{"_id":"691197e6e2e54edafa0e46e5","slug":"history-of-world-literature-the-tenth-man-novel-by-graham-greene-2025-11-10","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"विश्व साहित्य का आकाश: द टेंथ मैन- नैतिकता का संकट","category":{"title":"Blog","title_hn":"अभिमत","slug":"blog"}}
विश्व साहित्य का आकाश: द टेंथ मैन- नैतिकता का संकट
सार
- ग्राहम ग्रीन ने दशकों पत्रकारिता की, 25 उपन्यास, कविता-कहानियां लिखीं, नाटक, संस्मरण, फिल्म समीक्षा, पत्र (‘ग्राहम ग्रीन: ए लाइफ इन लेटर्स’) लिखे। घुमक्कड़ ग्राहम ग्रीन, तीन दशक तक पत्रकारिता के सिलसिले में जहां-जहां जाते, अपने उपन्यास हेतु लोकेशन तलाश कर लेते।
विज्ञापन
नॉवेल की दुनिया
- फोटो : Freepik.com
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हेनरी ग्राहम ग्रीन को बीसवीं सदी का एक प्रमुख इंग्लिश रचनाकार माना जाता है। 2 अक्तूबर 1904 को इंग्लैंड में जन्मे ग्राहम ग्रीन ने दशकों पत्रकारिता (द टाइम्स, स्पैक्टेटर) की, 25 उपन्यास, कविता-कहानियां लिखीं, नाटक, संस्मरण, फिल्म समीक्षा, पत्र (‘ग्राहम ग्रीन: ए लाइफ इन लेटर्स’) लिखे। घुमक्कड़ ग्राहम ग्रीन, तीन दशक तक पत्रकारिता के सिलसिले में जहां-जहां जाते, अपने उपन्यास हेतु लोकेशन तलाश कर लेते।
विज्ञापन
खुद को अनीश्वरवादी कहने वाले ग्राहम ग्रीन (वैसे उन्होंने अपनी होने वाली पत्नी विवियन डेरेल-ब्राउनिंग के प्रभाव से 1926 में रोम कैथोलिक धर्म अपना लिया था। एक साल बाद विवियन से उन्होंने शादी भी की।) अपने उपन्यासों के कथानक में आधुनिक युग के राजनैतिक मुद्दे और जिंदगी में नैतिक द्विविधा लाते हैं। खतरे, अत्याचार, सामाजिक-राजनैतिक स्थिति सदा मनुष्य के समक्ष नैतिकता का संकट उत्पन्न करते हैं, उसे द्विविदा में डालते रहे हैं।
विज्ञापन
पाठकों का उनकी रचनाओं को हाथों-हाथ लेने का एक कारण यह भी रहा है। उनसे मेरा परिचय एक फिल्म समारोह में कैरॉल रीड की फिल्म ‘द फॉलन आइडल’ (1948) देखने के दौरान हुआ। बाद में पता चला कि इस फिल्म की तरह ही ग्राहम ग्रीन की लिखी कहानी पर अगले साल कैरॉल रीड ने ‘द थर्ड मैन’ भी बनाई है।
विज्ञापन
25 साल की उम्र में लिखा पहला उपन्यास
एंग्लिकन परिवार में पैदा हुए ग्राहम ग्रीन के पिता चार्ल्स ग्रीन स्कूल हेडमास्टर थे, मां मैरिअन 19वीं सदी के स्कॉटिश लेखक रॉबर्ट लुई स्टीवेंसन की रिश्तेदार थीं। इस दम्पति के पांच में से चौथे बच्चे हेनरी को स्कूल रास नहीं आता था, अत: उसे इलाज के लिए लंदन मनोचिकित्सक के पास भेज दिया गया। कौन सोचता है, जिन बच्चों को बेजान स्कूली पढ़ाई पसंद नहीं आती है, वे जीनियस हो सकते हैं।
25 साल के ग्राहम ने अपना पहला उपन्यास ‘द मैन विदइन’ लिखा, पहले उपन्यास पर ‘द स्मगलर्स’ फिल्म बनी। बाद में उनके कई उपन्यास-कहानियों के साथ यही हुआ। ‘द पॉवर एंड द ग्लोरी’, ‘दि एंड ऑफ द अफेयर’, ‘स्टाम्बुल ट्रेन’, ‘ए गन फॉर सेल’ (दिस गन फॉर हायर’), ‘द कॉन्फीडेंशियल एजेंट’, ‘मिनिस्ट्री ऑफ फीयर’, ‘द थर्ड मैन’, ‘द हार्ट ऑफ द मैटर’, ‘द क्वाएट अमेरिकन’, ‘द टेंथ मैन’ उनके कुछ उपन्यासों के नाम हैं।
विलियम गोल्डिंग उन्हें बीसवीं सदी के मनुष्य की चेतना एवं व्याकुलता का अभिलेखन करने वाला कहते हैं। कई बार उन्हें नोबेल केलिए नामांकित किया गया। बहुत सारे पुरस्कारों से नवाजे गए ग्राहम ग्रीन के उपन्यास ‘द टेंथ मैन’ में द्वितीय विश्वयुद्ध के समय बहुत सारे लोग जर्मन द्वारा गिरफ्तार कर लिए जाते, बहुतों को गोली मार दी जाती। इनमें धनी-गरीब, युवा-वृद्ध, पढ़े-लिखे-अनपढ़, क्वारें हों, शादीशुदा हों, न हों, बालबच्चेदार हों अथवा नहीं, अच्छे-बुरे सब शामिल थे। इसी तरह एक समूह के 30 लोग एक जेल में डाले दिए गए।
