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Jharkhand election results 2024: जेल से लौटकर असली ‘किंग’ बने हेमंत सोरेन

Sat, 23 Nov 2024 02:28 PM IST
Vinod Patahk विनोद पाठक
Updated Sat, 23 Nov 2024 02:28 PM IST
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Jharkhand election results 2024 hemant soren winning points and political reason of bjp loss in jharkhand
जमानत पर जेल से बाहर आए हेमंत सोरेन ने आदिवासी अस्मिता के मुद्दे पर चुनाव लड़ा। उन्होंने और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने मिलकर राज्यभर में 200 से ज्यादा चुनावी सभाओं को संबोधित किया। - फोटो : पीटीआई

झारखंड में इंडी गठबंधन सत्ता को बरकरार रखने में कायम रहा है। रुझानों में एक बार फिर हेमंत सोरेन सरकार बनती दिख रही है। भाजपा की कोशिश थी कि आदिवासी बाहुल्य राज्य में सत्ता परिवर्तन हो, लेकिन सात महीने पहले संपन्न लोकसभा चुनाव से स्पष्ट हो गया था कि भाजपा के लिए झारखंड में राह आसान नहीं है। राज्य में इंडी गठबंधन की जीत का श्रेय हेमंत सोरेन को जाता है। वही असली किंग बनकर उभरे हैं। हालांकि, उनके चार मंत्री हार की कगार पर दिख रहे हैं। 

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राज्य के चुनावी नतीजों को देखने के लिए लोकसभा चुनाव-2024 की ओर जाना होगा। राज्य की 14 लोकसभा सीटों में भाजपा को आठ सीटें मिली थीं, जो वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से तीन कम थीं, जबकि झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने तीन सीटें जीतीं और दो सीटों का उसे लाभ हुआ था। सहयोगी कांग्रेस ने भी दो सीटें जीती थीं और उसे एक का इजाफा हुआ था।

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हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने झारखंड में पूरी ताकत लगाई और बहुमत पाने का दावा किया, लेकिन भाजपा ने कुछ गलतियां भी झारखंड को लेकर कीं। विशेष कर हेमंत सोरेन को जेल भेजना पार्टी को भारी पड़ा। जेल जाने की सहानुभूति हेमंत सोरेन के पक्ष में गई है। लोकसभा चुनाव से आदिवासी वोट भाजपा से दूर होता दिख रहा था। राज्य की आदिवासियों के लिए रिजर्व पांचों सीटों पर भाजपा हार गई थी। 

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चुनाव में भाजपा ने ध्रुवीकरण का कार्ड भी खूब खेला। आदिवासी बनाम मुस्लिम वोटों को लेकर बड़ा मुद्दा बनाया गया। हर सभा में बताया गया कि राज्य में आदिवासी कम हो रहे हैं और मुस्लिम आबादी बढ़ रही है। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से लेकर भाजपा के हर स्टार प्रचारक ने झारखंड की डेमोग्राफी बदलने के मुद्दे को जोर-जोर से उठाया। खासकर बांग्लादेशी घुसपैठियों और धर्मांतरण पर फोकस किया गया। कैसे आदिवासी लड़कियों से शादी कर घुसपैठिए जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं? हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था भी एक बड़ा मुद्दा बनाया गया। 


आखिर कैसे सियासी परिस्थितियां पक्ष में आईं? 

जमानत पर जेल से बाहर आए हेमंत सोरेन ने आदिवासी अस्मिता के मुद्दे पर चुनाव लड़ा। उन्होंने और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने मिलकर राज्यभर में 200 से ज्यादा चुनावी सभाओं को संबोधित किया। कल्पना सोरेन ने अपनी सभाओं में महिलाओं पर फोकस रखा। हेमंत सोरेन सरकार की मंईयां सम्मान योजना ने तुरुप के पत्ते का काम किया। चुनाव से पहले महिलाओं के खाते में हजार रुपए आना शुरू हो गए थे। सोरेन ने आगामी दिसंबर से महिलाओं के खातों में ढाई हजार रुपए डालने की घोषणा की है। महिलाओं में चुनाव को लेकर जबर्दस्त उत्साह भी शायद इसलिए दिखा। महिला वोटरों ने 81 में से 68 सीटों पर पुरुषों की तुलना में अधिक वोट डाले।

हेमंत सोरेने ने अपने गठबंधन के साथी कांग्रेस को चुनाव में थोड़ा पीछे ही रखा। कांग्रेस की ओर से अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी को छोड़कर कोई बड़ा नेता झारखंड में प्रचार के लिए नहीं आया। यहां तक की प्रियंका गांधी वाड्रा झारखंड में एक भी सभा करने नहीं आईं। झारखंड में जीत का श्रेय यदि किसी को जाता है तो वो हेमंत सोरेन को जाता है। उन्होंने बहुत सफलतापूर्वक चुनाव का मैनेजमेंट किया। झारखंड में जीत झारखंड मुक्ति मोर्चा की हुई है। यहां इंडी गठबंधन का प्रभाव नहीं दिखा। कांग्रेस को भले पिछली बार के बराबर ही सीटें मिल रही हैं, लेकिन असली किंग हेमंत सोरेन हैं।


 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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