विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: अर्जेंटीना का सिनेमा इतिहास
लुई मोग्लिआ बार्थ की ‘टैंगो’ फिल्म को कुछ लोग यहां की पहली सवाक फीचर फिल्म मानते हैं। जिस दिन यह फिल्म रिलीज हुई उसी 27 अप्रैल को यहां का ऑफिशियल सिनेमा डे होने का गौरव प्राप्त है।
विस्तार
अर्जेंटीना का इतिहास भी कई अन्य लैटिन अमेरिकी देशों की भांति उथल-पुथल भरा रहा है। जाहिर है उसके सिनेमा में भी ऊंच-नीच होती रही है। यहां चलती-फिरती तस्वीरें पहली बार 18 जुलाई 1896 को ब्युनेस एरिस में दिखाई गई थीं, जिसे देखने बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। जल्द ही यहां के स्थानीय लोग न्यूजरील बनाने लगे। यूजीन पी ने अर्जेंटीना के झंडे को हवा में लहराते हुए तीन मिनट की एक फिल्म बनाई। 1898 में डॉक्टर एलेजान्ड्रो पोसाडास ने अपनी ही शल्यचिकित्सा को कैमरे में कैद किया और एक नई शुरुआत की।
यहां की पहली फीचर फिल्म ‘दि एक्जुक्युटनर ऑफ डोरेगो’ (1910) एक ऐतिहासिक गाथा थी। इसे जम कर सफलता मिली। मूक सिनेमा युग में यहां का सबसे प्रसिद्ध निर्देशक जोस अगस्टीन फेर्रेयारा था जिसने कई अन्य फिल्मों के साथ ‘एल नेग्रो’ नाम की फिल्म बनाई और जिसकी फिल्में शहर और शहर की बाहरी सीमा के गरीब जीवन को फिल्माती थीं।
1917 में एक टीम ने मिल कर ‘एल एपोस्टोल’ नामक दुनिया की पहली एनीमेटेड फीचर फिल्म बनाई। राजनैतिक व्यंग्य की यह फिल्म 70 मिनट की थी। मगर अफसोस आग में यह नष्ट हो गई। पहली मूक फीचर लेंथ फिल्म के खाते में 1914 की फिल्म ‘एमालिया’ आती है। बीस के दशक में सिनेमा जाना यहां के लोगों का प्रमुख शगल था, लोग सप्ताह में कई बार सिनेमा देखने जाते थे। 1900-1929 के बीच यहां करीब 200 फिल्म बनी पर आज कोई भी उपलब्ध नहीं है।
एमिलिया सैलेनी (1894-1978) अर्जेंटीना से आने वाली लैटिन अमेरिका की पहली महिला निर्देशक थी उसने अर्जेंटीना के बच्चों की फिल्म बनाई और दक्षिण अमेरिका में फिल्म अभिनेताओं की अकादमी की भी स्थापना की। उसने ‘रोबलेम्स ऑफ द हार्ट’ में अभिनय भी किया। ‘द गर्ल ऑफ द फोरेस्ट’ (1917), ‘ट्रैजिक प्रोमेनैड’ (1917) तथा ‘क्लारा’स करचीफ’ उसकी बनाई फिल्में हैं।
27 अप्रैल- ऑफिशियल सिनेमा डे
हालांकि पहली फुल लेंथ सवाक फीचर फिल्म का दावा ‘लैस लुसेस दे ब्युनोस एरेस’ भी करती हैं, वैसे यह फिल्म 1930 में बनी थी, इसके लेखक, फिल्म क्रू, अभिनेता सब अर्जेंटीना के थे, परंतु बनी यह फ्रांस में थी। जबकि 1933 में बनी, लुई मोग्लिआ बार्थ की ‘टैंगो’ फिल्म को कुछ लोग यहां की पहली सवाक फीचर फिल्म मानते हैं। जिस दिन यह फिल्म रिलीज हुई उसी 27 अप्रैल को यहां का ऑफिशियल सिनेमा डे होने का गौरव प्राप्त है।
यह म्यूजिक-रोमांस की फिल्म एक प्रेम त्रिकोण है, जिसमें एक टैंगो गायक, एक बेईमान आदमी तथा एक गरीब लड़की की कहानी कही गई है। जानते हुए भी लड़की बेईमान आदमी के साथ भाग जाती है, टूटे हुए दिल को लेकर टैंगो गायक पेरिस में गाने जाता है और लड़की को वहां पाने की उम्मीद करता है। इस फिल्म से लिबेर्टैड लामार्क, टीटा मेरेलो तथा लुई सैंड्रिनी ने अपने अभिनय की शुरुआत की। फिर तो टैंगो फिल्मों की बहार आ गई।
1993 में मैर्सेलो पाइनेय्रोने बायिपिक, म्युजिक, ड्रामा फिल्म ‘वाइल्ड टैंगो’ बनाई। 124 मिनट की इस फिल्म में फेरनैन मिरास, सेसिला डोपाजो आदि ने अभिनय किया है। यह अर्जेंटीना के रॉक स्टार के जीवन के उतार-चढ़ाव को दिखाती है।
