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निवेश और बचत: पैसों को लेकर जोखिम लेना भी अच्छी समझदारी, कागजी लाभ-हानि वास्तविक नहीं
सार
बिना वजह डरने की जगह जोखिम के बारे में जानें और निवेश के दौरान समझदारी से इसका इस्तेमाल करें। पैसे के साथ जोखिम लेने से जुड़ी कई अवधारणाएं हैं, जो हमारी कल्पना से अलग होती हैं। हालांकि, एक सच्चाई यह भी है कि पैसों को लेकर किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं लेना भी एक किस्म का रिस्क ही है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
निवेश से पैसा बनता है, यह सच्चाई है। लेकिन, कइयों को लगता है कि निवेश जोखिम भरा है, क्योंकि इसमें पैसा डूबने की आशंका होती है। यह आम धारणा युवाओं, सेवानिवृत्त और उच्च शिक्षित लोगों में मौजूद होती है। मुझे चुपके-चुपके फिल्म से अमिताभ बच्चन का एक संवाद याद आता है। इसमें वह कहते हैं, जो है वो नहीं है...और जो नहीं है वो कैसे हो सकता है? अब यह कई लोगों के लिए भ्रामक हो सकता है, लेकिन इसका वित्तीय जोखिम से गहरा संबंध है। जोखिम का मतलब खतरे से है, जिसे वित्तीय दुनिया में पैसे डूब जाने से जोड़ा जा सकता है। पैसे खोने का पहला तरीका है कि इसे किसी को चुराने दें। हां, मैंने सही कहा। हम अक्सर लोगों को उधार देकर उसे वापस न पाने या कभी-कभी परिचितों और अजनबियों को बड़ी रकम देने के मामले में लापरवाह हो जाते हैं।
इस तरीके से लोग चुराते हैं पैसे
एक और तरीका है...जिससे हम लोगों और उनसे जुड़े संगठनों को पैसे चुराने देते हैं। यह है शुल्क और फीस के रूप में। स्कूल में बच्चों के लिए भुगतान की जाने वाली फीस ही नहीं, बल्कि खरीदे गए वित्तीय उत्पादों (बीमा या बैंक में खोले गए एफडी) के लिए चुकाए जाने वाले शुल्क को भी लेकर भ्रम न पालें। बीमा एजेंट पॉलिसी पर कमीशन कमाता है। बैंक एफडी, काउंटर के पीछे बैठे उस व्यक्ति के लिए प्रोत्साहन के रूप में कार्य करता है, जिसने आपका अकाउंट खोला है। ये उन उत्पादों के लिए भुगतान हैं, जो जरूरी नहीं कि आपके लिए हों। फिर भी आप उन्हें खरीद लेते हैं।
सोना न खरीदकर उठाया 9,500 का घाटा
यहीं पर हमारा व्यवहार काम आता है। कल्पना करें कि एक जनवरी, 2024 को सोने का भाव 64,090 रुपये प्रति 10 ग्राम था, लेकिन तब आपने नहीं खरीदा। जून में कीमत बढ़कर 73,580 रुपये पहुंच गई तो आपको लगता है कि 9,500 रुपये खो दिए। भले ही आपने सोना नहीं खरीदा, लेकिन आपको छह महीने की छोटी अवधि में कुछ पैसे कमाने के लिए उपलब्ध अवसर को खोने का दर्द महसूस होता है।
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कागजी लाभ या हानि वास्तविक नहीं
यहीं पर चुपके-चुपके का डायलॉग काम आता है। जो है, वो नहीं है। अर्थात कागज पर दिखने वाला लाभ या हानि वास्तव में लाभ या हानि नहीं है, क्योंकि आप उस निवेश से बाहर नहीं निकले हैं। इससे भी महत्वपूर्ण दूसरा डायलॉग है और जो नहीं है वो, वो कैसे हो सकता है? यह उन लोगों के लिए है जो बाजार गिरने पर रोते हैं कि उन्हें नुकसान हुआ है। यह उदाहरण उन लोगों के लिए सही है जो कहते हैं कि उन्होंने शेयरों में एक लाख का निवेश किया। शेयर ने 7 साल में बोनस और लाभांश के रूप में 40,000 रुपये का भुगतान किया और 31 मार्च, 2024 को इसका मूल्य 1.40 लाख रुपये था।
तब तक काल्पनिक है लाभ और घाटा
अब, जून में इस निवेश का मूल्य 1.30 लाख रुपये है। इसलिए, यदि आप डिटेल में देखें तो एक निवेशक के रूप में आपने 7 साल पहले 40,000 रुपये का फायदा कमाया। अब निवेश मूल्य में हाल ही में आई गिरावट से आप कह सकते हैं कि आपने पैसा खो दिया है। ये सभी जोखिम के उदाहरण हैं, जो निवेश करते समय हो सकते हैं। जब बचत और निवेश की बात आती है, तो समझें कि आप किसी न किसी तरह का जोखिम उठाते हैं। जब आप बैंक में पैसा रखते हैं, तो आप इसके मूल्य को रिस्क में डालते हैं, क्योंकि ब्याज दर महंगाई या टैक्स से मेल नहीं खाती है। बिना वजह डरने के बजाय समझदारी से जोखिम का इस्तेमाल करना चाहिए।
