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विश्व साहित्य का आकाश: शेहान करुणातिलक का सात चांद

Mon, 21 Oct 2024 05:32 PM IST
Dr. Vijay Sharma डॉ. विजय शर्मा
Updated Mon, 21 Oct 2024 05:32 PM IST
सार

शेहान करुणातिलक की पहली किताब ‘चाइनामैन: द लेजेंड ऑफ प्रदीप मैथ्यु’ (2011) खोए हुए क्रिकेटर की तलाश से संबंधित है। उनकी पहली किताब को 2012 का कॉमनवेल्थ बुक प्राइज प्राप्त हुआ था और इसे सब काल की एक सर्वोत्तम क्रिकेट किताब का खिताब हासिल है।

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history of world literature Shehan Karunatilaka Sri Lankan writer books
विश्व साहित्य - फोटो : istock

विस्तार

शेहान करुणातिलक का उपन्यास ‘द सेवेन मून ऑफ माली एल्मेडा’ बेचैन करने वाला है। उनके इस दूसरे उपन्यास को साल 2022 का बुकर पुरस्कार प्राप्त हुआ है। उपन्यास हमारे समय की कई सच्चाइयों से हमारा आमना-सामना कराता है। श्रीलंका के उपन्यासकार ने 1989-1990 में स्थापित इस उपन्यास में अपने देश श्रीलंका के उथल-पुथल वाले दौर (26 साल चले गृहयुद्ध) को चित्रित किया है। वे इस काल के असामान्य बहुस्तरीय अत्याचार की बड़ी सटीक भाषा में भर्त्सना करते हैं। दस साल उनके दिमाग में यह उमड़ता-घुमड़ता रहा। 

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ये सर्वाधिक भयंकर दिन हैं, जब जातीय युद्ध, मार्क्सवाद की बगावत, विदेशी सैन्य उपस्थिति तथा राज्य के जवाबी हमले दस्ते उन्माद की हद तक सक्रिय थे। राजनैतिक हत्याओं, लोगों के गायब होने, बम तथा शवों का था। नब्बे के अंत तक अधिकांश विरोधी मर चुके थे अत: उन्हें इन भूतों बल्कि वर्तमान के करीबी लोगों के बारे में लिखना सुरक्षित लगा।
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यह बहुस्तरीय उपन्यास आकर्षक, भावुकता से दूर, कभी क्रोधित, कभी नरम अविस्मरणीय स्वर वाला है। सजीव ऊर्जा के साथ लिखी गई इस कहानी का नायक माली अल्मेडा इसकी आत्मा है, उसका चरित्र जटिल है। 

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‘चाइनामैन: द लेजेंड ऑफ प्रदीप मैथ्यु’

शेहान करुणातिलक की पहली किताब ‘चाइनामैन: द लेजेंड ऑफ प्रदीप मैथ्यु’ (2011) खोए हुए क्रिकेटर की तलाश से संबंधित है। उनकी पहली किताब को 2012 का कॉमनवेल्थ बुक प्राइज प्राप्त हुआ था और इसे सब काल की एक सर्वोत्तम क्रिकेट किताब का खिताब हासिल है। यह किताब भारत में ‘चैट्स विद द डेड’ के नाम से प्रकाशित हुई थी। उनके दोनों उपन्यास न केवल श्रीलंका वरन एशिया महाद्वीप के जटिल इतिहास, राजनीति और समाज को समझने के लिए प्रमुख किताबें हैं।


उपन्यास दिखाता है कि युद्ध के अपराध को उजागर करते शरीर झील में डम्प कर दिए गए हैं। जहां एक शव ‘सर्फबोर्ड’ (पार उतरने के तख्ता) का काम करता है। इस दुष्काल में कोई किसी से कम नहीं है। सरकारी सत्ता-बल, पूर्वी अलगाववादी, दक्षिणी अराजकतावादी और उत्तरी शांति संस्थापक सब विशाल संख्या में लाशें पैदा करनेवाले हैं। 

उपन्यास के संवाद मारक हैं। नमूना देखिए-

‘हम मासूमों की सुरक्षा करते हैं,’ जासूस कासिम ने कहा। ‘मैंने सोचा हम शक्तिशालियों की सुरक्षा करते हैं।’
‘यहां तक कि परोपकारियों के भी अपने एजेन्डे होते हैं।’


एक स्थान पर वे लिखते हैं, ‘बम के विषय में आप एक अच्छी बात कह सकते हैं कि यह न तो नस्लवादी होता है, न ही लैंगिक भेदभाव वाला और न ही वर्ग की चिंता करता है। उपन्यास के नायक माली एल्मेडा ने अपनी आंखों से सुबकते अभिभावकों को पुलिस स्टेशन में अपने खोए बच्चों की खोज में धक्का खाते देखा है, लड़के-लड़कियों को बुरे लोगों के चंगुल में रहस्यमय स्थानों में कायरों की तरह नियंत्रित होते देखा है, एक डिटेक्टिव को एक प्यासे बंदी को पानी देते और कहते सुना है कि वह उसके चेहरे को न देखे।

