फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   independence day, economic growth of india post independence

आजादी का अमृत महोत्सव: 75 वर्षों में अर्थव्यवस्था में विशेष सुधार, कुछ लक्ष्य अब भी शेष

सार

पिछले 75 वर्षों में भारत ने आर्थिक स्वतंत्रता को अपनाया और निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पंचवर्षीय योजनाओं को तैयार करने के साथ-साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में काम किया। 1947 में, जब भारत स्वतंत्र हुआ था तब इसकी जीडीपी या कुल आय 2.7 लाख करोड़ रुपये और जनसंख्या 34 करोड़ थी, वहीं  2022 में, देश की जीडीपी लगभग 235 लाख करोड़ रुपये और जनसंख्या 1.3 अरब से अधिक है।

विज्ञापन
independence day, economic growth of india post independence
तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर भारत - फोटो : pixabay

विस्तार

इस वर्ष हम एक स्वतंत्र राष्ट्र होने के 75  गौरवशाली वर्ष को पूरा कर रहे हैं। 15 अगस्त 1947 का दिन पूरे देश की अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण की शुरुआत भी थी। 75 वर्षों में, भारतीय लोकतंत्र ने कई मोड़ लेते हुए एक लंबा सफर तय किया है। बैंक ऑफ अमेरिका के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था के 2031 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की उम्मीद है। दुनिया के सामने भारत का कद बढ़ा है और हमें एक ‘महाशक्ति' के रूप में देखा जा रहा है। 1947 में भारत की स्वतंत्रता उसके आर्थिक इतिहास का सबसे बड़ा कदम था। अंग्रेजों द्वारा किए गए विभिन्न हमलों से देश बुरी तरह से गरीब और आर्थिक रूप से ध्वस्त हो गया था। 

विज्ञापन


पिछले 75 सालों में भारत ने आर्थिक स्वतंत्रता को अपनाया और निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पंचवर्षीय योजनाओं को तैयार करने के साथ-साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में काम किया।
विज्ञापन

 

1947 में, जब भारत स्वतंत्र हुआ था तब इसकी जीडीपी या कुल आय 2.7 लाख करोड़ रुपये और जनसंख्या 34 करोड़ थी, वहीं आज, 2022 में, देश की जीडीपी लगभग 235 लाख करोड़ रुपये और जनसंख्या 1.3 अरब से अधिक है। भारत की साक्षरता दर 1947 में लगभग 12 प्रतिशत से बढ़कर आज 75 प्रतिशत हो गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन


आजादी के समय खाद्यान्न की कमी का सामना करने वाला भारत अब आत्मनिर्भर भारत बन दुनियाभर के देशों में खाद्यान्न निर्यात कर रहा है। हरित क्रांति के परिणामस्वरूप रिकॉर्ड अनाज उत्पादन हुआ। भारत अब दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता राष्ट्र बन चुका है। चीनी का यह दूसरा और कपास का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक। 1970 में, श्वेत क्रांति (ऑपरेशन फ्लड) ने देश को दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक देश में बदल दिया।


सड़क और राजमार्ग निर्माण, हवाई अड्डों और बंदरगाहों का विस्तार देशभर में गतिशीलता बढ़ाने के लिए किया गया है। भारतीय रेलवे अब दुनिया के सबसे बड़े रेलवे नेटवर्कों में से एक है जिसमें 1,21,520 किमी ट्रैक और 7,305 स्टेशन शामिल हैं। भाग्य की रेखाओं की तरह सड़कें तरक्की का रास्ता होती हैं।

2001 में वाजपेयी सरकार ने स्वर्णिम चतुर्भुज योजना का शुभारंभ किया, जो भारत में दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता के चार प्रमुख शहरों को जोड़ने वाली सबसे बड़ी राजमार्ग परियोजना है। देश में पहली बार प्रतिदिन 37 किमी नेशनल हाईवे 6 से 12 लेन के बनाए जा रहे। 1947 में देश के राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई 24,000 किमी थी जो अब 1,40,115  किमी हो गई है।

आज भारतीय सड़क नेटवर्क दुनिया में सबसे बड़ा बन गया है। 1950 में सिर्फ 3,061 गांवों में बिजली उपलब्ध थी, जबकि 2020 तक 5,97,376 गांवों में विद्युतीकरण किया गया।

independence day, economic growth of india post independence
डिजिटल विकास में भारत अग्रसर - फोटो : Pixabay

देश के डिजिटली  विकास

अस्सी के दशक के मध्य में बड़े पैमाने पर कम्प्यूटरीकरण का आगमन, स्वतंत्रता के बाद के भारत के लिए महत्वपूर्ण सकारात्मक विकासों में से एक है, जिसने अंततः भारत को एक विशाल आईटी शक्ति के रूप में माना। देश का भविष्य 'डिजिटल' है। डिजिटल लेनदेन का उदय और छोटे व्यापारियों में क्यूआर कोड की बढ़ती लोकप्रियता सुर्खियों में है, मंदिरों में क्यूआर कोड से डिजिटल दान  हो रहा।