हर निवेश में अलग-अलग वृद्धि
कहीं भी पैसे का निवेश होता है तो मूल्य में वृद्धि के तरीके अलग होते हैं। म्यूचुअल फंड और शेयर के मामले में यह ज्यादातर बाजार की बढ़त पर निर्भर होता है।
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इस तरीके से लोग चुराते हैं पैसे
एक और तरीका है...जिससे हम लोगों और उनसे जुड़े संगठनों को पैसे चुराने देते हैं। यह है शुल्क और फीस के रूप में। स्कूल में बच्चों के लिए भुगतान की जाने वाली फीस ही नहीं, बल्कि खरीदे गए वित्तीय उत्पादों (बीमा या बैंक में खोले गए एफडी) के लिए चुकाए जाने वाले शुल्क को भी लेकर भ्रम न पालें। बीमा एजेंट पॉलिसी पर कमीशन कमाता है। बैंक एफडी, काउंटर के पीछे बैठे उस व्यक्ति के लिए प्रोत्साहन के रूप में कार्य करता है, जिसने आपका अकाउंट खोला है। ये उन उत्पादों के लिए भुगतान हैं, जो जरूरी नहीं कि आपके लिए हों। फिर भी आप उन्हें खरीद लेते हैं।
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सोना न खरीदकर उठाया 9,500 का घाटा
यहीं पर हमारा व्यवहार काम आता है। कल्पना करें कि एक जनवरी, 2024 को सोने का भाव 64,090 रुपये प्रति 10 ग्राम था, लेकिन तब आपने नहीं खरीदा। जून में कीमत बढ़कर 73,580 रुपये पहुंच गई तो आपको लगता है कि 9,500 रुपये खो दिए। भले ही आपने सोना नहीं खरीदा, लेकिन आपको छह महीने की छोटी अवधि में कुछ पैसे कमाने के लिए उपलब्ध अवसर को खोने का दर्द महसूस होता है।
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कागजी लाभ या हानि वास्तविक नहीं
यहीं पर चुपके-चुपके का डायलॉग काम आता है। जो है, वो नहीं है। अर्थात कागज पर दिखने वाला लाभ या हानि वास्तव में लाभ या हानि नहीं है, क्योंकि आप उस निवेश से बाहर नहीं निकले हैं। इससे भी महत्वपूर्ण दूसरा डायलॉग है और जो नहीं है वो, वो कैसे हो सकता है? यह उन लोगों के लिए है जो बाजार गिरने पर रोते हैं कि उन्हें नुकसान हुआ है। यह उदाहरण उन लोगों के लिए सही है जो कहते हैं कि उन्होंने शेयरों में एक लाख का निवेश किया। शेयर ने 7 साल में बोनस और लाभांश के रूप में 40,000 रुपये का भुगतान किया और 31 मार्च, 2024 को इसका मूल्य 1.40 लाख रुपये था।
तब तक काल्पनिक है लाभ और घाटा
अब, जून में इस निवेश का मूल्य 1.30 लाख रुपये है। इसलिए, यदि आप डिटेल में देखें तो एक निवेशक के रूप में आपने 7 साल पहले 40,000 रुपये का फायदा कमाया। अब निवेश मूल्य में हाल ही में आई गिरावट से आप कह सकते हैं कि आपने पैसा खो दिया है। ये सभी जोखिम के उदाहरण हैं, जो निवेश करते समय हो सकते हैं। जब बचत और निवेश की बात आती है, तो समझें कि आप किसी न किसी तरह का जोखिम उठाते हैं। जब आप बैंक में पैसा रखते हैं, तो आप इसके मूल्य को रिस्क में डालते हैं, क्योंकि ब्याज दर महंगाई या टैक्स से मेल नहीं खाती है। बिना वजह डरने के बजाय समझदारी से जोखिम का इस्तेमाल करना चाहिए।
हर निवेश में अलग-अलग वृद्धि
कहीं भी पैसे का निवेश होता है तो मूल्य में वृद्धि के तरीके अलग होते हैं। म्यूचुअल फंड और शेयर के मामले में यह ज्यादातर बाजार की बढ़त पर निर्भर होता है।
- अगर आपने एक लाख रुपये का निवेश किया है और कुछ वर्षों बाद यह 1.20 लाख हो जाता है। अब, 20,000 रुपये का यह लाभ तब तक लाभ नहीं है, जब तक आप निवेश को बेचकर बाहर नहीं निकल जाते।
- यही बात तब भी लागू होती है, जब बाजार में गिरावट से आपके निवेश का मूल्य कम हो जाता है।