फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   Indian science Congress theme significance objective

107th Indian science congress: हर नागरिक को विज्ञान से जोड़ना आवश्यक

Mon, 06 Jan 2020 01:47 PM IST
shashank dwivedi शशांक द्विवेदी
Updated Mon, 06 Jan 2020 01:47 PM IST
विज्ञापन
Indian science Congress theme significance objective
विज्ञान आम आदमी के पास पहुंचेगा तभी विकास होगा। - फोटो : Social Media

भारत में विज्ञान के सबसे बड़े वार्षिक कार्यक्रम 107वें  भारतीय विज्ञान कांग्रेस का बेंगलुरु में उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वैज्ञानिक आम लोगों के फायदे के लिए अनुसंधान करें साथ ही वैज्ञानिक उपलब्धियों को समाज तक पहुंचाया जाए, इससे युवाओं में  वैज्ञानिक चेतना जाग्रत होगी और शोध ,अनुसंधान का माहौल भी बनेगा।

विज्ञापन


विज्ञान कांग्रेस 2020 की थीम ‘ग्रामीण विकास के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी’ पर बोलते हुए पीएम मोदी ने  कहा कि कृषि क्षेत्र को सहायता करने वाली तकनीकों में क्रांति की आवश्यकता है।
विज्ञापन


पीएम मोदी ने कहा कि मुझे इस बात की खुशी है कि इस दशक और नए साल के मेरे शुरुआती कार्यक्रमों में से एक ये विज्ञान, तकनीक और अन्वेषण पर आधारित है। असल में भारत की विकास गाथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सफलता पर निर्भर करती है। ऐसे में विज्ञान, तकनीक एवं नवोन्मेष के परिदृश्य में बदलाव की जरूरत है। पीएम मोदी ने विकास में विज्ञान के योगदान पर कहा कि देश के हर परिवार तक शौचालय और बिजली पहुंची है इसके पीछे टेक्नोलॉजी ही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


गांव में सड़कें समय पर पूरी हो रही हैं गरीब के लिए 2 करोड़ मकान पूरे हुए हैं। ये टेक्नोलॉजी की ही ताकत है। टेक्नोलॉजी की वजह से सभी अहम काम समय और पूरे हो रहे हैं। आज किसान बिचौलियों के बगैर अपने उत्पादों को सीधे बाजार में बेच पा रहे हैं। किसानों को ई-गवर्नेंस की वजह से सभी अहम जानकारियां उन्हें उंगलियों पर मिल रही है। आने वाला दशक विज्ञान और टेक्नोलॉजी की भूमिका अहम रहने वाली है।

देश-विदेश में वैज्ञानिक प्रवृत्ति को बढ़ावा देने तथा वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहन देने में भारतीय विज्ञान कांग्रेस की अहम भूमिका है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस भारतीय वैज्ञानिकों की शीर्ष संस्था है। इस संस्था की स्थापना साल 1914 में हुई थी। इसकी स्थापना का उद्देश्य भारत में विज्ञान को बढ़ावा देने हेतु किया गया था।

इस संस्था के आरंभ से ही भारत के महान वैज्ञानिक, शिक्षाविद् एवं राजनेता जुड़े रहे। भारतीय विज्ञान कांग्रेस संघ ने भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विज्ञान कांग्रेस की एक और अहम विशेषता यह है कि इसमें विदेशों से नोबेल विजेता वैज्ञानिक भी सम्मिलित होते हैं।

क्या उद्देश्य है विज्ञान कांग्रेस का? 
असल में पिछले कई  सालों से चल रहे विज्ञान काग्रेस के इस आयोजन का भी मुख्य उद्देश आम आदमी तक विज्ञान का लाभ पहुंचाकर सतत शोध और विकास को बढ़ावा देना है।  लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि अभी भी देश में विज्ञान ,वैज्ञानिक संचार और विज्ञान चेतना का अभाव दिखता है, इसलिए पीएम मोदी ने कहा कि कृषि क्षेत्र को सहायता करने वाली तकनीकों में क्रांति की आवश्यकता है।

