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दृष्टिसंपन्न, ऊर्जावान, आत्मविश्वासी और प्रगतिगामी नेता थीं इंदिरा गांधी

Thu, 31 Oct 2019 10:41 AM IST
Devendra Suthar देवेंद्र सुथार
Updated Thu, 31 Oct 2019 10:41 AM IST
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Indira Gandhi death anniversary special indira was a powerful leader in indian politics
इंदिरा गांधी दृष्टिसंपन्न, ऊर्जावान, तेजस्वी, आत्मविश्वासी और प्रगतिगामी नेता थीं।

इंदिरा गांधी दृष्टिसंपन्न, ऊर्जावान, तेजस्वी, आत्मविश्वासी और प्रगतिगामी नेता थीं। जिन्होंने भारत को अंतरराष्ट्रीय नक्शे में एक मजबूत, सक्षम और निर्णय लेने के राष्ट्र के रूप में प्रसारित किया और कामयाब हुईं। भारत की वह अजीम शख्सियत जिसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी प्यार से 'इंदु' कहते थे, जिसे उसके पिता जवाहरलाल नेहरू और गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर दुलार से 'प्रियदर्शिनी' बुलाते थे। बाबा (दादा) मोतीलाल नेहरू ने अपनी मां के नाम के याद में जिसका नामकरण 'इंदिरा' नाम से किया जिसका शाब्दिक अर्थ लक्ष्मी या दुर्गा होता है। इंदिरा गांधी ने अपनी कर्त्तव्यनिष्ठा और दृढ़ इच्छाशक्ति से अपने नाम को चरितार्थ किया।

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और वह क्षण भी आया जब 17 दिसंबर, 1971 को भारतीय उपमहाद्वीप का इतिहास और भूगोल एक साथ बदलकर एक नए देश बांग्लादेश को जन्म देकर भारत की तीसरी प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने भारतवासियों से 'दुर्गा' और 'भारत की लौह महिला' की उपाधि हासिल कर लीं।
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इंदु से प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी बनने का उनका सफर बड़े उतार चढ़ाव एवं संघर्ष का रहा। 19 नवंबर,1917 को इलाहाबाद में पिता जवाहरलाल नेहरू और माता कमला नेहरू के घर जन्मी इंदु ने गांधी के सुझाव पर पूना के प्यूपिल्स ओन स्कूल में 1931 से 1934 तक पढ़ाई की। 1934 में शांति निकेतन के विश्वभारती में शिक्षा ली। किंतु मां कमला नेहरू के खराब स्वास्थ के कारण इंदिरा की पढ़ाई में व्यवधान भी आया। पुनः इंग्लैंड के ब्रिस्टल में बैडमिंटन स्कूल और फिर ऑक्सफोर्ड के सोमरविले कॉलेज में पढ़ाई की। 16 मार्च,1946 को उनका विवाह फिरोज गांधी से हुआ जिनसे दो पुत्र राजीव गांधी और संजय गांधी की उत्पत्ति हुई।

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Indira Gandhi death anniversary special indira was a powerful leader in indian politics
श्रीमती इंदिरा गांधी ने बचपन में ही बाल चरखा संघ और 1930 में वानर सेना का निर्माण कर स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान देना शुरू कर दिया था।

श्रीमती इंदिरा गांधी ने बचपन में ही बाल चरखा संघ और 1930 में वानर सेना का निर्माण कर स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान देना शुरू कर दिया था। वे 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में जेल भी गईं। 1947 के भारत विभाजन के अराजक दौर में इंदिरा ने शरणार्थी शिविरों को संगठित करने और वहां चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था करने में अविस्मरणीय भूमिका निभाई। 1959 में इंदिरा को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया। इंदिरा 2 जुलाई, 1964 को लालबहादुर शास्त्री मंत्रिमंडल में सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनीं और शास्त्री के मृत्यु के बाद 24 जनवरी 1966 को भारत की तीसरी प्रधानमंत्री बनीं।

1966 से 1977 तक लगातार तीन बार भारत की प्रधानमंत्री बनकर इंदिरा भारत के राजनीतिक क्षितिज पर छा गई। पुनः 14 जनवरी,1980 को इंदिरा चौथी बार भारत की प्रधानमंत्री बनीं।  इंदिरा के कुल 16 वर्ष के प्रधानमंत्री के कार्यकाल में भारत ने अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित किए।

राष्ट्र हित में काम करने की दृष्टि से इंदिरा ने 1969 में बैंकों का राष्ट्रीयकरण और 1972 में बीमा कारोबार का राष्ट्रीयकरण कर दिया। 1960-70 के दशक में हरित क्रांति और श्वेत क्रांति की शुरूआत कर इंदिरा ने भारत को खाद्यान्न उत्पादन और दुग्ध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। गरीबी उन्मूलन हेतु 20 सूत्रीय कार्यक्रम लागू कर इंदिरा ने देश में अभूतपूर्व लोकप्रियता हासिल कर लीं। 1972 में इंदिरा को देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न प्रदान किया गया। राष्ट्रीय क्षितिज से बाहर निकलते हुए 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के 93 हजार सैनिकों का आत्मसमर्पण कराकर न केवल विश्व कीर्तिमान स्थापित किया वरन अमेरिका के विरोध को दर किनार कर एक नए देश बांग्लादेश को जन्म दे दिया। वहीं 1974 में पोखरण में परमाणु विस्फोट करके भारत को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र में परिवर्तित कर दिया। इंदिरा ने 1982 में गुटनिरपेक्ष देशों की अध्यक्षता की और इसी वर्ष वे अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी की अध्यक्ष भी चुनी गईं। 

इस समय तक श्रीमती इंदिरा गांधी वो अंतरराष्ट्रीय नेता बन चुकी थीं जिनकी बातों को पूरा विश्व सुनने के लिए बाध्य था। यद्यपि 25 जून,1975 में देश में इंदिरा ने आपातकाल लागू करने की भूल की, उससे कुछ वर्षों के लिए उनकी लोकप्रियता गिरी लेकिन 1980 के लोकसभा चुनाव में इंदिरा ने आपातकाल की भूल के लिए जनता से माफी मांगते हुए वे पुनः अपनी लोकप्रियता के शिखर पर पहुंच गईं और 14 जनवरी,1980 को प्रचंड़ बहुमत के साथ पुनः भारत की प्रधानमंत्री बनीं।

ऐसी अद्वितीय प्रतिभा की धनी एक साथ विश्व का इतिहास और भूगोल बदल देने में सक्षम भारत की पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी को आतंकवाद से निपटने के लिए अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में चलाए गए ऑपरेशन ब्लू स्टार की पृष्ठभूमि में राजनीतिक शहादत देनी पड़ी जब 31 अक्टूबर,1984 को उनके अंगरक्षकों द्वारा उनकी राजनीतिक हत्या कर दी गई। विश्व को भारत की अभूतपूर्व उपस्थिति का एहसास कराने वाली जिंदगी औऱ देश के लिए कई अहम फैसले लेने वाली भारत की लोकप्रिय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एक अंतिम जनसभा में कहा था कि वो अपने शरीर का एक-एक कतरा भारत के नाम कर देंगी जो कि उन्होंने कर भी दिखाया। वीररस के अग्रणी कवि डॉ. हरिओम पंवार द्वारा इंदिरा गांधी की स्मृति में रचित कविता का यह अंश प्रशंसनीय है -

वो पर्वत राजा की बेटी ऊंची हो गयी हिमालय से
जिसने भारत ऊंचा माना सब धर्मों के देवालय से
भूगोल बदलने वाली वो इतिहास बदलकर चली गयी 
जिससे हर दुश्मन हार गया अपनों के हाथों छली गयी ...

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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