1838 में अर्जेंटीना में उपकरणों से लैस फिल्म बनाने की 29 गैलरी थीं। चालीस के दशक में यहां आर्टिस्ट एसोशिएशन का गठन हुआ। तीस और चालीस के दशक में मोग्लिआ बार्थ के अलावा मैन्युअल रोमेरो (ब्यॉज ओन बोर्ड’, ‘द सर्कस गर्ल’, ‘आउटलॉ’, ‘लाइफ इज ए टैंगो’), लुई सीजर अमैडोरी (गॉड रिवार्ड यू’), कार्लोस हग क्रिस्टेनसेन (‘सैफो’, ‘द नेकेड एन्जेल’), लुकास डेमारे (‘द गौचो वार’, ‘हिस बेस्ट पुपिल’) प्रमुख फिल्म निर्देशक थे।
पचास के दशक की फिल्में
1940 में ही हॉलीवुड ने ‘डाउन अर्जेंटीना वे’ बनाई, अर्जेंटीना में स्थित इस फिल्म में बेट्टी ग्रैबल तथा डोन एमेचे ने भूमिकाएं की हैं। कार्मेन मिरांडा भी यहां पहली बार नजर आते हैं। मगर देश की विरोधी प्रवृतियों वाला मान कर अर्जेंटीना में इसे प्रतिबंधित कर दिया गया।
1948 में ऑस्कर ने विदेशी फिल्मों के लिए एक नई श्रेणी निर्धारित की और उसी साल अर्जेटीना की फिल्म ‘गॉड ब्लेस यू’ को इस श्रेणी में प्रस्तुत किया गया। लुई सीजर अमाडोरी द्वारा निर्देशित 2 घंटे की इस फिल्म में एक पत्नी अपनी गरीबी छिपाने केलि ए अमीरी का रूप धर कर किसी अमीर व्यक्ति से टकराने का इंतजार करती है। आदमी तो आता है मगर इसके बाद क्या होता है यह अपको स्वयं देखना होगा।
पचास के दशक की दो फिल्मों का जिक्र करूंगी। एक है 1952 की रोमान विनोली बैरेटो द्वारा निर्देशित ‘द बीस्ट मस्ट डाई’। 95 मिनट की इस फिल्म नॉयर में जब एक थ्रिलर राइटर का बच्चा कार से टकरा जाता है तो वह उसकी मौत का बदला लेने के लिए हत्यारे की खोज में जाता है। दूसरी फिल्म है ‘द बिटर स्टेम’ (1956) यह भी फिल्म नॉयर है जिसमें एक रिपोर्टर हंगरी के प्रवासी के साथ मिलकर कॉरोस्पोंडेंस स्कूल में फेक पत्रकारिता प्रारंभ करने की सोचता है। 90 मिनट की इस फिल्म का निर्देशन फेर्नांडो अयाला ने किया है।
अर्जेंटीना में 1985 में बनी लुई पुएन्जो निर्देशित फिल्म ‘दि ऑफिसियल स्टोरी’ ऑस्कर जीतने वाली पहली फिल्म है। नब्बे के दशक में लुक्रेसिया मैर्टेल, मार्टिन रेजमैन, पाब्लो ट्रैपरो ‘न्यू अर्जेंटीना सिनेमा’ के प्रमुख सिने-निर्देशक हुए।
‘टाइम फॉर रिवेंज’ (एडोल्फो एरिस्टैरैन), ‘कैमिला’ (मारिया लुइसा बेम्बर्ग), ‘वेटिंग फॉर द हेयरसे’ (एलेक्जेंड्रो डोरिया), ‘लास्ट इमेजेज ऑफ शिपरेक’, द डार्क साइड ऑफ द हार्ट’(एल्सिओ सुबिएला), बायोपिक ‘इव पेरॉन: द ट्रू स्टोरी’ (जुआन कार्लोस डेसैंजो) अस्सी-नब्बे के दौर की यहां की प्रमुख फिल्में रही हैं।
इक्कीसवीं सदी का सिनेमा
इक्कीसवीं सदी की बात करें तो अर्जेंटीना की कई फिल्मों ने सिने-प्रेमियों का ध्यान खींचा है। सन् 2000 में लेखक और निर्देशक फैबियन बेइलिंस्की ने दो ठग कलाकारों को लेकर ‘नाइन क्वीन्स’ फिल्म बनाई। 22 पुरस्कार जीतने वाली इस फिल्म में ये ठग टिकट जमा करने वालों को धोखाधड़ी से इस विरल टिकट की नकली कॉपिया बेचते हैं। रिकॉर्डो डेरिन, गैस्टोन पॉल्स आदि ने इसमें भूमिका की है। इस टर्न और ट्विस्ट वाली फिल्म को देखना काफी रोमांचक है।
इसी साल ‘ओकुपास’ आई जिसमें भिन्न पृष्ठभूमि के चार युवा एक घर में रहने पहुंचते हैं, घर चोरी का है और उन्हें पुलिस तथा दूसरे गुंडों का सामना करना पड़ता है।
‘वाइल्ड टेल्स’, ‘द डिस्टिंगुइश सिटीजन’, ‘क्रोनिकल्स ऑफ ए वांडरिंग सेंट’, ‘द सिक्रेट इन देयर आईज’ कुछ अन्य फिल्में हैं। 2009 की जुआन जोस कैम्पनेला की फिल्म तनाव भरी ‘द सिक्रेट इन देयर आईज’ को ऑस्कर मिला। ‘दि ऑफिसियल स्टोरी’ तथा द सिक्रेट इन देयर आईज’ दोनों ऑस्कर विजेता फिल्म के सिनेमाटोग्राफर फेलिक्स मोन्टी ही हैं।
‘द वल्चर’, ‘द क्लान’, ‘लिव-इन मैड’, ‘फाइंडिंग सोफिया’, ‘पित्जा, बीयर एंड सिगरेट’ कुछ अन्य फिल्में हैं।
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