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दूसरा पहलू: आज यूएसबी के दौर में यह जानना दिलचस्प, कैसे कैसेट में समाया संगीत?
Tue, 20 Jan 2026 06:55 AM IST
लव गौर
क्रिस्टोफर वेन
क्रिस्टोफर वेन
Published by: लव गौर
Updated Tue, 20 Jan 2026 06:55 AM IST
सार
आज यूएसबी के दौर में यह जानना दिलचस्प है कि एक जमाने में कैसे संगीत कैसेट में रिकॉर्ड होता था और लोग उसे बार-बार सुनते थे। कैसेट टेप का आविष्कार 1963 में फिलिप्स कंपनी ने किया था। फिर 1979 में नाटकीय ढंग से जन्म हुआ सोनी वॉकमैन का। यह नहीं भूलना चाहिए कि कैसेट टेप ही वह पहली तकनीक थी, जिसने आम लोगों को चलते-फिरते संगीत रिकॉर्ड करने और सुनने की आजादी दी और यही इसकी सबसे बड़ी विरासत है।
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संगीत की कैसेट
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
कल्पना कीजिए कि आप माइक्रोफोन में गा रहे हैं व साथ-साथ गिटार भी बजा रहे हैं। जब आप गाते हैं, तो आपके गले का स्वर-तंतु (वोकल कॉर्ड), मुंह व सांस आसपास की हवा को कंपन (वाइब्रेशन) में ले आते हैं। यही कंपन ध्वनि में तब्दील होती है। ठीक इसी तरह, जब आप गिटार के तारों को छेड़ते हैं, तो गिटार की लकड़ी का ढांचा कंपन करता है, जिससे उसके भीतर की हवा में हलचल मचती है और संगीत पैदा होता है। माइक्रोफोन और गिटार के ‘पिकअप’ (विशेष माइक्रोफोन) में नन्हे चुंबक होते हैं। ये चुंबक हवा की हलचल के साथ कंपन करते हैं और एक विद्युत धारा उत्पन्न करते हैं। यही विद्युत धारा रिकॉर्डिंग हेड में एक चुंबकीय क्षेत्र बनाती है और रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया शुरू होती है।
दरअसल, एक कैसेट टेप असल में एक प्लास्टिक का खोल होता है, जिसके भीतर दो घूमने वाली चरखियां (स्पूल्स) होती हैं। इन पर प्लास्टिक की एक लंबी और पतली पट्टी लिपटी होती है, यही वह मैग्नेटिक टेप है, जिस पर ध्वनि दर्ज की जाती है। यह टेप एक चुंबकीय पदार्थ (जैसे आयरन ऑक्साइड, या बेरियम फेराइट) से लेपित होती है, जो चुंबकीय क्षेत्र के संपर्क में आते ही प्रतिक्रिया करती है। रिकॉर्डिंग के दौरान टेप एक रील से दूसरी रील पर घूमती है। रास्ते में, रिकॉर्डिंग हेड बिजली की मदद से एक चुंबकीय क्षेत्र बनाता है। जैसे ही टेप वहां से गुजरती है, उस पर मौजूद बारीक कण आवाज के उतार-चढ़ाव के हिसाब से एक खास पैटर्न में जम जाते हैं।
यही पैटर्न हमारी रिकॉर्ड की गई आवाज होती है। टेप पर बने चुंबकीय पैटर्न फिर से बिजली के संकेत पैदा करते हैं। ये चुंबकीय कण उसी स्थिति में रहते हैं, जब तक उन पर दोबारा कोई नया चुंबकीय क्षेत्र असर न डाले। यही कारण है कि एक कैसेट टेप को बार-बार सुना जा सकता है। टेप रिकॉर्डर में एक तीसरा हेड भी होता है-इरेज हेड। यह लगातार एक समान विद्युत प्रवाह भेजकर टेप पर मौजूद पुराने चुंबकीय पैटर्न को मिटा देता है।
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कैसेट टेप का आविष्कार 1963 में फिलिप्स कंपनी ने किया था। इससे पहले भी 1930 के दशक से टेप पर रिकॉर्डिंग संभव थी, पर वह तकनीक बड़ी, भारी और महंगी थी। फिर 1979 में जापानी कंपनी सोनी के सह-संस्थापक मासारू इबुका की एक चाह ने संगीत की दुनिया बदल दी। वह लंबी उड़ानों में अपना पसंदीदा संगीत सुनना चाहते थे। इसी चाह से जन्म हुआ सोनी वॉकमैन का। 1997 में एमपी3 प्लेयर आए, 2001 में एपल का आईपॉड लॉन्च हुआ, और आज हम अपने मोबाइल फोन पर ही रिकॉर्डिंग व संगीत सुन लेते हैं। लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि कैसेट टेप ही वह पहली तकनीक थी, जिसने आम लोगों को चलते-फिरते संगीत रिकॉर्ड करने और सुनने की आजादी दी और यही इसकी सबसे बड़ी विरासत है। - द कन्वर्सेशन से
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दरअसल, एक कैसेट टेप असल में एक प्लास्टिक का खोल होता है, जिसके भीतर दो घूमने वाली चरखियां (स्पूल्स) होती हैं। इन पर प्लास्टिक की एक लंबी और पतली पट्टी लिपटी होती है, यही वह मैग्नेटिक टेप है, जिस पर ध्वनि दर्ज की जाती है। यह टेप एक चुंबकीय पदार्थ (जैसे आयरन ऑक्साइड, या बेरियम फेराइट) से लेपित होती है, जो चुंबकीय क्षेत्र के संपर्क में आते ही प्रतिक्रिया करती है। रिकॉर्डिंग के दौरान टेप एक रील से दूसरी रील पर घूमती है। रास्ते में, रिकॉर्डिंग हेड बिजली की मदद से एक चुंबकीय क्षेत्र बनाता है। जैसे ही टेप वहां से गुजरती है, उस पर मौजूद बारीक कण आवाज के उतार-चढ़ाव के हिसाब से एक खास पैटर्न में जम जाते हैं।
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यही पैटर्न हमारी रिकॉर्ड की गई आवाज होती है। टेप पर बने चुंबकीय पैटर्न फिर से बिजली के संकेत पैदा करते हैं। ये चुंबकीय कण उसी स्थिति में रहते हैं, जब तक उन पर दोबारा कोई नया चुंबकीय क्षेत्र असर न डाले। यही कारण है कि एक कैसेट टेप को बार-बार सुना जा सकता है। टेप रिकॉर्डर में एक तीसरा हेड भी होता है-इरेज हेड। यह लगातार एक समान विद्युत प्रवाह भेजकर टेप पर मौजूद पुराने चुंबकीय पैटर्न को मिटा देता है।
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कैसेट टेप का आविष्कार 1963 में फिलिप्स कंपनी ने किया था। इससे पहले भी 1930 के दशक से टेप पर रिकॉर्डिंग संभव थी, पर वह तकनीक बड़ी, भारी और महंगी थी। फिर 1979 में जापानी कंपनी सोनी के सह-संस्थापक मासारू इबुका की एक चाह ने संगीत की दुनिया बदल दी। वह लंबी उड़ानों में अपना पसंदीदा संगीत सुनना चाहते थे। इसी चाह से जन्म हुआ सोनी वॉकमैन का। 1997 में एमपी3 प्लेयर आए, 2001 में एपल का आईपॉड लॉन्च हुआ, और आज हम अपने मोबाइल फोन पर ही रिकॉर्डिंग व संगीत सुन लेते हैं। लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि कैसेट टेप ही वह पहली तकनीक थी, जिसने आम लोगों को चलते-फिरते संगीत रिकॉर्ड करने और सुनने की आजादी दी और यही इसकी सबसे बड़ी विरासत है। - द कन्वर्सेशन से