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प्रकाश प्रदूषण: रौशनी में आते बदलाव और जीव-जंतुओं पर मंडराता संकट

Alee Khan मोहम्‍मद अली खान
Updated Fri, 16 Jul 2021 11:07 AM IST
सार

रात के समय में पड़ने वाली कृत्रिम रोशनी की जरूरत ने जीव-जंतुओं के जीवन को खासतौर पर कृत्रिम रोशनी की अत्यधिक तीव्रता ने छोटे-छोटे कीट-पतंगों पर विनाशी प्रभाव डाला है।

ब्रिटेन की नेचुरल एन्वायरमेंट रिसर्च काउंसिल ने हाल ही में अपने एक अध्ययन में पाया है कि प्रकाश के रंगों और तीव्रता में बदलाव के कारण जीव-जंतुओं की दृष्टि पर जटिल और अप्रत्याशित प्रभाव पड़ रहा है।

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पूरी दुनिया में रात के समय में प्रकाश व्यवस्था का स्वरूप पिछले करीब 20 वर्षों के दौरान नाटकीय रूप से बदला है। - फोटो : Pixabay

विस्तार

ब्रिटेन की नेचुरल एन्वायरमेंट रिसर्च काउंसिल ने हाल ही में अपने एक अध्ययन में पाया है कि प्रकाश के रंगों और तीव्रता में बदलाव के कारण जीव-जंतुओं की दृष्टि पर जटिल और अप्रत्याशित प्रभाव पड़ रहा है। यह अध्ययन शोध पत्रिका 'नेचर कम्युनिकेशन' में प्रकाशित किया गया है। ब्रिटेन के एक्सेटर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया यह अध्ययन दुनियाभर में प्रकाश प्रदूषण के कारण बढ़ते पर्यावरणीय खतरों के प्रति सचेत करता है।

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क्यों होता है ऐसा? इसका क्या होगा प्रभाव?

दरअसल, रात के समय में पड़ने वाली कृत्रिम रोशनी की जरूरत ने जीव-जंतुओं के जीवन को खासा प्रभावित किया है। कृत्रिम रोशनी की अत्यधिक तीव्रता ने छोटे-छोटे कीट-पतंगों पर विनाशी प्रभाव डाला है। पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने में इन छोटे-छोटे कीटों का अहम योगदान रहता है। इनका विनाश पारिस्थितिकी असंतुलन को बढ़ाने वाला है।

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कीटों पर पड़ने वाले कृत्रिम प्रकाश के प्रभाव को लेकर किए गए शोध से पता चला है कि पूरी दुनिया में रात के समय में प्रकाश व्यवस्था का स्वरूप पिछले करीब 20 वर्षों के दौरान नाटकीय रूप से बदला है। एलईडी जैसे विविध प्रकार के आधुनिक रोशनी उपकरणों का चलन बढ़ा है। यह स्वाभाविक है कि प्रकाश के प्रति कीटों का आकर्षण अधिक रहता है। लेकिन कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था कीटों की दृष्टि को बहुत ज्यादा प्रभावित करती है।

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प्रकाश के कुछ अन्य रूपों से कीटों से दृष्टि बाधित होती है। - फोटो : Pixabay

कृत्रिम प्रकाश का कीटों पर प्रभाव 
कृत्रिम प्रकाश का कीटों पर पड़ने वाले प्रभावों का पता लगाने के लिए शोधकर्ताओं ने कीटों और उन्हें अपना शिकार बनाने वाले पक्षियों की दृष्टि पर 20 से अधिक प्रकार की रोशनी के प्रभाव की जांच की है। अध्ययन में पाया गया कि कई कीटों की दृष्टि कुछ विशिष्ट प्रकार की रोशनी में बढ़ जाती है, जबकि प्रकाश के कुछ अन्य रूपों से इनकी दृष्टि बाधित होती है।

 

एक्सेटर विश्वविद्यालय के कार्नवाल कैंपस में स्थित पारिस्थितिकी एवं संरक्षण केंद्र से जुड़े शोधकर्ता डॉक्टर जालयान ट्रासिआंकों बताते है कि आधुनिक ब्रांड-स्पेक्ट्रम प्रकाश व्यवस्था इंसानों को रात में अधिक आसानी से रंगों को देखने में सक्षम बनाती है। लेकिन ये आधुनिक प्रकाश स्रोत अन्य जीव-जंतुओं की दृष्टि पर बहुत ज्यादा नकारात्मक प्रभाव डालते है।

इसके पीछे की वजह यह है कि मानव दृष्टि के लिए डिजाइन की गई कृत्रिम रोशनी में नीली और पराबैंगनी श्रेणियों का अभाव होता है, जो इन कीटों की रंगों को देखने की दृष्टि क्षमता के निर्धारण में अहम है।

यह स्थिति कई परिस्थितियों में किसी भी रंग को देखने की कीटों की क्षमता को अवरुद्ध कर देती है। ऐसी स्थिति कीटों को शिकारियों से बचकर छिपे रहने के लिए अनुकूल नहीं होती है।

 

फूलों को खोजना एवं परागण करना भी उनके लिए कठिन हो जाता है। ऐसे में, प्रकाश की मात्रा एवं तीव्रता को सीमित करने के सामान्य प्रयासों से आगे बढ़कर प्रकाश व्यवस्था के लिए संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाए जाने की जरूरत है।

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कृत्रिम प्रकाश से स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। - फोटो : Pixabay

जरूरी है कारगर उपाय 
कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था की जरूरतों और उपयोगिता को समझते हुए आगे से कदम उठाए जाने चाहिए। कृत्रिम प्रकाश से होने वाला प्रदूषण समस्त वातावरण को प्रदूषित करता है। प्रकाश प्रदूषण स्वाभाविक तौर पर पारिस्थितिकी तंत्र को बाधित करता है। कृत्रिम प्रकाश की तीव्रता बैचेनी को बढ़ा देती है और मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है।
 

कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था को दुरुस्त करके ना केवल हम कीटों पर पड़ने वाले विनाशी प्रभाव को कम कर सकते हैं, बल्कि हमारे स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों से भी बच सकते हैं। इसके लिए हमें आकाश-प्रदीप्ति को कम करना होगा, प्रकाश अतिचार में कमी करनी होगी, आवश्यक न्यूनतम तीव्रता के साथ प्रकाश के स्रोतों का उपयोग, अधिभोग सेंसर का उपयोग करते हुए प्रकाश प्रदूषण को बहुत हद तक कम किया जा सकता है।

इसके साथ-साथ प्रकाश जुड़नार में सुधार किया जाए, जिससे कि वे अपने प्रकाश को जहां जरूरत है वहां और अधिक सटीकता और न्यून पक्ष प्रभाव को निर्देशित कर सके। इसके अलावा हमारी कृत्रिम प्रकाश प्रदूषण के प्रति जागरूकता ही पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती प्रदान कर सकती है।

 

अगर हम कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था को दुरुस्त कर लेते है, तो बहुत हद तक संभव है कि हम स्वास्थ्य पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव से बच सकते हैं और कीटों के जीवन को भी बचा सकते हैं।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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