फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   illegal immigration from India to Portugal story of hari singh

कबूतरबाजी के रास्ते जाना था पुर्तगाल लेकिन हुई ऐसी घटना की 8 महीनों से ऐसा है हाल

Fri, 26 Apr 2019 05:09 PM IST
Priyamvada Sahay प्रियंवदा सहाय
Updated Fri, 26 Apr 2019 05:09 PM IST
विज्ञापन
illegal immigration from India to Portugal story of hari singh

हरि सिंह उन हज़ारों लाखों भारतीयों में से एक हैं जिनको विदेश जाकर कमाने का चस्का है। बाहर ज्यादा पैसे कमाना है और वापस आकर अपने लोगों के बीच रौब गाँठना है। कबूतरबाजी के रास्ते वे कुछ साल पहले सिंगापुर जा चुके हैं। कम पढ़ेलिखे लेकिन मेहनती होने के कारण उन्हें वहाँ काम मिल गया। हरि ने वहां अच्छी कमाई की और वापस गुजरात अपने घर आ गये। अबकी बार मंज़िल पुर्तगाल थी लेकिन इस बार कबूतरबाजी के गिरफ़्त में वे फँस गये। और पुर्तगाल जाने की जगह ग्रीस में ही पिछले आठ महीनों से अटके पड़े हैं।

विज्ञापन


देश से बाहर जाने के ज़रूरी काग़ज़ी दस्तावेज़ पूरे नहीं होने के कारण वे गंतव्य स्थान तक नहीं पहुंच सके। अब इसमें दोष उनका था या फिर उन्हें भारत से बाहर भेजने वाले एजेंट का, यह कहना मुश्किल है। लेकिन इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि एजेंट के झाँसे में आकर और नक़ली दस्तावेज़ों के बल पर बाहर जाने वालों की तादाद हज़ारों में होगी। तभी तो कबूतरबाजी का धंधा भारत में बड़े पैमाने पर फलफूल रहा है।
विज्ञापन


हरि सिंह से मेरी मुलाक़ात सेंतोरीनी ( ग्रीस का एक ख़ूबसूरत द्विप) के एक बीच पर हुई। मैं वहां समुद्र के साफ़ नीले पानी और समुद्री तट का ख़ूबसूरत नज़ारा देखने गई थी। वहां मेरी मुलाक़ात एक भारतीय जोड़े से हुई। पता चला कि वे उड़ीसा के रहने वाले हैं लेकिन पिछले कुछ समय से स्विट्ज़रलैंड में रह रहे हैं। ठीक उसी समय मेरी नज़र एक दूसरे नौजवान पर पड़ी जो देखने में एशियन लग रहा था।
विज्ञापन
विज्ञापन


अंदाज़ा था कि वह भारत या पाकिस्तान का होगा। वह लंबे समय से फ़ोन पर वीडियो चैट कर रहा था। लेकिन उसकी नज़र लगातार हमलोगों पर थी। जब टहलते हुए मैं उसके नज़दीक पहुंची और हमारा एक फ़ैमिली फ़ोटो लेने का अनुरोध किया तो वह फ़ोन छोड़ तुरंत ही खड़ा हो गया। उसने झट पूछ लिया कि आपलोग इंडिया से हैं? हमने जैसे ही अपने बारे में बताया तो उसने तुरंत अपनी कहानी सुना डाली।

 

दरअसल हरि सिंह गुजराती थे। वहां उनका ख़ुद का ठीक ठाक व्यवसाय था जिससे उनकी आमद  50-60 हज़ार रुपए महीने की हो जाती थी। लेकिन उनके सिर पर विदेश जाकर पैसे कमाने का भूत सवार था। वे पढ़े लिखे नहीं हैं। जिससे उन्हें बाहर जाने में दिक़्क़त आती। चार साल पहले किसी तरह जुगाड़ करके उन्होंने सिंगापुर जाने का बंदोबस्त कर लिया था। वहां उन्हें साफ़ सफ़ाई के काम में नौकरी भी मिल गई। अच्छा पैसा कमाया और घर आकर यार दोस्तों के बीच ख़ूब शेखी भी बघारी। लेकिन अब चस्का कहीं और जाने का था। उनके कुछ रिश्तेदार पुर्तगाल में काम करते हैं।