एक दिन जर्मन अधिकारी ने आदेश दिया, इनमें से तीन लोगों को सुबह मरना है। वे खुद तय कर लें, वे तीन कौन-कौन होंगे। वे खुद पर्ची डाल कर सुबह मारे जाने वाले तीन नाम निकालते हैं। इन तीन नामों में से एक नाम बहुत धनी वकील जीन लुई शिवाल का है। वह अपने पूरे धन, जमीन-जायदाद, बाग-बगचे के एवज में अपना जीवन विनिमय करता है। उसके सारे धन के एवज में समूह का ही एक आदमी जन्विएर मरने को राजी हो जाता है।
जन्विएर वकील शिवाल की सारी सम्पत्ति उसी से अपने नाम लिखवा कर अपनी वसीयत अपनी बीमार मां एवं युवा बहन के नाम लिखवा लेता है। और अगली सुबह जर्मन अधिकारियों की गोली खाकर मरता है। वह व्यक्ति दिखाना चाहता था कि एक दिन वह धनी हो जाएगा और अपने लोगों की सुख-सुविधा का प्रबंध करेगा। वसीयत के अनुसार उसके मरने पर यह सारी सम्पत्ति उसकी मां-बहन की हो जाती है।
दूसरी ओर शिवाल ने जो किया उसके चलते कई अनपेक्षित बातें उसके जीवन में होती जाती हैं। इस कैद से छूटने पर शिवाल भिखारी है, उसके पास न रहने को घर है और न ही खाने-पीने केलिए पैसे। उधर जन्विएर की बहन उसका इंतजार कर रही है। उसे पक्का मालूम है, जिस व्यक्ति ने उसके भाई का जीवन छीना है, वह एक दिन इस घर में अवश्य लौटेगा। वह सो नहीं पाती है, इस व्यक्ति से घृणा करती है, उसे देखते ही उसके मुंह पर थूकना चाहती है, उसे गोली मार देना चाहती है।
शिवाल उस घर में लौटता है, खाने-रहने के बदले काम करने को तैयार। मगर वह अपनी असली पहचान उजागर नहीं करता है। सब ठीक चल रहा था। इसी बीच एक जीन लुई शिवाल नाम से एक छूठा दावेदार वहां आ पहुंचता है।बहन उसके मुंह पर थूकती है। फिर शिवाल के सामने घटनाएं तेजी से घटती हैं। गोली चलती है, कौन मरता है, यह बताना मेरा काम नहीं है। अगर जानने की उत्सुकता है तो स्वयं पढ़ें। न पढ़ना हो, तो जैक गोल्ड निर्देशित इसी नाम की फिल्म देख लें।
फिल्म में प्रसिद्ध एवं अति कुशल अभिनेता एन्थॉनी होप्किन जीन लुई शिवाल की भूमिका में हैं। टिमोथी वाट्सन जन्विएर बना है, डेरेक जैकोबी ने धोखेबाज का अभिनय किया है, एवं बहन थेरेसे की भूमिका क्रिस्टीन स्कॉट थॉमस ने की है।
‘द टेथ मैन’ और इसपर बनी फिल्म
3 अप्रैल 1991 को स्विटजरलैंड में गुजरे ग्राहम ग्रीन के इस उपन्यास ‘द टेंथ मैन’ और इस पर बनी फिल्म की कहानी भी कम मजेदार नहीं है। वे इसकी पाण्डुलिपि किसी को देकर भूल गए थे। फिर कैसे यह उनके पास वापस पहुंची, उन्होंने इसे अंतिम रूप दिया और यह कैसे प्रकाशित हुई, यह सब जानना भी खूब रोचक है।
खैर, मनुष्य मन की विभिन्न अवस्थाओं का चित्रण जिस बुद्धिमता के साथ ग्राहम ग्रीन ने ‘द टेथ मैन’ में किया है, वह प्रशंसा का हकदार है। वे इस उदास करने वाली कहानी को धीरे-धीरे खोलते हैं। नैतिक संघर्ष को उन्होंने खूबसूरती से उभारते हैं। किताब की भूमिका उन्होंने स्वयं लिखी है, साथ ही 80 पन्नों की इस किताब में उनके अन्य दो काम ‘जिम ब्रैडोन एंड द वार क्रिमिनल’ एवं ‘नोबॉडी टू ब्लेम’ के फिल्म स्केच भी शामिल हैं। इसमें शक नहीं हेनरी ग्राहम ग्रीन कहानी कहना जानते हैं।
---------------
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।