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IPL 2024: न के. एल. राहुल गलत हैं और न ही संजीव गोयनका, क्योंकि यह बाजारवाद का क्रिकेट है

Thu, 09 May 2024 05:01 PM IST
Vinod Patahk विनोद पाठक
Updated Thu, 09 May 2024 05:01 PM IST
सार

सर्वप्रथम पहले पक्ष की बात करते हैं। यह पक्ष संजीव गोयनका के व्यवहार से नाखुश है। उसका कहना है कि संजीव गोयनका क्रिकेट एक्सपर्ट या खिलाड़ी नहीं हैं। उन्हें इस हार को खेल भावना के रूप में लेना चाहिए था। यह बात सही भी है कि क्रिकेट को इमोशन से ऊपर उठकर खेल की तरह लेना चाहिए

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IPL 2024: Lucknow Super Giants Owner Sanjiv Goenka Angry On KL Rahul
संजीव गोयनका-केएल राहुल - फोटो : IPL/BCCI/Star Sports

विस्तार

सोशल मीडिया पर इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की टीम लखनऊ सुपर जायंट्स के कप्तान के.एल. राहुल और फ्रेंचाइजी मालिक संजीव गोयनका की एक छोटी वीडियो क्लिप में सनसनी मचाई हुई है। दरअसल, हैदराबाद में बुधवार रात लखनऊ सुपर जायंट्स की सनराइजर्स हैदराबाद के हाथों शर्मनाक हार के बाद कप्तान और फ्रेंचाइजी मालिक के बीच कुछ वार्तालाप चल रहा था, जो टीवी कैमरों में कैद हो गया।

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वार्तालाप में के.एल. राहुल शांत तो संजीव गोयनका कुछ तैश में नाराजगी जताते दिख रहे हैं। इस वीडियो क्लिप को लेकर सोशल मीडिया पर दो पक्ष आमने-सामने हैं। एक पक्ष कह रहा है कि संजीव गोयनका को के.एल. राहुल से ऐसा बर्ताव नहीं करना चाहिए, जबकि दूसरे पक्ष का मत है कि संजीव गोयनका को पूरा हक है कि वो खिलाड़ियों की परफॉर्मेंस को लेकर कप्तान से सवाल जवाब करें।
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सर्वप्रथम पहले पक्ष की बात करते हैं। यह पक्ष संजीव गोयनका के व्यवहार से नाखुश है। उसका कहना है कि संजीव गोयनका क्रिकेट एक्सपर्ट या खिलाड़ी नहीं हैं। उन्हें इस हार को खेल भावना के रूप में लेना चाहिए था। यह बात सही भी है कि क्रिकेट को इमोशन से ऊपर उठकर खेल की तरह लेना चाहिए, लेकिन भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को याद होगा कि कैसे 1996 के क्रिकेट वर्ल्ड कप में कोलकाता के प्रसिद्ध ईडन गार्डन स्टेडियम में जब सेमीफाइनल का मुकाबला भारत श्रीलंका के हाथों हार रहा था तो दर्शकों ने स्टेडियम में बवाल मचा दिया था।
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मैच को रोककर श्रीलंका को जीत हुआ घोषित करना पड़ा था। निश्चित रूप से वो कृत्य भी सही नहीं था। तब भी बड़ी संख्या क्रिकेट प्रशंसकों ने उन दर्शकों की आलोचना की थी। यह बात सही है कि आज हमारे क्रिकेटर बहुत बड़े इनफ्लुएंसर हैं। हमने उन्हें सिर-आंखों पर बिठाया है। सचिन तेंदुलकर को हम क्रिकेट का भगवान कहते हैं। तो हम कैसे बर्दाश्त कर लेंगे कि कोई व्यक्ति हमारे क्रिकेटर को कुछ बुरा भला कहे। 