वर्ष 1991 में अर्थव्यवस्था का वैश्वीकरण करके औद्योगिक लाइसेंसिंग प्रणाली को समाप्त कर दिया गया और अर्थव्यवस्था को निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी के साथ-साथ विदेशी निवेश के लिए खोल दिया। 1991 के सुधारों के कारण वैश्विक जीडीपी में भारत की रैंकिंग तेजी से बढ़ी। 

किसी भी अर्थव्यवस्था का उत्थान और पतन काफी हद तक उसके वित्तीय क्षेत्र के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। आज़ादी के 75 सालों में बैंकिंग की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है और यह कई पड़ावों से होते हुए आगे बढ़ रही। 1969 में राष्ट्रीयकरण ने बैंकिंग को 'क्लास बैंकिंग' से 'मास बैंकिंग' (सोशल बैंकिंग) में स्थानांतरित कर दिया।

बैंकों का बढ़ता नेटवर्क

1947 में जहां 664 निजी बैंकों की लगभग 5000 शाखाएं थीं वही आज 12 सरकारी बैंकों, 22 निजी क्षेत्र के बैंकों, 43 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और 46 विदेशी बैंकों की लगभग 1 लाख 40  हजार शाखाएं देश में कार्यरत हैं। इस वर्ष बजट में भारत ने एक डिजिटल मुद्रा की योजना की घोषणा की है। एचडीएफसी बैंक के मूल हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन (एचडीएफसी) के साथ विलय के बाद यह दुनिया के शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान बैंकों में से एक हो जाएगा और यह विश्व के शीर्ष 10 क्लब में जगह बनाने वाला पहला भारतीय बैंक भी होगा। 

फार्मास्यूटिकल्स में भारत अब एक प्रमुख उत्पादक है और नई दवाओं के विकास के लिए नित नए अनुसंधान कर रहा है। इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रिकल मशीनरी में देश नए वैश्विक बेंचमार्क छू रहा। 60 के दशक में, सेवा क्षेत्र में कामकाजी आबादी का केवल 4% कार्यरत था जो अभी 30% से अधिक लोगों को रोजगार दे रहा। इस समय सेवा क्षेत्र का जीडीपी में 50% से अधिक का योगदान है, और भविष्य में आंकड़े बढ़ने की उम्मीद है। मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया और गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स देश की अर्थव्यवस्था को लगातार मजबूत बना रहे।

वर्तमान सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में देश में उद्यमिता की संस्कृति को बढावा देने की कोशिश की है। देश अब बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर से ‘मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर’ की और बढ़ चुका है। भारत, जो अब विश्व स्तर पर एक प्रभावशाली देश बन गया है, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2022 के लिए अनुमानित सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 8.2% की वृद्धि के साथ भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गया है।

कुछ चुनौतियां अब भी शेष

इसमें कोई संदेह नहीं कि देश ने इन 75 वर्षों में एक लंबा रास्ता तय किया है और जो एक मील का पत्थर है पर हम अभी भी एक 'विकासशील देश है, देश को अभी भी एक लंबा रास्ता तय करना है, और ये भी सही है कि आने वाले समय में देश के सामने कई चुनौतियां भी होंगी। रेलवे वर्तमान में सबसे बड़ा नियोक्ता है फिर भी ट्रेन में आरक्षित सीट पाने के लिए लंबी प्रतीक्षा सूची है। देश के सामने रोजगार सृजन का मुद्दा  भी एक महत्वपूर्ण चुनौती बना रहेगा।

भारत ने स्वतंत्रता के बाद एक अरब अधिक उपभोक्ता जुड़े पर क्रय शक्ति कुछ लोगों तक सीमित है। आर्थिक असमानता भी देश के सामने बड़ा मुद्दा है, आज हम कृषि के मामले में आत्मनिर्भर हैं, लेकिन किसान इस पेशे से बाहर जा रहे हैं, राष्ट्रीय कर्ज बढ़कर 620 बिलियन हो गया है।

विदेशी सत्ता की बेड़िया टूटी, देश में बहुत कुछ बदला पर विदेशी ताकतें हमारे संस्कार को नहीं बदल सके आज भी हम “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना से आगे बढ़ रहे। अगले 25 वर्षों में एक विकसित भारत बनाने के लिए देश के सभी लोगों को एक साथ आना होगा। आज अमृत काल में भारत को 'राम राज्य' बनने के लिए गाँधी व बुद्ध के मूल्यों, विवेकानंद के विज़न और जेआरडी टाटा के लक्ष्य की पहले से अधिक जरूरत है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed