विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: रेचल मॉरिसन- स्त्रियों के लिए खोली नई राह
जब 2017 की फिल्म ‘मडबाउंड’ के लिए 2018 में ऑस्कर पुरस्कारों की घोषणा हुई, तो पहली बार एक स्त्री सिनेमाटोग्राफर का नाम सुनाई पड़ा। रेचल मॉरीसन को सर्वोत्तम सिनेमाटोग्राफी का पुरस्कार lतो नहीं मिला मगर इसका नामांकन उन्हें मिला। इस तरह एक नई श्रेणी में सिने-पुरस्कारों की राह स्त्रियों के लिए खुल गई।
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स्त्रियां प्रारंभ से ही फिल्मों से जुड़ी रही हैं, कभी परदे के पीछे और कभी परदे के सामने, पर वे सदा किसी-न-किसी रूप में सिनेमा में सदा रही हैं। मगर उन्हें पहचान बहुत बाद में मिली, उनके योगदान को काफी समय पश्चात स्वीकारा गया। वरना तो अक्सर कहा जाता है, यह तो पुरुषों का क्षेत्र है, स्त्रियां इसमें कहां हैं? और जब पुरस्कारों की बारी आती है, तब भी यही कहा जाता है। एक बार किसी सिने-क्षेत्र में स्त्री को पुरस्कार प्राप्त हो जाता है, तो आगे के लिए राह खुल जाती है।
सिनेमाग्राफी के क्षेत्र में न केवल स्त्रियां वरन पुरुषों की भी काफी समय तक उपेक्षा रही, उनके नाम पर कोई ईनाम घोषित न था। समय के साथ सोच बदली, काम में परिवर्तन हुआ। स्त्री-पुरुष के काम के चलते आए परम्परागत बंटवारे में भी बदलाव आया।
2018 के ऑस्कर पुरस्कारों की घोषणा
एक ऐसा ही क्षेत्र सिने-फोटोग्राफी का है। इस क्षेत्र में स्त्रियां काफी समय से सक्रिय हैं, मगर पहचान बहुत समय बाद मिली। जब 2017 की फिल्म ‘मडबाउंड’ (निर्देशन डी रीस) के लिए 2018 में ऑस्कर पुरस्कारों की घोषणा हुई, तो पहली बार एक स्त्री सिनेमाटोग्राफर का नाम सुनाई पड़ा। रेचल मॉरिसन को सर्वोत्तम सिनेमाटोग्राफी का पुरस्कार तो नहीं मिला मगर इसका नामांकन उन्हें मिला। इस तरह एक नई श्रेणी में सिने-पुरस्कारों की राह स्त्रियों केलिए खुल गई।
‘सेट पर डॉरेक्टर ऑफ फोटोग्राफी का काम सर्वोत्तम होता है, हम सब यह जानते हैं’ ऐसा कहने वाली रेचल को इसके पहले कुछ पुरस्कार मिले हैं। पर ऑस्कर की बात कुछ और है। यह साहित्य के नोबेल जैसा है, एक साथ पूरे विश्व का ध्यान आकर्षित करने वाला पुरस्कार।
27 अप्रैल 1978 को अमेरिका में जन्मीं रेचल को इसके पहले 2013 में वीमेन इन फिल्म लुसी का कोडाक विजन तथा उसी साल वीमेन इन फिल्म क्रिस्टल का कोडाक अवॉर्ड प्राप्त हुआ था। 2019 में उन्हें अलाएंस ऑफ वीमेन फिल्म जर्नलिस्ट का ‘फीमेल फोकस पुरस्कार’ भी मिला। 2017 में उन्हें न्यूयॉर्क फिल्म क्रिटिक्स सर्किल का सर्वोत्तम सिनेमाटोग्राफार पुरस्कार भी प्राप्त हुआ था। नामांकन तो कई बार मिला था।
कैमरा के साथ एलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट संभालने वाली रेचल मॉरिसन को खासतौर पर वे कहानियां पसंद आती हैं, जो आशा और निराशा के बीच झूलती हैं। वे सबसे पहले कहानी कहने वाली हैं। रेचल ने अपनी मास्टर की डिग्री अमेरिकन फिल्म इंस्टीट्यूट से की है और उन्होंने फोटो पत्रकारिता भी की है।
‘ब्लैक पैंथर’, ‘केक’, डोप’, ‘लिटिल एक्सीडेंट्स’, ‘साउंड ऑफ माई वॉइज’ (अंतिम दोनों फिल्मों को सर्वोत्तम पिक्चर को ऑडियंस तथा ग्रैंड जूरी दोनों पुरस्कार मिले) आदि फिल्में रेचल ने फिल्माई हैं।
रेचल को फोटोग्राफी के अलावा सर्फिंग में रुचि है। स्कूल से निकलते ही उन्हें डॉक्यूमेंट्री बनाने का काम मिल गया, लेकिन तभी 9/11 हुआ और वे रियालिटी टीवी की ओर मुड़ गईं, क्योंकि यहां कैमरे के पीछे रहने पर भी रकम मिल रही थी। फिर उन्होंने उसको भी विदा कह दिया और फीचर फिल्म की दिशा में चल पड़ीं।
सहजता से संभालती हैं कैमरा
डॉक्यूमेंट्री के विषय में उनकी धारणा है कि यह सीखने के लिहाज से बहुत अच्छा काम है, यह काम फोटोग्राफर को तत्काल निर्णय लेना सिखाता है। वहां त्वरा के साथ निर्णय लेना, कैमरा सेटिंग, अच्छे फ्रेम्स और प्राकृतिक प्रकाश का उपयोग करना सीखने को मिलता है। रेचल ने इंडिपेंडेंट सिनेमा तथा टीवी के लिए भी कैमरा संभाला है। उन्होंने टीवी फिल्म, टीवी सीरियल्स, लघु फिल्म, फीचर फिल्म केलिए फिल्मांकन किया है।
जितनी सहजता से रेचल मॉरिसन कैमरा संभालती हैं उसी सरलता से सिने-निर्देशन का पद ग्रहण करती हैं। उन्होंने ‘द फायर इनसाइड’ (2024) फिल्म का निर्देशन किया है, लेकिन इस फिल्म की डॉयरेक्टर ऑफ फोटोग्राफी की कमान रीन यंग को सौंप दी। उन्होंने स्त्री सिनेमाटाग्राफर के पुरस्कार पाने की राह खोल दी है, अब दूसरों को मौका मिलना चाहिए।
‘यथार्थ और कल्पना उन्हें अक्सर समझ नहीं आती है, क्योंकि शायद सत्य कई बार धोखा देता है।’ कहने वाली रेचल मॉरिसन अपने कैमरा वर्क द्वारा पात्रों के भीतरी जीवन को ईमानदारी के साथ परदे पर लाती हैं। उनकी सिनेमाटोग्राफी ललित और सुरुचिपूर्ण होती है।
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