क्या हम उदाहरण के लिए डंठल जलाने की समस्या को लेकर किसानों का समाझान कर सकते हैं? क्या हम अपने ईंट भट्टों को कम उत्सर्जन और अधिक ऊर्जा दक्षता के लिए फिर से डिज़ाइन कर सकते हैं। इस दौरान भारत की अंतरिक्ष क्षेत्र में संभावनाओं पर भी बात हुई।

उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष को खोजने में हमारी सफलता अब गहरे समुद्र के नए सीमांत में प्रतिबिंबित होनी चाहिए। हमें पानी, ऊर्जा, भोजन और खनिजों के विशाल समुद्री संसाधनों का पता लगाने, मानचित्र बनाने की तैयारी करनी होगी।

प्रधानमंत्री ने देश के युवा वैज्ञानिकों को संदेश देते हुए कहा कि इस देश में युवा वैज्ञानिकों के लिए मेरा आदर्श वाक्य रहा है- इनोवेट, पेटेंट, प्रोड्यूस एंड प्रॉस्पर। ये चार कदम हमारे देश को तेजी से विकास की ओर ले जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अब प्लास्टिक कचरे के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक कचरे से मेटल निकालने और उसके रि-यूज को लेकर भी हमें नई तकनीक, नए तकनीक की जरूरत है। 

असल में अभी भी जमीनी स्तर पर देश में अभी भी “विज्ञान “ आम आदमी से काफी दूर है। हम अभी तक आम आदमी में वैज्ञानिक चेतना का विकास नहीं कर पाए हैं। विज्ञान संचार की दिशा में केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को काफी काम करने की जरूरत है।

समाज के हर तबके तक विज्ञान और तकनीक की पहुंच होनी चाहिए। डिजिटल कनेक्टिविटी एक मौलिक अधिकार बनना जरूरी है। हर नागरिक को विज्ञान से जोड़ना आवश्यक है। देश के विकास में विज्ञान का महत्वपूर्ण योगदान है। विज्ञान दुनिया को और करीब लाता है।

विज्ञान से ही आधुनिक भारत का सपना पूरा होगा। देश में शोध और अनुसंधान का माहौल होगा तभी  हम तकनीकी प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो सकेंगे । विज्ञान में ही गरीबी और बेरोजगारी दूर करने का सामर्थ्य है। देश की प्रगति एवं मानव विकास, विज्ञान तथा तकनीकी से जुड़ा हुआ है और आज चीन ने विश्व में दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था का जो दर्जा हासिल किया है वह उसके विज्ञान और तकनीकी गतिविधियों से ही संभव हुआ है। 

Indian science Congress theme significance objective
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विज्ञान कांग्रेस को संबोधित करते हुए। - फोटो : ANI

किसी भी राष्ट्र की प्रगति विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शिक्षा और अनुसंधान में हुई निरंतर वृद्धि पर निर्भर करती है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए हमारा अनुसंधान अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरुप होना चाहिए। भारतीय शिक्षा और अनुसंधान की प्रमुख कमजोरी भारतीय अनुसंधान में विश्वविद्यालयों द्वारा हिस्सेदारी का अपेक्षाकृत बहुत कम होना है।

सरकार द्वारा विश्वविद्यालयों में अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए कई कदम उठाए जा सकते हैं। अभी हालात यह है कि सरकार सिर्फ सरकारी संस्थाओं को प्रोत्साहित करती है और उनकी आर्थिक मदद करती है जबकि बुनियादी अनुसंधान के विकास के लिए सरकार को निजी विश्वविद्यालयों को भी अपने साथ  जोड़ना होगा।