मृत माली एल्मेडा ही कथावाचक भी है। ‘हमें  यह भ्रम है कि जब हम अपनी अंतिम सांस लेंगे हमारे सारे प्रश्नों के उत्तर होंगे; आप अपनी आंख बंद करते हैं, उन्हें खोलते हैं और अचानक सब समझ में आ जाता है। लेकिन मुझे यह अधिक उचित लगता है कि जब आप जागते हैं तो पूरी तरह से और अधिक भ्रमित होते हैं।’ 

लेखक को कोई शक नहीं है कि यह और अधिक बुरा होने वाला है। उस देश का क्या होगा, जिस देश में मौत दस्तों, आत्मघाती बम विस्फोटकों और किराए के गुंडों द्वारा हिसाब चुकता किया जाता है, संदिग्ध लोगों की सूचि निराशाजनक रूप से लंबी है, भूत-पिशाच द्वेष के साथ समूह में संपुष्टि (अनुप्रमाणित) कर सकते हैं। पर अभी तो उसे अपने दोस्तों, अपनी मां से मिलना है, उन्हें देखना है, किसी से माफी मांगनी है, अपनी मौत का करना पता करना है, अपराधियों की शिनाख्त करनी है। बहुत कुछ उसे करना है और समय बहुत कम है, मात्र सात चांद!

‘सेवन मून...’ एक साथ हत्या-रहस्य कथा, भूत कथा, राजनैतिक व्यंग्य कथा और समलैंगिक प्रेम कथा है। नायक समलैंगिक है और यह समय एचआईवी-एड्स की महामारी का चरमकाल है। 

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साहित्य का इतिहास - फोटो : Adobe Stock

‘द सेवेन मून ऑफ माली एल्मेडा’

शेहान करुणातिलक का दूसरा उपन्यास ‘द सेवेन मून ऑफ माली एल्मेडा’ श्रीलंका के युद्ध काल में मारे गए एक फोटोग्राफर माली अल्मेडा की कहानी है जो अपनी मौत का कारण पता करने के अभियान पर है। उसके पास पता करने केलिए मात्र सात दिन (सेवन मून्स) का समय है। माली अल्मेडा जुआरी और समलैंगिक है। 1990 में मौत के बाद जब वह जगता है, खुद को स्वर्ग के वीजा ऑफिस जैसे स्थान में पाता है।

पहले तो उसे विश्वास ही नहीं होता है कि वह मर गया है, उसने तमाम तरह के ड्रग्स लिए हुए थे, अत: उसे लगता है यह उसी का परिणम है। उनका असर खत्म होते ही सब ठीक हो जाएगा। इसके अलावा वह अपना मरना याद नहीं कर सकता है। अगर वह इन सबको इस भयानक स्वप्न में स्मरण नहीं कर सकता है तो उसकी मौत सत्य नहीं हो सकती है। उसके पास गृहयुद्ध के समय हुए अत्याचारों से जुड़े फोटोग्राफ हैं, जिनके उजागर होने पर हंगामा हो जाएगा। उसके पास अपने सबसे प्यारे लोगों से मिलने और हत्यारों का पता लगाने केलिए मात्र सात चांद का समय है। अभी वह लाइन में खड़ा है और उसे फॉर्म भरना है।

‘श्रीलंका के लोग फांसी के समय भी मजाक करने में माहिर होते हैं।’ कहने वाले उपन्यासकार ने अपना यह उपन्यास भयंकर त्रासद हास्य शैली में लिखा है, जो शैलियों, जीवन-मृत्यु, शरीर-आत्मा, पूर्व-पश्चिम की सीमाओं के पार जाता है।  34 साल का स्मार्ट, खूबसूरत, अभिमानी माली अल्मेडा अपनी अचानक हुई मौत से दु:खी है।

‘द सेवेन मून्स ऑफ माली अल्मेडा’ भविष्य के प्रति आगाह करता है। मरे हुए लोगों की लाइन आगे बढ़ने का नाम नहीं ले रही है। जिन्दा रहते माली अल्मेडा एक फोटोग्राफर था, जो अक्सर ‘गलत स्थानों पर कैमरा पकड़े रहता था।’ वह जो भी देखता, जानता था उसे दुनिया को दिखाने और रिपोर्ट करने को उत्सुक था।

माली अल्मेडा जानना चाहता है कि उसकी हत्या क्यों हुई और किसने की। उसकी मुख्य चिंता अपने बिस्तर के नीचे रखे एक बक्से की है। 

शेहान करुणतिलक बताते हैं कि उन्होंने मिथकों का भरपूर उपयोग किया है साथ ही मृतात्मा के सात दिन भटकने के विचार का भी। यह विचार विभिन्न रूपों में पूर्वी धर्मों तथा बौद्ध धर्म में बार-बार आता है। मगर असली बात है, मरने के बाद सरकारी नौकारशाही से टकराना और चारों ओर आत्माओं का भटकना और यह न जानना है कि वे कहां जाएं। अंत में प्रश्न है, क्या यह सब करना मूल्यवान था?


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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