कर्नाटक चुनाव परिणाम 2023: जनता ने नहीं रखी असमंजस की स्थिति, स्थानीय नेतृत्व ने पार लगाई कांग्रेस की नैया
कांग्रेस के लिए स्थानीय नेतृत्व ने अच्छे से ग्राउंड तैयार किया। खासकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार जमीन पर काम करते रहे। कांग्रेस के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला की भूमिका भी अहम रही। दूसरा इस बार कांग्रेस ने स्थानीय मुद्दों और स्थानीय नेतृत्व पर अधिक जोर दिया।
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कर्नाटक की तस्वीर अब साफ हो चुकी है। जनता ने कांग्रेस पार्टी को स्पष्ट बहुमत दे दिया है। कहीं कोई असमंजस की स्थिति नहीं रखी है। नतीजों से साफ है कि भारतीय जनता पार्टी अपना दक्षिण का गढ़ गंवा चुकी है। यदि नतीजों को देखें तो किंगमेकर की भूमिका की आस लगाए बैठी जनता दल (सेकुलर) को भी तगड़ा झटका लगा है।
130+ सीटें जीत रही कांग्रेस के आगे मुख्यमंत्री का नाम तय करने की चुनौती होगी, क्योंकि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार, दोनों ही दावेदारी जता चुके हैं। साथ ही, चुनावों के समय जनता से किए लोक-लुभावन वादों को पूरा करना भी बड़ा टास्क होगा।
कर्नाटक को लेकर शुरू से माना जा रहा था कि भारतीय जनता पार्टी पुनः सत्ता में नहीं लौटेगी, क्योंकि सरकार विरोधी लहर के बाद पार्टी के अंदरुनी झगड़े भी काफी अधिक थे। खासकर वरिष्ठ नेता बीएस येदियुरप्पा को हटाने के बाद उन्हीं के लिंगायत समुदाय के बसवराज बोम्मई को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर जरूर बिठाया गया था, लेकिन वह यदियुरप्पा जैसे करिश्माई व्यक्ति साबित नहीं हो पाए।
हिजाब, मुस्लिम आरक्षण जैसे मुद्दे भाजपा के काम नहीं आए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के अनेक नेताओं ने चुनावों में जोर लगाया, लेकिन जनता का मन वो भी नहीं बदल सके। पार्टी 70 सीटों के अंदर सिमट गई।
स्थानीय नेतृत्व का जीत में बड़ा योगदान
कांग्रेस के लिए स्थानीय नेतृत्व ने अच्छे से ग्राउंड तैयार किया। खासकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार जमीन पर काम करते रहे। कांग्रेस के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला की भूमिका भी अहम रही। दूसरा इस बार कांग्रेस ने स्थानीय मुद्दों और स्थानीय नेतृत्व पर अधिक जोर दिया। लोक-लुभावन घोषणाओं का वादा जनता से किया गया और कांग्रेस भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार को भी उजागर करने में सफल रही।
हालांकि, अपने चुनावी घोषणा पत्र में बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने की बात करके एक बार लगा कि कांग्रेस बुरी तरह फंस गई है, लेकिन पिछले 10 दिनों में जितना जोर बजरंगबली पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगाया, उतना ही जोर कांग्रेस के नेताओं ने भी खुद को हिंदुत्ववादी साबित करने में लगा दिया। डीके शिवकुमार ने बजरंगबली को लेकर कई वादे भी लगे हाथों कर डाले और हनुमान मंदिरों के चक्कर काटे।
यहां तक कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा तो आज जब नतीजे घोषित हो रहे थे तो हिमाचल प्रदेश में एक हनुमान मंदिर में पूजा करने पहुंच गईं। वैसे, इस पूजा का वोटरों पर तो कोई असर नहीं पड़ने वाला है, लेकिन भविष्य के लिए शायद वह अभी से तैयारी में जुट गईं हैं।
यह पूरी तरह स्पष्ट है कि इस जीत का श्रेय गांधी परिवार को मिलने वाला है, क्योंकि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अंत में सोनिया गांधी ने भी कर्नाटक चुनाव में न केवल प्रचार किया, बल्कि पूरा जोर भी लगाया। वैसे, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी कर्नाटक से ही आते हैं और उन्होंने भी भावनात्मक रूप से वोटरों को रिझाने की कोशिश की थी और जिस तरह प्रधानमंत्री मोदी विपक्षियों के आक्रमण को स्वयं पर लेकर इमोशनल कार्ड खेलते हैं, वैसा ही कुछ मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी किया।
मध्य प्रदेश-राजस्थान जैसी स्थिति नहीं चाहेगी कांग्रेस
कांग्रेस को भले स्पष्ट बहुमत मिल गया है, लेकिन अभी मुख्यमंत्री के नाम को लेकर माथापच्ची हो सकती है, क्योंकि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार, दोनों ही प्रबल दावेदार हैं। निश्चित ही कांग्रेस कर्नाटक में मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसी स्थिति नहीं चाहेगी। मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया पाला बदल के कई विधायकों को साथ ले गए थे और राजस्थान में सचिन पायलट सबके आगे हैं, जो रोज कांग्रेस को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
कांग्रेस ने रविवार को बेंगलुरु में विधायक दल की बैठक बुलाई है। उससे पहले सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दिल्ली आकर गांधी परिवार से मिलने वाले हैं। संभव है कि यहां कोई नाम तय हो जाए।
इसी साल चार और महत्वपूर्ण राज्यों में चुनाव होने हैं, जिनमें तेलंगाना, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ शामिल हैं। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार है। मध्य प्रदेश में भाजपा है, जबकि तेलंगाना में के.चंद्रशेखर राव मुख्यमंत्री हैं। के. चंद्रशेखर राव इस वक्त सत्ता विरोधी लहर से जूझ रहे हैं, जबकि राजस्थान में कांग्रेस की स्थिति बहुत सुखद नहीं है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस जरूर अच्छी स्थिति में बताई जा रही है।
मध्य प्रदेश में दोबारा कांटे का मुकाबला देखने को मिल सकता है। कर्नाटक की जीत जरूर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ने वाला है। हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक की जीत से कांग्रेस को राष्ट्रीय स्तर पर भी नई संजीवनी मिलने की उम्मीद है।
वैसे, कांग्रेस की कर्नाटक जीत से देश में तीसरे मोर्चा की संभावनाएं धूमिल हो सकती हैं और तीसरे मोर्चा के नेता जैसे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल, सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव, एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार आदि को झटका लगेगा, क्योंकि कांग्रेस अब राहुल गांधी के नेतृत्व में अगले साल लोकसभा चुनाव में उतरने पर जोर देगी। राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर मोदी बनाम राहुल देखने की संभावना बढ़ गई हैं।
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