बेहतर निजी संस्थानों को आर्थिक मदत भी करनी होगी जिससे वो भी अपना योगदान दे सके। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आज 95 प्रतिशत निजी संसथान है जबकि सिर्फ 5 प्रतिशत सरकारी संसथान है। देश में आधारभूत विज्ञान के विकास के लिए हमें सरकारी के साथ-साथ निजी क्षेत्र की भी भागीदारी बढ़ानी पड़ेगी।

विज्ञान ने आधुनिक भारत को बदलने में काफी मदद की है। जब भी विश्व ने हमारे लिए अपने दरवाजे बंद किए तो हमारे वैज्ञानिकों ने अनूठी पहल की और हमें नया रास्ता दिखाने की सफल कोशिश की। पहले प्रयास में ही मंगल ग्रह पर पहुंचना हमारी बड़ी कामयाबी है। अपनी उपलब्धियों पर हमें गर्व है लेकिन अभी कई चुनौतियों का सामना करना है।

भारत के फार्मास्यूटिकल उद्योग ने विश्व में अपनी पहचान इसलिए बनाई है क्योंकि उसने शोध के क्षेत्र में बहुत अधिक निवेश किया है। अभी कई दूसरे क्षेत्रों में भी निवेश बढ़ाने की जरूरत है जिससे वो अधिक गति से तरक्की कर सकें।

इसके लिए हमें विज्ञान एवं वैज्ञानिकों के गौरव और सम्मान को बहाल करना होगा साथ में ही  विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में शीर्ष पर रखना होगा। सच्चाई यह है कि अनुसंधान करने की सहूलियत उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कारोबार करने की सहूलियत।

आज जरूरत इस बात की भी है कि वैज्ञानिक ज्यादा उचित, प्रभावी टिकाउ एवं किफायती प्रौद्योगिकियां विकसित करने के लिए पारंपरिक स्थानीय ज्ञान का समावेश करें ताकि विकास एवं प्रगति में जबरदस्त योगदान मिल सके। जिससे विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के हाथ निर्धनतम, दूरस्थ स्थल पर रहने वाले एवं सर्वाधिक जरुरतमंद व्यक्ति तक पहुँच जाएं ।

अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में आज भारत की गिनती अग्रणी देशों में होती है। विज्ञान के कई दूसरे क्षेत्रों में भी बहुत-सी भारतीय प्रतिभाएं सक्रिय हैं। लेकिन देश में विज्ञान की शिक्षा ,शोध और अनुसंधान की स्थिति ठीक नहीं है । समाज में वैज्ञानिक चेतना और वैज्ञानिक नजरिए की व्यापक कमी दिख रही है। 

फिलहाल विज्ञान की चर्चा अक्सर बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धियों के नजदीक सिमट कर रह जाती है। मगर आज सबसे ज्यादा जरुरत इस बात की है कि देश में विज्ञान की शिक्षा की स्थिति कैसे सुधरे, और दूसरे, जन-समस्याओं के निराकरण में विज्ञान का उपयोग कैसे बढ़ाया जाए। देश में विज्ञान की शिक्षा के लिए स्कूली स्तर पर प्रयोगशालाओं की भारी कमी है।

समझने और प्रयोग करके सीखने के बजाय विद्यार्थियों को तथ्य रटना पड़ता है जो कि ठीक नहीं है। स्कूल के बाद विश्वविद्यालय स्तर पर भी विज्ञान शिक्षा के बुनियादी हालात ठीक नहीं है जिन पर तत्काल ध्यान देने की जरुरत है। आज जरूरत है विज्ञान के विषय में गंभीरता से एक राष्ट्रीय नीति बनाने की और उस पर संजीदगी से अमल करने की जिससे देश में वैज्ञानिक शोध और वैज्ञानिक चेतना का एक सकारात्मक माहौल बन सके । 

(लेखक राजस्थान के मेवाड़ यूनिवर्सिटी में डायरेक्टर और टेक्निकल टूडे पत्रिका के संपादक हैं )

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed