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जीवन धारा: खुद को अभिव्यक्त करना सीखें, सही और गलत को पहचानने का सूत्र अपनाएं

Thu, 25 Sep 2025 07:08 AM IST
दीपक कुमार शर्मा एल्बर्ट हबर्ड
एल्बर्ट हबर्ड Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 25 Sep 2025 07:08 AM IST
सार

अगर कोई व्यक्ति अपनी जिंदगी को बेकाबू होने देता है और केवल अपनी शारीरिक इच्छाओं को ही व्यक्त करता है, तो वह अपनी आत्मा के उच्च और श्रेष्ठ गुणों को दबा देता है।

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Learn to express yourself, adopt the formula to distinguish between right and wrong
सांकेतिक तस्वीर और एल्बर्ट हबर्ड - फोटो : अमर उजाला प्रिंट-एजेंसी

विस्तार

बार-बार उपयोग करने से जैसे मांसपेशियां मजबूत होती हैं, वैसे ही आत्मा भी अपने गुणों के अभ्यास से विकसित होती है। जीवन का मतलब है अपने विचारों, भावनाओं और ऊर्जा की अभिव्यक्ति। अगर हम अपनी भावनाओं को दबाते हैं, तो एक रुकावट पैदा होती है, जो आत्मा के लिए मृत्यु के समान है। लेकिन अभिव्यक्ति सही और गलत, दोनों तरह की हो सकती है। अगर कोई व्यक्ति अपनी जिंदगी को बेकाबू होने देता है और केवल अपनी शारीरिक इच्छाओं को ही व्यक्त करता है, तो वह अपनी आत्मा के उच्च और श्रेष्ठ गुणों को दबा देता है। जो गुण उपयोग नहीं किए जाते, वे धीरे-धीरे खत्म हो जाते हैं। लोग अपने पापों की सजा भुगतते हैं। भोग-विलास, लालच और अनियंत्रित जीवन आत्मा के विकास को रोकता है, और आत्मा पूरी तरह खिल नहीं पाती। यही है आत्मा को खो देना।

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सदियों से विचारशील लोग इन सच्चाइयों को समझते आए हैं। कई बार लोग भौतिक सुखों की जिंदगी को छोड़कर आत्मा के रास्ते पर चलने का फैसला करते हैं। आत्मा के माध्यम से अभिव्यक्ति या शरीर के माध्यम से, यह सवाल हमेशा दर्शन और धर्म का केंद्र रहा है। धर्म नैतिकता और विश्वास का मिश्रण है, लेकिन ये दोनों अलग-अलग हैं। विश्वास वह है, जो हमें अनदेखे और अज्ञात के बारे में बताता है। इसे स्वीकार्य बनाने के लिए अधिकांश लोग इसे नैतिकता के साथ जोड़ देते हैं। नैतिकता अपने आप में पूरी तरह मौजूद हो सकती है, लेकिन विश्वास हमेशा नैतिकता पर निर्भर रहता है। लोग इन दोनों को मिलाने की कोशिश करते हैं। नैतिकता और धर्म कभी पूरी तरह एक नहीं होते। नैतिकता का सवाल बस इतना है कि आप अपनी जीवन-ऊर्जा का उपयोग कैसे करते हैं। आपके पास इतनी ऊर्जा है, तो उसे कहां लगाएंगे? कुछ लोग, जो खुद को श्रेष्ठ मानते हैं, आपको सलाह देते हैं कि क्या सही है और क्या गलत है। वे दावा करते हैं कि उनकी सलाह ईश्वर से प्रेरित है, और अगर आप इसे मानते हैं, तो आपको इनाम मिलेगा, वरना सजा। इस तरह, वे लोगों को अपने हिसाब से चलाते हैं। यह स्पष्ट है कि हर धर्म में नैतिकता और विश्वास का मिश्रण होता है। ज्यादातर धर्मों की नैतिकता अच्छी होती है, प्रेम, सत्य, दया, न्याय और नम्रता जैसे गुण सभी धर्म सिखाते हैं। जीवन को कैसे व्यक्त करना है, यह सवाल शायद कभी खत्म नहीं होगा, क्योंकि हर इन्सान का स्वभाव और रुचियां अलग-अलग होती हैं। लेकिन कोई एक व्यक्ति, जो सोचता है कि उसने आदर्श खोज लिया है, अन्य सभी लोगों को वहीं रुकने के लिए मजबूर करने की इच्छा ने अनगिनत युद्ध और कलह को जन्म दिया है। लोगों के पास बुद्धि है, बस उन्हें स्वयं के भीतर झांकने की आवश्यकता है। कोई भी हमें नहीं रोक सकता, स्वयं को अभिव्यक्त करना सीखें। थोड़ा और धैर्य, सभी के लिए थोड़ा और दान, थोड़ा और प्रेम, अतीत के आगे कम झुकें, और दिखावटी अधिकार की चुपचाप अनदेखी करें। जीवन में एक बड़ा बदलाव आएगा, जिससे सब बेहतर हो जाएगा।
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सूत्र: सही और गलत को पहचानें
जीवन में आप जो चाहेंगे वह बन जाएंगे, लेकिन आपको लोगों की हर बात पर यकीन करने से बचना होगा। आप स्वयं सही गलत को पहचान सकते हैं, बस आप ज्ञान अर्जित करते रहें। अपने विचारों, भावनाओं और ऊर्जा को व्यक्त करना सीखें। हमेशा शिक्षा प्राप्त करने के लिए अभ्यास करते रहें।

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