भारत में क्रिकेट कोई खेल न होकर इमोशन बन चुका है। के.एल. राहुल, जो भारतीय क्रिकेट टीम के तीनों फॉर्मेट में खेलते आ रहे हैं, उनको लेकर क्रिकेट प्रेमी इमोशनल रूप से जुड़े हुए हैं। उन्हें यह बात पसंद नहीं आई कि कैसे एक गैर क्रिकेटर उनके प्रिय खिलाड़ी से सवाल जवाब कर रहा है। फिर संजीव गोयनका को यह भी देखना चाहिए कि क्रिकेट में ऐसा चलता है। लखनऊ सुपर जायंट्स की टीम ने के.एल. राहुल की कप्तानी में इस सीजन में 12 में से 6 मुकाबले जीते भी हैं। टीम के पास अब भी क्वालीफाई करने का अवसर है। ऐसे में संजीव गोयनका का यह व्यवहार निश्चित रूप से गलत ही दिखेगा।

अब बात दूसरे पक्ष की। इसका कहना है कि संजीव गोयनका को पूरा अधिकार है कि वो कप्तान के.एल.राहुल से सवाल-जवाब करें या अपनी नाराजगी जताएं। वो भले क्रिकेट एक्सपर्ट नहीं हैं, लेकिन एक व्यापारी के रूप में उन्होंने वर्ष 2021 में 7090 करोड़ रुपए खर्चकर लखनऊ सुपर जायंट्स टीम खरीदी थी। संजीव गोयनका की कंपनी का इससे पहले क्रिकेट या किसी अन्य खेल को लेकर कोई भी बैकग्राउंड नहीं मिलता है, यानी आईपीएल में पैसों की बौछार को देखते हुए ही उन्होंने इस खेल में निवेश किया।

टीम की हार या जीत से उनके निवेश पर फर्क पड़ता है। इसलिए इमोशन से ज्यादा उनकी पॉकेट से यह खेल जुड़ा है। फिर जिस पिच पर लखनऊ सुपर जायंट्स को 165 रन बनाने में पसीने आ गए हों, उसी पिच पर सनराइजर्स हैदराबाद मात्र 9.4 ओवर में बिना कोई विकेट गंवाए जीत हासिल कर ले तो फ्रेंचाइजी मालिक की नाराजगी बनती है। 

अब इस पूरे वाक्या को एक कंपनी के रूप में देखते हैं। किसी कर्मचारी के खराब परफॉर्मेंस पर बॉस नाराज भी होता है और कभी-कभी उस कर्मचारियों की नौकरी भी चली जाती है। लखनऊ सुपर जायंटस के मालिक संजीव गोयनका के लिए टीम एक प्रोजेक्ट जैसी ही तो है। टीम के एक-एक खिलाड़ी पर उन्होंने करोड़ों रुपए का निवेश किया है। वो यह उम्मीद करते हैं कि खिलाड़ी अपना बेस्ट परफॉर्म करे और कम से कम इस तरह की शर्मनाक हार टीम को न देखनी पड़े। 

संजीव गोयनका और के.एल. राहुल के बीच के वार्तालाप को लेकर बहस के दोनों पक्ष अपनी-अपनी जगह सही हैं, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि इंडियन प्रीमियर लीग क्रिकेट का एक तमाशा भर है। जिस तरह से वर्तमान सीजन में रनों की बौछार हो रही है। मैदान पर छक्कों का तूफान आया हुआ है। हर कोई उत्साह में तालियां बजा रहा है तो इसे क्रिकेट या खेल से बाहर की दृष्टि से देखने की जरूरत है।

आईपीएल में खिलाड़ी भारतीय टीम के खिलाड़ी न होकर फ्रेंचाइजी के एक कर्मचारी भर ही तो हैं। फ्रेंचाइजी का मालिक चाहता है कि उसकी टीम हर मैच में बेस्ट परफॉर्म करे और जो पैसा उसने टीम पर लगाया है, उसका अच्छा रिटर्न मिले। जिस तरह से क्रिकेट का बाजारीकारण हुआ है। उसमें इस बात सहमति जताई जा सकती है कि आईपीएल को क्रिकेट के रूप में न देखकर एक तमाशा खेल के रूप में ज्यादा देखेंगे तो ही बेहतर होगा।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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