अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वन्यजीव संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता
भारत दुनिया का सबसे बड़ा टाइगर रेंज वाला देश है। बाघ परियोजना के शुरू होने के समय 9 टाइगर रिजर्व थे, वहीं अब देश में 55 टाइगर रिजर्व हो गए हैं। बाघ अभ्यारणों के प्रबन्धन का प्रभाव, उसका मूल्यांकन, बाघों की पुनर्स्थापना जैसी नीतियों के साथ साथ नए टाइगर रिजर्व की घोषणा भी बाघों की संख्या में बढ़ोत्तरी का प्रमुख कारण है।
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विस्तार
भारत के इतिहास में बाघ का विशेष महत्व है। हिन्दू पौराणिक कथाओं में देवी दुर्गा बाघ की सवारी करती हैं। मां दुर्गा के पास अपार शक्ति है और बाघ उस शक्ति का मुख्य प्रतीक है। मध्यप्रदेश में दस हजार साल पुरानी रॉक कला पर बाघों का चित्रण पाया गया है। जब हम वन्य जीव संरक्षण की बात करते हैं तो उसमें सभी जीव का अपना महत्व है, किन्तु बाघ का महत्त्व हमारे लिए सदा विशेष रहा है, इसलिए इस दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने कई अभिनव पहल और प्रयास किए हैं, जिसका परिणाम हमारे सामने है।
हम सबको ध्यान होगा कि बाघ परियोजना के 50 वर्ष पूरे होने के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक महत्वपूर्ण विषय का उल्लेख किया था उन्होंने कहा था कि ‘मानवता का बेहतर भविष्य तभी संभव है, जब हमारा पर्यावरण सुरक्षित रहे और जैव विविधता का विस्तार होता रहे’। पिछले दस वर्षों में प्रकृति से जुड़ी मानवता के संरक्षण की दिशा में किए जा रहे केंद्र सरकार के ठोस पहल के कारण ही पर्यावरण व वन्य जीव संरक्षण की नीतियों पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज दुनिया का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।
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यह एक संवेदनशील प्रधानमंत्री की नीतियों और नेतृत्व का ही परिणाम है कि भारत में न केवल बाघों की आबादी में वृद्धि हुई, बल्कि उन्हें अनुकूल वातावरण भी प्रदान किया जा रहा है। भारत में प्रकृति की रक्षा करना हमारी महान संस्कृति का अहम हिस्सा है और शायद यही वो कारण है, जिसकी वजह से भारत के पास वन्य जीव संरक्षण में कई अनूठी उपलब्धियां हैं। जिसपर हमें गर्व करना चाहिए, दुनिया के केवल 2.4% भूमि क्षेत्र के साथ भारत, वैश्विक जैव विविधता में लगभग 8% योगदान देता है।
बाघों का संरक्षण और प्रयास व दिशा
बाघों के संरक्षण और उनके संवर्धन की दिशा में बाघ परियोजना ने महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में दस सालों में इस परियोजना को और अधिक गति मिली है, साथ ही उनके मार्गदर्शन व नेतृत्व में शुरू किया गया इंटरनेशनल बिग कैट्स एलायंस यानी आईबीसीए वन्य जीव संरक्षण में मील का पत्थर साबित होगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने बाघ परियोजना के 50 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में एक अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन की जरूरत पर बल देते हुए कहा था कि- "वन्यजीव संरक्षण किसी एक देश का मुद्दा नहीं है, बल्कि एक सार्वभौमिक मुद्दा है।"
यह एलायंस इसी भावना का विस्तार है। इसका शुभारंभ बाघ, शेर, तेंदुए, हिम तेंदुए, चीता, जगुआर और प्यूमा, यानी बिग कैट्स के संरक्षण के लिए हुआ है। प्रधानमंत्री श्री मोदी की इस पहल की सराहना वैश्विक स्तर पर हो रही है। यह एलाइंस बाघ सहित अन्य बड़ी बिल्लियों और उनकी कई लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण में अग्रणी भूमिका का निर्वाह करेगा। बड़ी बिल्लियों(बिग कैटस) के निवास स्थान वाले देश एलायंस का हिस्सा बन रहे हैं।
देश में वर्ष 1973 में बाघ परियोजना शुरू किया गया था। यह एक वन्य जीव संरक्षण पहल थी, जिसका प्राथमिक उद्देश्य टाइगर रिजर्व बनाकर बाघों की आबादी के प्राकृतिक आवासों में अस्तित्व और रख-रखाव को सुनिश्चित करना था।
निश्चित तौर पर देश में बाघों के संरक्षण और उनकी सुरक्षा में यह परियोजना अग्रणी भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में इसमें गति आई है। इसकी सफलता न केवल भारत के लिए बल्कि सम्पूर्ण विश्व के लिए गर्व का विषय है। दुनिया के 70 प्रतिशत से अधिक बाघ भारत में निवास करते हैं। भारत में बाघों की संख्या 3,682 हैं। भारत में बाघ अभयारण्य लगभग 80 हजार वर्ग किलोमीटर भूमि पर फैले हैं। पिछले दस वर्षों में देश में बाघों की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
बाघ परियोजना और भारत
1973 में जब बाघ परियोजना शुरू हुई तो बाघों की गिनती के लिए वन विभाग के कर्मचारी उनके पदचिह्नों के निशान के लिए ग्लास और बटर पेपर का इस्तेमाल किया करते थे। अब वन विभाग के कर्मचारी नए जमाने की तकनीकी के साथ कदमताल करते हुए जियो टैगिंग और कैप्चर-मार्क-एंड-रीकैप्चर मेथड का इस्तेमाल करते हैं।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा टाइगर रेंज वाला देश है। बाघ परियोजना के शुरू होने के समय 9 टाइगर रिजर्व थे, वहीं अब देश में 55 टाइगर रिजर्व हो गए हैं। बाघ अभ्यारणों के प्रबन्धन का प्रभाव, उसका मूल्यांकन, बाघों की पुनर्स्थापना जैसी नीतियों के साथ साथ नए टाइगर रिजर्व की घोषणा भी बाघों की संख्या में बढ़ोत्तरी का प्रमुख कारण है। प्रधानमंत्री श्री मोदी देशवासियों को लगातार वन्य जीवों के प्रति संवेदनशील होने के लिए प्रेरित करते रहे हैं। इसका भी सकारात्मक असर पड़ रहा है।
पिछले वर्ष संपन्न हुए जी 20 की अध्यक्षता के दौरान प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में बाघों और प्रकृति संरक्षण की अपनी भावना को भारत सरकार ने निरंतर प्रोत्साहित किया। केंद्र सरकार चीते को नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से भारत लेकर आई है। भारत में जब चीते आए तो इसकी चहुंओर सराहना हुई। चीतों के आगमन से लोगों में और अधिक वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता आई।
चर्चा का विषय बना रहा। लोगों में चीते को लेकर उत्सुकता रही। भारत में चीते का परिवार बढ़ रहा है। टाइगर रिजर्व में पर्यटकों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है। भारत सरकार न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बेहतर काम कर रही है, बल्कि प्रकृति एवं वन्य जीव संरक्षण की दिशा में भी निरंतर सार्थक प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने न केवल बाघों की आबादी को घटने से बचाया है बल्कि बाघों को फल-फूलने के लिए एक बेहतरीन इकोसिस्टम भी प्रदान किया है।
लेखक, केंद्रीय विदेश तथा पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री हैं
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