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कुरुक्षेत्र: लाल किला ने लौटाया चरण सिंह के वारिसों को उनका 'किला'

विनोद अग्निहोत्री, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद अग्निहोत्री Updated Sat, 30 Jan 2021 05:51 PM IST

सार

  • राकेश टिकैत के आंसुओं के बाद अजित-जयंत की सक्रियता ने पलटी बाजी
  • नरेश टिकैत ने माना, अजित सिंह की हार किसानों की भारी भूल
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पत्रकारों से मुखातिब राकेश टिकैत
पत्रकारों से मुखातिब राकेश टिकैत - फोटो : PTI
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विस्तार

2019 का लोकसभा चुनाव पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसान राजनीति के लिए खासा निर्णायक था। लंबे समय तक देश की राजनीति में किसानों के एक छत्र नेता रहे चौधरी चरण सिंह के वारिस अजित सिंह और उनके बेटे जयंत चौधरी दोनों ही इस इलाके की मुजफ्फरनगर और बागपत सीट से लोकसभा चुनाव लड़े। लेकिन पुलवामा और बालाकोट का राष्ट्रवादी ज्वार चरण सिंह की किसान विरासत पर भारी पड़ा और दोनों ही भाजपा उम्मीदवारों के हाथों चुनाव हार गए।
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उनकी इस हार से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जाट पट्टी की राजनीति से चरण सिंह परिवार का वर्चस्व लगभग खत्म हो गया। लेकिन 26 जनवरी को लाल किला पर हुई शर्मनाक घटना से दबाव में आए किसान आंदोलन के बाद भाकियू नेता राकेश टिकैत के आंसुओं से बदले माहौल में चरण सिंह वारिसों को पश्चिमी उत्तर प्रदेश और किसान राजनीति का अपना खोया हुआ किला वापस मिलता हुआ लग रहा है।


पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान अब इस बात पर अफसोस कर रहे हैं कि उन्होंने अपने मसीहा चौधरी चरण सिंह के वारिसों को हराकर भारी भूल की, जिसका नतीजा उन्हें अब भुगतना पड़ रहा है कि किसानों ने जिन्हें जिताकर भेजा था वो इस संघर्ष के वक्त में सत्ता की गोद में बैठे हैं। और किसानों पर आई आपदा की इस घड़ी में आखिरकार चरण सिंह के बेटे और पोते ने ही उनका साथ दिया और लगभग हारी जा चुकी बाजी को पलट दिया। अमर उजाला से बातचीत में अजित सिंह ने कहा कि उनका परिवार हमेशा किसानों के हक की लड़ाई लड़ता रहा है और राष्ट्रीय लोकदल की बुनियाद ही किसान हैं। इसलिए किसानों के हक की लड़ाई में वह और रालोद बिल्कुल भी पीछे नहीं हटेंगे।

बागपत से जयंत को हराने वाले सत्यपाल सिंह पिछली मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री थे और मुजफ्फरनगर से अजित सिंह से जीतने वाले संजीव बालियान तब भी मंत्री रहे थे और अब भी केंद्रीय मंत्री हैं। लेकिन पिछले 62 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसानों में अब इस बात का पछतावा है कि उन्होंने चरण सिंह की विरासत को चुनाव में हराकर अपने ही पैरों में कुल्हाड़ी मारी है। शुक्रवार को मुजफ्फरनगर जिले के सिसौली गांव (स्वर्गीय किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत का पैतृक गांव और भारतीय किसान यूनियन का मुख्यालय) में आयोजित किसान महापंचायत में मंच से भाकियू अध्यक्ष और राकेश टिकैत के बड़े भाई नरेश टिकैत ने स्वीकार किया कि किसानों से लोकसभा चुनाव में भारी गलती हुई जो उन्होंने चौधरी अजित सिंह को हरा दिया।
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