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विश्व साहित्य का आकाश: अर्नेस्ट हेमिंग्वे- युद्ध के विरुद्ध

Mon, 04 Aug 2025 07:43 PM IST
Dr. Vijay Sharma डॉ. विजय शर्मा
Updated Mon, 04 Aug 2025 07:43 PM IST
सार

  • 1954 में अर्नेस्ट हेमिंग्वे को साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला। उन्हें उनके समस्त कार्य पर पुरस्कार मिला पर समिति ने खासतौर पर ‘दि ओल्ड मैन एंड द सी’ का उल्लेख किया।
  • उनके सात उपन्यास, छ: कहानी संग्रह, दो कथेतर गद्य की क्लासिकल कृतियां प्राप्त होती हैं।

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history of world literature A Farewell to Arms Novel by Ernest Hemingway
साहित्य की दुनिया - फोटो : Freepik.com

विस्तार

अनुभवजन्य लेखन में एक अधिकारिकता होती है। कुछ ऐसे रचनाकार हुए हैं, जिन्होंने अपने जीवन की त्रासदियों को शब्दों में पिरो कर कालजयी लेखन किया है। इतना ही नहीं वे नोबेल के मंच तक पहुंचे हैं। अर्नेस्ट हेमिंग्वे उनमें से एक हैं। वे एक बहुमुखी प्रतिभा के व्यक्ति थे।

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वे प्रथम विश्वयुद्ध में एम्बुलेंस ड्राइवर थे, बहुत अच्छे शिकारी थे (आज यह गुण नहीं माना जाता है।)। कुशल निशानेबाज, हथियारों के विशेषज्ञ थे। 21 जुलाई 1899 को प्रोटेस्टेंट परिवार में जन्में हेमिंग्वे को 10 वर्ष की उम्र में उनके पिता ने उन्हें उनकी पहली शॉट्गन दी थी।
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हेमिंग्वे ने पत्रकार के रूप में 1923 में मुसोलिनी का साक्षात्कार लिया था, जिसमें उन्होंने मुसोलिनी को ‘यूरोप का सबसे बड़ा धोखेबाज कहा था। फलस्वरूप वे मुसोलिनी की आंख की किरकिरी बन गए। वे कहानीकार, उपन्यासकार, फोटोग्राफर के साथ-साथ मछली मार, शौक से जंगल में रहने वाले, आउटडोर एडवेंचरर, बुल फाइटर भी थे। वे पीने के लती थे, जिससे उनके शरीर को बहुत नुकसान पहुंचा। उन पर स्त्री विरोधी होने का आरोप भी लगता है, हालांकि उनका साहित्य इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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साहित्य के नोबेल से सम्मानित 

1954 में अर्नेस्ट हेमिंग्वे को साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला। उन्हें उनके समस्त कार्य पर पुरस्कार मिला पर समिति ने खासतौर पर ‘दि ओल्ड मैन एंड द सी’ का उल्लेख किया। उनके सात उपन्यास, छ: कहानी संग्रह, दो कथेतर गद्य की क्लासिकल कृतियां प्राप्त हेती हैं।


‘मेन विदआउट वीमेन’, ‘विनर टेक नथिंग’, ‘द फिफ्थ कॉलम एंड फर्स्ट फोर्टी-नाइन स्टोरीज’ कहानी संग्रह, ‘द सन आलसो राइजेज’, ‘टू हैव एंड हैव नॉट’ उपन्यास तथा ‘ड्थ इन दि आफ्टरनून’, ‘गॉड रेस्ट यू मेरी, जेंटलमेन’, ‘ग्रीन हिल्स ऑफ अफ्रीका’ तथा ‘द स्पैनिश अर्थ’ जैसे कार्य ‘द स्नोज ऑफ किलिमंजारो’ तथा ‘स शॉर्ट हैप्पी लाइफ ऑफ फ्रांसिस मैकोम्बेर’ ‘द फिफ्थ कॉलम’ नाटक उनके हैं।

कहा जाता है, उन्होंने अपने उपन्यास,  ‘ए फेरवल टू आर्म्स’ का अंत 47 बार लिखा गया। ‘ए फेरवल टू आर्म्स’ हेमिंग्वे का तीसरा उपन्यास है। दर्जनों लेखन और पुनर्लेखन तथा स्क्रिबनर मैगजीन में प्रकाशित हुआ आत्मकथात्मक उपन्यास ‘ए फेरवल टू आर्म्स’ न तो युद्ध को ग्लोरीफाई करता है और न ही उसकी भर्त्सना करता है।

वह युद्ध को एक अंतहीन उबाऊ घटना कहता है, जहां सीमा पर तैनात लोगों को कुछ पता नहीं है कि यह कितने दिन चलेगा, इसका अंत क्या होगा। यह मात्र प्रथम विश्वयुद्ध की बात नहीं करता है, सारे युद्धों की बात करता है।

‘ए फेरवल टू आर्म्स’ के अंत की पंक्तियां देखिए, हेनरी (नायक) की मन:स्थिति समझने का प्रयास कीजिए: ‘लेकिन इसके बाद मैंने (नर्सों को) बाहर कर दिया और दरवाजा बंद किया तथा बत्तियां बुझा दीं, जो किसी तरह अच्छा न था। यह एक मूर्ति को अलविदा कहने के समान था। थोड़ी देर के बाद मैं बाहर गया और अस्पताल छोड़ दिया और बारिश में वापस होटल चलता चला गया।’

