार्डन जिसमें तितलियों को ध्यान में रखते हुए ऐसे पेड़ पौधे और फल-फूल उगाए जाते हैं, जिससे तितलियां आकर्षित होकर और अधिक मात्रा में आएं।
तितलियों के लिए बटरफ्लाई गार्डन
बेंगलुरु स्थित बन्नेरघाटा जैविक उद्यान, जो जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ़ बायोटेक्नोलॉजी), तथा कर्नाटक के चिड़ियाघर प्राधिकरण (ज़ू अथॉरिटी ऑफ़ कर्नाटका) द्वारा 2007 में स्थापित किया गया था, यह भारत का पहला बटरफ्लाई गार्डन है। तितलियों के संरक्षण और घटती आबादी को पुनर्जीवित करने की तरफ यह एक अत्यन्त सराहनीय कदम था।
यह उद्यान करीब 7.5 एकड़ जमीन पर फैला है और इसमें 1 किलोमीटर का चिन्हित रास्ता निर्मित है, जिसपर आगंतुक टहलते हुए तितलियों का अवलोकन कर सकते हैं। यहां पर उद्यान प्रबंधन की ओर से आगंतुकों के ज्ञानवर्धन हेतु कुछ श्रव्य दृश्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। बन्नेरघट्टा जैविक उद्यान के वेबसाइट के अनुसार, यहां 48 प्रकार की तितलियां पाई जाती हैं।
भारत का दूसरा तितली उद्यान शिमला, हिमाचल प्रदेश में 2008 में स्थापित किया गया था। यह उद्यान 4.8 एकड़ जमीन पर फैला है और यहां हिमाचल प्रदेश में पाई जाने वाली लगभग सभी 300 प्रकार की तितलियां पाई जा सकती हैं। फ़िलहाल हिमाचल प्रदेश के वन विभाग द्वारा एक नए तितली उद्यान को और स्थापित करने की तैयारी चल रही है जिसे आने वाले वर्ष में उद्घाटित किया जा सकता है।
2011 में पुणे नगर निगम ने एक पूर्व नाले की जगह पर 2 एकड़ जमीन को पुणे तितली उद्यान में परिवर्तित किया, जिसे सुबह शाम सैर और वर्जिश करने वालों के लिए खोल दिया गया। इसी वर्ष चंडीगढ़ में 7.5 एकड़ के फैलाव में एक अत्यंत सुन्दर तितली उद्यान का उद्घाटन किया गया जिसमें कई प्रकार के पेड़-पौधों को उगाया गया और फूल देने वाले पौधों का खास ख्याल रखा गया है।
सिक्किम में भी इसी साल एक बटरफ्लाई रिज़र्व की स्थापना हुई है जो भारत का पहला सबसे बड़ा खुली हवा वाला तितली उद्यान है, जो की 29 एकड़ जमीन पर विस्तृत है।
पूर्वी भारत की जलवायु तितलियों के लिए अनुकूल
पूर्वी भारत में जलवायु काफी भिन्न है और यहां का मौसम कई प्रकार के ऑर्किड पौधों के लिए उपयुक्त है। ऑर्किड तितलियों के पसंदीदा पौधे होते हैं और इस वजह से सिक्किम स्थित यह उद्यान अत्यंत महत्वपूर्ण तितली उद्यान है। गौरतलब है कि सिक्किम के इस तितली उद्यान के निर्माता सहयोगी आर्किटेक्चर ब्रिओ ग्रुप को इस उद्यान के लैंडस्केप आर्किटेक्चर योजना बनाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में प्रथम पुरस्कार भी मिला है।
अरुणाचल प्रदेश में तितलियों की अच्छी विविधता होने के कारण यहां के राज्य सरकार ने तितली पर्यटन को काफी प्रोत्साहन दिया है और इसी दिशा में वर्ष 2021 में, कैसर-ए-हिन्द नमक तितली को राज्य तितली नाम से घोषित भी किया।
भारत की राजधानी दिल्ली में भी कुछ तितली उद्यान पाए जा सकते हैं। असोला भट्टी वन्यजीव अभ्यारण्य में इसी वर्ष वन विभाग ने एक तितली उद्यान का उद्घाटन किया है जहां तितलियों के पसंदीदा पौधे लगाए हैं। यहाँ स्ट्राईप्ड टाइगर, पीकॉक पैन्सी, ब्लू पैन्सी, वाइट ऑरेंज टिप, कॉमन लाइम आदि तितलियों को देखा जा सकता है।
तितलियों के लिए व्यक्तिगत प्रयास से बने उद्यान
यह जानने योग्य है कि इस तरह के उपक्रम केवल सरकार द्वारा नहीं लिए जाते बल्कि व्यक्तिगत प्रयास से भी निजी जमीन पर एक सुन्दर उद्यान निर्मित किया जा सकता है, जो तितलियों के आकर्षण का केंद्र बनने के साथ-साथ और कई लोगों के लिए भी आनंदप्रद एवं जागरूकता प्रदान करने वाला हो सकता है।
एक ऐसा ही निजी प्रयास महाराष्ट्र के ठाणे जिले के निवासी राजेंद्र ओवलेकर ने अपनी 2 एकड़ की निजी जमीन पर किया और ओवलेकर वाड़ी तितली उद्यान को विकसित किया। ओवलेकर उद्यान में तितलियों की लगभग 100 प्रजातियां देखी जा सकती हैं और ओवलेकर जी स्वयं दिलचस्पी लेकर आगंतुकों को तितलियों की विविधता से लेकर पूरे जीवन चक्र से अवगत करते हैं।
गोवा के पोंडा में भी कुछ आम नागरिकों ने मिलकर करीब 1 एकड़ के बंजर जमीन को अपने उद्यम और रूचि से हरा भरा कर दिया और उसमें तितलियों को आकर्षित करने वाले पेड़-पौधों को रोपित किया। इसे गोवा तितली संरक्षिका (गोवा बटरफ्लाई कन्सेर्वटोरी) के नाम से जाना गया और अब गोवा जाने वाले कई आगंतुकों के लिए यह एक पर्यटन स्थल बन चुका है।
यह बिलकुल संभव है कि आप अपने घर के निजी बगीचे को भी तितलियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना सकते हैं। आपको केवल यह करना है कि तितलियों के पसंदीदा पौधों का रोपण करें। स्टैचिटारफाएटा, सेलोसिया, ज़ेनिया, इक्सोरा, क्रोटोलेरिया, हेलियोट्रोपियम, यूपेटोरियम आदि कुछ ऐसी प्रजातियां हैं जो तितलियों को काफी आसानी से आकर्षित करती हैं। आपके आंगन में सुन्दर पंखों वाली परियों का आगमन न केवल आपके मन और आंगन को ख़ुशी देगा, साथ ही साथ परागण करने वाले इन जीवों की संख्या में भी वृद्धि लाएगा।
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