लेडी जेम्स बॉण्डः 007 में लशाना लिंच का नाम और महिला सशक्तिकरण
वुमन पॉवर बनेगी
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हॉलीवुड की फिल्मों में जेम्स बांड की फिल्मों का जबरदस्त क्रेज है। पुरुष शक्ति, साहस, बुद्धि व चतुराई का साक्षात प्रतीक होती हैं जेम्स बांड की फिल्में। एक तरह से यह पुरुष वर्चस्व का प्रतीक भी है, जो बुद्धि, चातुर्य और जोखिमों को उठाने की ताकत व जज्बा जेम्स बांड की फिल्मों में उसके चरित्र चित्रण से दिखता है, उससे तो ऐसा ही संदेश जाता है कि वास्तविकता यही है कि पुरुष प्राणी जगत् का श्रेष्ठतम प्राणी है और उसके वश में सबकुछ है और बड़ी से बड़ी गुत्थी को वह अन्तत: सुलक्षा लेता है। उसकी शख्सियत कुछ ऐसी है कि वह न तो परेशान होता है और न ही घबराता है। विषम से विषम परिस्थितियों में वह 'शांत' जिसे कूल होना कहते है, बना रहता है।
आखिर पुरुष को लेकर क्यों बनी हैं मान्यताएं?
पुरुष व्यक्तित्व के इस महिमा मंडन में कहीं से भी लेश मात्र भी किसी महिला का कोई रोल शामिल है? कतई नहीं। वह उसकी मित्र भर हो सकती है पर वह, स्वयं दुस्साहस का कोई कारनामा कर दिखाए अथवा अपराधियों व अवांछित तत्वों को स्वयं आगे होकर उनका सामना कर सके ऐसी कोई ताकत उसमें नहीं दिखाई जाती।
यही गलती अब पकड़ ली गई है। आज के इस बदले समय में जब महिलाओं की ताकत और हौसले की बातें चारों ओर हो रहीं हों तब केवल पुरुष को ही शक्ति संपन्न दिखाया जाए तो यह बात न तो न्याय संगत होगी और न ही सही लगेगी। जाहिर है ऐसे में हॉलीवुड ने अपनी सोच बदलकर अब लेडी जेम्स बॉण्ड का पात्र चित्रित करने की घोषणा कर दी है।
इसमें एक और अच्छी बात यह है कि इसमें जाति भेद और रंग भेद को भी समाप्त करने की बात कही गई है। लेडी जेम्स बॉण्ड का किरदार एक अश्वेत अभिनेत्री करेगी। हॉलीवुड की ऑइकॉनिक जासूसी सीरीज जेम्स बॉण्ड की अगली कड़ी जब प्रस्तुत होगी तब उसमें अश्वेत अभिनेत्री लाशना लिंच 007 के रूप में दिखाई देंगी।
लाशना को सशक्त के रूप में दिखाए जाने तथा उसे खतरों की खिलाड़ी के रूप में एंट्री को वुमन पॉवर की दिशा में एक अत्यंत अहम व महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सुखद आश्चर्य की बात यह है कि भारतीय अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने भी यह इच्छा जताई थी कि यदि उन्हें कभी मौका दिया जाए तो वह जेम्स बॉण्ड का चरित्र निभाना चाहेंगी।
प्रियकां ने भी चाहा था ये किरदार
प्रियंका ने यह भी कहा कि जेम्स बॉण्ड का रोल निभाने के पीछे उनकी यह सख्त मंशा है कि वह वुमन पॉवर का संदेश दें। इसके अतिरिक्त अभी तक जेम्स बॉण्ड को एक ऐसे पुरुष के रूप में चित्रित किया जाता रहा है कि जैसे महिलाएं ही उसकी तरफ आकर्षित होती हैं और वह केवल उनकी इन इच्छाओं की पूर्ति का माध्यम है। उसके इन संबंधों में कोई स्थायित्व नहीं है। इसे एक प्रकार से महिलाओं का शोषण ही कहा जाएगा।
मी-टू के दौर में ऐसा कॉन्सेप्ट नहीं चल सकता इसलिए ही हॉलीवुड में यह विचार जोर से उठने लगा कि महिलाओं के सशक्तिकरण और उनके साहस को महिला चरित्र के केंद्र में रखकर फिल्में बनाई जाएं।
दरअसल, माहौल की जरूरत भी यह है कि महिलाएं केवल सजावटी चरित्र के रूप में फिल्मों में न हों। उनका वजूद तथा उनकी बौद्धिक क्षमता को लेकर भी फिल्में बनाई जाएं, तभी तो वंडर वुमन और फीमेल सुपरहीरो वाली कैप्टन मार्वल जैसी फिल्में बनीं और अपनी रिलीज के साथ ही इन्होंने दर्शकों से भी प्रशंसा मिली। कहने का अर्थ यह है कि वह मार्केट वैल्यू में भी सुपर रहीं।
इधर, हमारी फिल्म इंडस्ट्री में भी नायिका के साहस व शक्ति को लेकर फिल्में बनाने की चर्चाएं चल रहीं हैं। लगभग सभी स्थापित अभिनेत्रियां परिणिति चोपड़ा, कैटरीना कैफ, सोनम कपूर, सोनाक्षी सिन्हा ऐसी फिल्में करना चाहती हैं फिल्म एक सशक्त माध्यम है ऐसे संदेश देने का जिसमें वुमन पॉवर को दिखाया जाए।
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