युद्ध तथा प्रेम कथानक वाला उपन्यास

युद्ध तथा प्रेम के कथानक वाला उपन्यास त्रासद न होकर लयात्मक तथा दयनीय है। ‘लॉस्ट जनरेशन’ की दयनीयता को प्रकट करती इस कहानी में नायिका कैथरीन और उसका बच्चा मर जाता है, युद्ध के भ्रम और निराशा-हताशा का शिकार अकेला हेनरी बच जाता है। एक ओर युद्ध है, दूसरी ओर हेनरी  तथा कैथरीन की प्रेम कथा समानान्तर चलती है।

प्रकाशित होने पर खूब हलचल हुई, क्योंकि यह अलग था, चले आ रहे विक्टोरियन फ्लावरी साहित्य से बहुत भिन्न था, यह आधुनिक उपन्यास का प्रारंभ था। इसमें निर्दयता के साथ आदमी के कटने की भयंकरता, अंतहीन लालफीताशाही, अंतिम अध्याय में कैथरीन के कठिन प्रसव, उसकी यातना और मृत्यु को बिना किसी लागलपेट के चित्रित किया गया है।

यहां युद्ध की कुरुपता है, आंख मूंद कर आदेश का का पालन करना है, ‘तुम मरते हो।’...‘तुम्हें पता नहीं है यह सब क्यों हो रहा है। तुम्हारे पास सीखने-समझने का समय नहीं है... अंत में वे तुम्हें (वे सर्वव्यापी शक्तियां जो सब संचालित करती हैं) मार देंगी।...’

history of world literature A Farewell to Arms Novel by Ernest Hemingway
अर्नेस्ट हेमिंग्वे और इनकी रचनाएं - फोटो : Adobe Stock

युद्धोआधारित उपन्यास ‘ए फेरवल टू आर्म्स’ के अंतिम 50 पन्ने इटली सेना का कच्चा चिट्ठा खोलते हैं। जाहिर-सी बात है, युद्ध का ऐसा भयंकर चित्रण सत्ताधारियों को रास न आया। क्योंकि युद्ध सत्ताधारियों को प्राणवायु प्रदान करता है। नतीजन, बेनिटो मुसोलिनी की सत्ता ने इसे प्रतिबंधित कर दिया। दूसरी ओर पत्रिकाओं एवं समीक्षकों ने इस उपन्यास की खूब प्रशंसा की।

1940 में प्रकाशित ‘फॉर हूम द बेल टोल्स’ उनका एक अन्य विश्व प्रसिद्ध उपन्यास है, जिसे पुलित्ज़र पुरस्कार प्राप्त हुआ। पाठकों ने ‘फॉर हूम द बेल टोल्स’ उपन्यास का जम कर स्वागत किया, एक महीने में इसकी 5 लाख प्रतियां बिकीं। युद्ध की विभीषिका तथा उसका विध्वंश यहां भी चित्रित है।

स्पैनिश गृहयुद्ध के दौरान एक अमेरिकन युवा स्वयंसेवक रॉबर्ट जोर्डन एंटी-फासिस्ट रिपब्लिकन गुरिल्ला युनिट के साथ लगा हुआ है। डाइनामाइटर के रूप में उसे एक पुल उड़ाने का कार्य सौंपा गया है। स्वामीभक्ति, साहस, प्रेम, विचारों के त्रासद अंत की इस कहानी में रॉबर्ट जोर्डन को खूबसूरत मारिया से प्रेम होता है।

हेमिंग्वे के स्पेन अनुभवों में एक दोस्त की दर्दनाक कहानी और मौतें तथा बरबादी इस उपन्यास में नजर आती है। क्यूबा में बैठ कर मार्च 1939 में लिखना प्रारंभ कर जुलाई 1940 में उन्होंने इसे समाप्त किया।

फिल्मों का भी किया लेखन

हेमिंग्वे 95 छोटी-बड़ी और टीवी फिल्मों के लेखक हैं। कौन कह सकता है, उनके काम पर भविष्य में फिल्में नहीं बनेंगी। ‘दि ओल्ड मैन एंड द सी’, ‘द सन आलसो राइजेज’, ‘ए फेरवल टू आर्म्स’, ‘फॉर हूम द बेल टोल्स’, ‘द फिफ्थ कॉलम’, ‘टू हैव एंड हैव नॉट’ (द गन रनर्स), ‘द स्नोज ऑफ किलिमंजारो’, ‘अंडर माई स्किन’, ‘द स्पैनिश अर्थ’, ‘गॉड रेस्ट यू मेरी, जेंटलमैन’ पर फिल्में बनी हैं, कई कार्य पर एक बार से अधिक फिल्म बनी हैं।

1957 में बनी ‘ए फेरवल टू आर्म्स’ में रॉक हडसन तथा जेनिफर जॉन्स ने अभिनय किया है। उसी साल ‘द सन आलसो राइजेज’ में टाइरॉन पॉवर तथा इवा गार्डनर ने भूमिकाएं कीं। एक साल बाद 1958 में बनी ‘दि ओल्ड मैन एंड द सी’ में स्पेन्सर ट्रेसी थे।

हेमिंग्वे ने उन्होंने चार शादियां कीं। पत्नियों के जीवित रहते, उन्हें छोड़ कर एक अन्य स्त्री से शादी की। अपनी शैली को ‘आइसबर्ग थियरी’ कहने वाले हेमिंग्वे की शैली को कुछ समीक्षक ‘थियरी ऑफ ओमिशन’ भी कहते हैं। उनकी कहानियों को ‘हिडेन फेक्ट’ का नाम दिया गया है। लंदन टाइम मैगजीन की कॉरस्पोंडेंट मेरी वेल्स से वे मिले। 1946 में दोनों की शादी हुई, मेरी हेमिंग्वे के अंतिम दिन तक उनके संग थीं।

अवसाद के शिकार हेमिंग्वे ने 2 जुलाई 1961 की भोर में अपनी प्रिय डबलबैरल शॉटगन से आत्महत्या की।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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