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पंछियों का संसार और हम: कभी सुनी है डाल पर बैठे उस ठठेरेे की टुक-टुक..!

Wed, 07 Apr 2021 11:08 AM IST
Hitarath Rawal हितार्थ रावल
Updated Wed, 07 Apr 2021 11:08 AM IST
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interesting facts about coppersmith barbet in hindi
घोंसला बनाते हुए बारबेट - फोटो : तस्वीर: पी. वी. किरन

सबसे आम पक्षी ध्वनियों में से एक, जो पूरे भारत में सुनी जा सकती है, वह है उच्च स्वर की दोहरावदार टुक-टुक-टुक, जैसे कि कोई ठठेरा एक हथोड़े से धातु को मार रहा हो। लेकिन इस आवाज़ पर ज्यादातर लोगों द्वारा ध्यान नहीं दिया जाता है। यदि गौर से खोजें, तो यह देखकर आश्चर्य होगा कि ध्वनि एक छोटे, विषम आकार के हरे पक्षी द्वारा निकली जा रही है। इस पक्षी का सिर और पैर लाल है, गाल और गला पीला और बदन धुमैला। यह पक्षी कॉपर्समिथ बारबेट (छोटा बसन्ता) है।

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छोटा बसन्ता की दुनिया 
कोपरसमिथ बारबेट एक एशियाई बारबेट है, जो भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण पूर्व एशिया में पाया जाता है। यह ज्यादातर बगीचों, पेड़ों और विरल वुडलैंड में निवास करता है। जबकि इसकी तालमापी के समान आवाज़ संदिग्ध है, इसे ढूंढना मुश्किल हो सकता है क्योंकि इसका छलावरण और छोटा आकर इसे आसानी से पत्तियों के बीच छिपा देता है।
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कोपर्समिथ बारबेट ज्यादातर फल खाता है। यह बरगद, पीपल, अंजीर, जामुन और अन्य फल पसंद करता है। लेकिन यह कीटों को पकड़ते हुए भी देखा गया है। प्रतिदिन, इसे अपने वजन के लगभग 1.5 से 3 गुना भोजन की आवश्यकता होती है। इसलिए, बारबेट बीजों के फैलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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कोपर्समिथ बारबेट ज्यादातर एकान्त या छोटे समूहों में रहता है, लेकिन कभी-कभी फलने वाले पेड़ों के आसपास बड़ी संख्या में पाया जा सकता है। यह ऊंचे पेड़ों की ऊपरी, सुखी शाखाओं पर धूप का आनंद लेते हुए अपनी तेज आवाज़ निकालना पसंद करता है। इसके टुक-टुक-टुक के पुकार की ताल प्रति मिनट 108 से ले कर 204 बार तक हो सकती है। कॉल करते समय, चोंच बंद रहती है और गले के दोनों किनारों पर त्वचा का एक भाग फैलता-सिकुड़ता है, और प्रत्येक पुकार के साथ-साथ इसका सिर भी ऊपर-नीचे हिलता है।

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प्रेम अभिव्यक्ति के बीच बारबेट की एक जोड़ी - फोटो : तस्वीर: रोहित यादव

प्रेमाभिव्यक्ति और छोटा बसंता
नर और मादा दोनों समान दिखते हैं। वे गाते हुए, गला फुलाकर, सिर झुकाकर और पूंछ हिलाकर एक प्रेमालाप अनुष्ठान करते हैं। वे चोंच से एक-दूसरे के पर भी सवांरते है। वे अपना घोंसला बनाने के लिए एक पेड़ की शाखा में छेद करते हैं। इसलिए, कोपर्समिथ बारबेट्स के लिए मृत लकड़ी वाले आवास आवश्यक हैं। भारत में मुख्य रूप से फरवरी से अप्रैल तक इनका प्रजनन का मौसम होता है। मादा छेद के अंदर तीन से चार अंडे देती है। दोनों नर और मादा लगभग दो सप्ताह तक अंडे सेते हैं। बारबेट के चूज़े लगभग 36 दिनों के बाद उड़ने लगते है।

शिकारी पक्षी कभी-कभी वयस्क बारबेट को पकड़ लेते है। वे मनुष्यों के साथ किसी भी प्रत्यक्ष संघर्ष में शामिल नहीं हैं, और IUCN रेड लिस्ट के लिस्ट कंसर्न (सबसे कम खतरे वाली प्रजाति) श्रेणी में सूचीबद्ध हैं। लेकिन वे पेड़ों के कटने और कीटनाशकों के जहर से खतरों का सामना करते हैं। तो, क्या आप इसकी लयबद्ध ध्वनि को अनदेखा करना पसंद करेंगे या इसकी सुंदरता पर अचंभा करेंगे?

लेखक वर्तमान में भारतीय वन प्रबंधन संस्थान, भोपाल से वन प्रबंधन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कर रहे हैं।

यह श्रंखला 'नेचर कन्ज़र्वेशन फाउंडेशन (NCF)' द्वारा चालित 'नेचर कम्युनिकेशन्स' कार्यक्रम की एक पहल है। इस का उद्देश्य भारतीय भाषाओं में प्रकृति से सम्बंधित लेखन को प्रोत्साहित करना है। यदि आप प्रकृति या पक्षियों के बारे में लिखने में रुचि रखते हैं तो ncf-india से संपर्क करें।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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