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सुंदरता की कल्पना: वास्तविक जीवन ‘वर्तमान क्षण’ में है... स्वयं विचार करें और सीखें

Mon, 05 May 2025 07:52 AM IST
शुभम कुमार आर्थर स्कोपेनहॉवर
आर्थर स्कोपेनहॉवर Published by: शुभम कुमार Updated Mon, 05 May 2025 07:52 AM IST
सार

जब लोग अपनी इच्छित वस्तुएं प्राप्त कर लेते हैं, तब उन्हें एहसास होता है कि वास्तविक जीवन तो उन्हीं ‘वर्तमान क्षणों’ में था, जिन्हें वे भविष्य की सुंदरता की कल्पना में बिता रहे थे।
 

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Imagination of Beauty: Real life is in the ‘present moment Reflect and learn for yourself
सुंदरता की कल्पना - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

हमारे जीवन के दृश्य किसी खुरदरे पत्थर पर तराशी गई तस्वीरों की तरह हैं। वे नजदीक से देखने पर अप्रभावी लगते हैं, लेकिन यदि आपको उन्हें सुंदर देखना है, तो दूर से देखना होगा। पत्थर पर तराशी गई तस्वीरों की तरह बहुत से लोग अपना जीवन भविष्य पर केंद्रित करके जीते हैं। वे किसी लक्ष्य या उपलब्धि की प्रतीक्षा करते हैं, और अक्सर वर्तमान क्षण की उपेक्षा करते हैं। जब वे अपनी इच्छित वस्तुएं प्राप्त कर लेते हैं, तब उन्हें एहसास होता है कि वास्तविक जीवन तो उन ‘वर्तमान क्षणों’ में था, जिन्हें वे सुंदर भविष्य की कल्पना में बिता रहे थे। उन क्षणों की सराहना नहीं की गई और न ही उनका आनंद  लिया गया, बल्कि वे इस बात पर अड़े हुए थे कि आगे क्या होने वाला है। इसके बाद, हम अक्सर बीते हुए समय के लिए पछतावा करते हैं। प्रयास और मोहभंग का यह निरंतर चक्र हमें अस्थायी अस्तित्व की स्थिति में जीने की ओर ले जाता है, जहां भविष्य के लक्ष्यों की खोज में जीवन का सच्चा अनुभव छूट जाता है।
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पत्थर पर तराशी गई तस्वीरें दूर से देखने में अति सुंदर लगती हैं, लेकिन उनके एक-एक पत्थर की अपनी कीमत होती है, जो उनकी सुंदरता को बढ़ाती है। उसी प्रकार, हमारे वर्तमान का एक-एक पल सुंदर भविष्य का निर्माण करता है। प्रत्येक दिन एक छोटा-सा जीवन है, प्रत्येक जागरण और उदय एक छोटा-सा जन्म है, प्रत्येक सुबह एक छोटी-सी युवावस्था है, प्रत्येक विश्राम और नींद एक छोटी-सी मृत्यु है। युवाओं को जो बात सबसे ज्यादा भ्रमित और निराश करती है, वह यह कि जीवन में खुशी अवश्य मिलेगी।
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वे अपने सपनों और बाहरी दुनिया में एक ऐसी छवि का निर्माण करते हैं, जहां सिर्फ और सिर्फ खुशी है, वहां कोई दुख और पीड़ा नहीं। महान खुशी की यह खोज भ्रामक छवियों से प्रेरित होती है, जो सपनों और आकांक्षाओं में बसती हैं। संयोग से होने वाला दुख कभी भी उतना दर्दनाक नहीं लगता, जितना किसी दूसरे की मनमानी इच्छा से होने वाला दुख। जहां खुशी है, वहां दुख भी होगा और दर्द के बिना जीवन का कोई अर्थ नहीं है। जीवन की लय कभी सीधी नहीं होती है, वे अक्सर इस सत्य को नजर अंदाज कर देते हैं।
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वे सपनों में देखे गए परिपूर्ण जीवन के लिए लगातार प्रयास करने के बजाय अवास्तविक अपेक्षाएं करते हैं और अंततः उन्हें असंतोष ही हाथ आता है। इस गलत धारणा को मिटा देना चाहिए। अपने भीतर खुशी ढूंढना मुश्किल हो सकता है, लेकिन इसे कहीं और ढूंढना असंभव है। हर व्यक्ति अपने दृष्टि-क्षेत्र की सीमाओं को ही दुनिया की सीमा मानता है। इन्सान को देखने का नजरिया बदलना ही होगा, तभी वह उन कष्टों में भी शांति से बैठ सकता है, जो अन्यथा उसे निराशा की ओर ले जा सकते हैं। भले ही उसके पास कोई सुख या खुशी न हो, फिर भी वह अपने भीतर और अपने-आप में सुकून पा सकता है। यह सुकून एक आशीर्वाद की तरह है।


सूत्र
स्वयं विचार करें और सीखें
ऐसा हो सकता है कि कोई सत्य, कोई अंतर्दृष्टि, जिसे आपने धीरे-धीरे और मेहनत से पाया है, वह आसानी से किसी पुस्तक में  मिल सकती है। लेकिन यदि आप स्वयं सोचकर उस तक पहुंचे हैं, तो वह सौ गुना अधिक मूल्यवान है। स्वयं विचार करें और सीखें, यह गुण जीवन को सुंदर बनाता है।
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