पिछले साल हरि सिंह ने भी वहीं जाने का मन बनाया। लेकिन जाएं कैसे?उनके इस उतावलेपन की भनक जब एजेंट को लगी तो उसने हरि को सब्ज़बाग़ दिखाना शुरू किया। ग़ैर क़ानूनी तरीके से पुर्तगाल जाने के लिए उन्होंने 20 लाख रूपए एजेंट को दिये थे। बात यह हुई कि कुछ हवाई सफ़र और लंबे समुद्री सफ़र यानी जहाज़ के ज़रिये वे वहां पहुंच जाएंगे इस सफ़र में उनकी पत्नी भी साथ थी। लेकिन कारवां सही जगह नहीं पहुंच सका।

और फिर हुई ऐसी घटना 
हरि सिंह बताते है कि  एजेंट  ने ग्रीस में आते -आते हाथ खड़े कर दिए। जाली काग़ज़ पर इससे आगे का सफ़र वह नहीं करा सकता था। लिहाज़ा ग्रीस में ही उन्हें उतरना पड़ा।बिना सही दस्तावेज़ के वे जाएं तो जाएं कहां? ग़ैरक़ानूनी तरीके से यूरोप पहुंचने के कारण क़ानूनी सज़ा भुगतने का डर उन्हें सता रहा था। लेकिन मोटी क़ीमत अदाकर यहां तक पहुंचे हरि को ख़ाली हाथ वतन लौटना भी नहीं है। उनके लिए बस यही विकल्प था कि वे ग्रीस में हीं कहीं रहे और किसी तरह अपने जीवन यापन की व्यवस्था करे।

काफ़ी मशक़्क़त के बाद भी पति पत्नी दोनों को एक साथ रहने और नौकरी पाने में कामयाबी नहीं मिली। बिना ज़रूरी दस्तावेज़ के विदेश में ख़ुद को भरोसेमंद साबित करना,काम पाने और रहने की व्यवस्था करना कितना मुश्किल रहा होगा इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है। लेकिन इसके लिए जोड़े को बिछड़ना पड़ा। पत्नी को एथेंस में छोटा मोटा काम मिल गया।और हरि सिंह को सेंतोरीनी आना पड़ा।

कंस्ट्रक्शन के काम में किसी तरह घुस गए हैं, ताकि जीवन की गाड़ी आगे बढ़ सके। पिछले तीन महीने से वे सेंतोरीनी और पत्नी एथेंस में हैं। वे पराए शहर में अकेली रह रही पत्नी की सेफ़्टी को लेकर चिंतित नहीं हैं। वे बोलते हैं यहां रहने वाली अकेली महिलाएं भी पूरी तरह सुरक्षित हैं। लेकिन पैसे के अभाव में पत्नी से मिलना मुश्किल है। इसलिए वीडियो चैट का ही सहारा है।

हालांकि कंस्ट्रक्शन के काम में अब उनको 1500 यूरो महीने का मिल जाता है। पत्नी भी कुछ ऐसा ही कमा ले रही है। उम्मीद है कि उनकी आर्थिक हालत अब धीरे-धीरे ठीक हो जाएगी। लेकिन पुर्तगाल जाने का बुखार अबतक उतरा नहीं है। जब अपनी आपबीती सुनाने से उनका मन हल्का हुआ तो बोलने लगे कि अपने काग़ज़ बनवाकर कर एक दिन वे पुर्तगाल पहुंचेंगे। इसके बाद स्वीडन फिर नार्वे। अब इसके लिए उन्हें आगे क्या क़ीमत चुकानी होगी यह उन्हें नहीं पता। पर जाने का जोश ख़त्म नहीं हुआ है। 
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है. आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं. लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed