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विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: एंटनी क्विन- मैक्सिकन अभिनेता जिसने हॉलीवुड जीता

Thu, 20 Apr 2023 03:38 PM IST
Dr. Vijay Sharma डॉ. विजय शर्मा
Updated Thu, 20 Apr 2023 03:38 PM IST
सार

1952 में एंटनी क्विन को बायोपिक ‘एमिलिआनो जपाटा, वीवा जपाटा!’ में सहायक भूमिका केलिए अकादमी पुरस्कार मिला। वे पहले मैक्सिकन अभिनेता थे यह पुरस्कार पाने वाले।

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History of world cinema, Anthony Quinn Mexican-born American actor filmography, his movies and awards
एंटनी क्विन- मैक्सिकन अभिनेता - फोटो : Twitter

विस्तार

शायद आपने 7 ऑस्कर पुरस्कार पाने वाली फिल्म ‘लॉरेंस ऑफ अरबिया’ (1962) और तीन ऑस्कर जीतने वाली फिल्म ‘जोरबा द ग्रीक’ (1964) देखी हो। यदि नहीं देखी है तो इन गुजरे जमाने की फिल्मों को एक बार अवश्य देख लें। डेविड लीन की तीन घंटे 38 मिनट की ‘लॉरेंस ऑफ अरेबिया’ फिल्म तथा माइकेल कैकोयानिस की फिल्म ‘जोरबा द ग्रीक’ आपको एक अलग दुनिया में ले जाती हैं। दोनों फिल्मों को एंटनी क्विन के अभिनय के लिए भी अवश्य देखा जाना चाहिए।

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वैसे तो एंटनी क्विन मैक्सिकन था मगर उसने हॉलीवुड पर राज किया। 21 अप्रैल 1915 को मैक्सिको के चिहुआहुआ में जन्मा एंटनी क्विन न केवल अभिनेता था वरन वह स्वयं निर्देशक और प्रड्युसर भी था। ढ़ेढ़ सौ से ऊपर फिल्मों में अभिनय करने वाले एंटनी ने दो फिल्मों (एक फीचर, एक टीवी) का निर्देशन किया, साथ ही छ: फिल्में प्रड्यूस कीं।
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नोबेल पुरस्कृत गायक बॉब डिलेन ने एंटनी क्विन की 1960 की एक फिल्म ‘द सैवेज इनोसेंट्स’ के उसके चरित्र के आधार पर एक गीत ‘द माइटी क्विन’ लिखा जो खूब प्रसिद्ध हुआ। अभिनय से पहले एंटनी क्विन ने कसाई, नुक्कड़ उपदेशक, बॉक्सर, बूट पॉलिस करना, न्यूजपेपर बेचना आदि कई काम किए। मात्र नौ वर्ष की उम्र में पिता का साया सिर से उठ गया। उन्होंने हाईस्कूल पास नहीं किया लेकिन 1987 में उन्हें ऑनरेरी हाईस्कूल डिप्लोमा प्रदान किया गया।
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उपन्यास ‘जोरबा द ग्रीक’ पर आधारित फिल्म

प्रसिद्ध साहित्यकार निकस कजनजाकिस के उपन्यास ‘जोरबा द ग्रीक’ पर 1964 में माइकेल कैकोयानिस ने इसी नाम से फिल्म बनाई, निर्देशक ने लेखक के साथ मिलकर फिल्म लेखन किया। पहले इस फिल्म का नाम एलेक्सिस जोरबास रखने की बात थी मगर बाद में उपन्यास का ही नाम फिल्म को दिया गया।


एक सीधासादा, खरा इंग्लिश लेखक बेसिल (एलन बेट्स) व्यापार के सिलसिले में क्रेट की यात्रा करता है, वहां जाकर वह एलेक्सिस जोरबा (एंटनी क्विन) से मिलता है और उसका जीवन पूरी तरह बदल जाता है। हालांकि इस फिल्म के लिए एंटनी क्विन को ऑस्कर नहीं मिला, लेकिन फिल्म ने तीन-तीन ऑस्कर पुरस्कार जीते। हां, उसे नेशनल बोर्ड ऑफ रिव्यू का सर्वोत्तम अभिनेता का खिताब अवश्य मिला।

1962 की डेविड लीन निर्देशित फिल्म ‘लॉरेंस ऑफ अरबिया’ एक इंग्लिश ऑफिसर लॉरेंस की कहानी है जो प्रथम विश्वयुद्ध में अरबों लोगों को संगठित कर तुर्कों के खिलाफ लड़ने को तैयार करता है। इस फिल्म को सर्वकालिक महान फिल्म का दर्जा हासिल है। इसे ब्रिटेन की तीसरी महान फिल्म माना जाता है।

7 ऑस्कर जीतने वाली इस फिल्म में एंटनी क्विन ने औडा अबु तायी की भूमिका की है। इस भूमिका के लिए वास्तविक औडा अबु तायी जैसा दीखने के लिए क्विन उसकी तस्वीर सामने रख कर घंटों अपना मेकअप किया करते। मेकअप इतना वास्तविक करते कि निर्देशक तक धोखा का जाता।

History of world cinema, Anthony Quinn Mexican-born American actor filmography, his movies and awards
एंटनी क्विन - फोटो : Twitter

पुकारू नाम टोनी के परिवार में केवल उसके बाबा आइरिश थे और बाकी परिवार मैक्सिकन था। इस अभिनेता की आत्मकथा ‘दि ओरिजिनल सिन: ए सेल्फ-पोर्ट्रेट बाई एंटनी क्विन’ नाम से 1972 में प्रकाशित हुई। गले के कैंसर के साथ हुई कई अन्य बीमारियों के चलते 3 जून 2001 को अमेरिका में उनकी मृत्यु हुई। उनके पिता फोटोग्राफर थे और वे लोग एंटनी के बचपन में ही मैक्सिको छोड़ कर लॉस एंजेलस में आ बसे थे।

फिल्मों का सफर रहा चुनौतीपूर्ण

एंटनी क्विन ने फिल्मों से पहले मंच पर काम किया और ‘ए स्ट्रीटकार नेम्ड डिजायर’ में उनके काम की खूब प्रशंसा हुई। बाद में उन्होंने आर्किटेक्चर की पढ़ाई की, वह भी फ्रैंक लॉयड राइट के साथ, दोनों बहुत करीब थे। राइट ने ही क्विन को अभिनय के लिए प्रोत्साहित किया। इस तरह वे हॉलीवुड पहुंचे। वैसे उनकी दोस्ती जैकलीन ओनासिस से भी थी मगर जब उन्होंने ‘ग्रीक टाइकून’ में काम किया तो जैकलीन ने उनसे बात करना बंद कर दिया।

पहले उन्हें फिल्मी करियर बहुत प्रोमिसिंग नहीं लग रहा था, वे सोचते थे या तो वे बहुत डॉर्क रंग के हैं अथवा दूसरों से बहुत अधिक अलग या फिर बहुत ज्यादा मैक्सिकन। उन्हें लगता इसी कारण अच्छी भूमिकाएं दूसरे अभिनेताओं को दे दी जाती हैं। उनकी कोई बैकिंग भी नहीं थी। मगर बाद में उन्हें खुद पर गर्व था। उन्होंने हॉलीवुड में 1936 में ‘द प्लेन्समैन’ से शुरुआत की। इस फिल्म के निर्देशक सेसिल बी. डेमिले थे जो आगे चल कर उनके ससुर बने।

पत्नी कैथरीन ने उन्हें हॉलीवुड के ऊंचे तबके से परिचित कराया। मगर वहां वे मैक्सिकन होने के कारण बाहरी बने रहे। कैथरीन से तलाक होने के बाद एंटनी क्विन ने जोलान्डा एडोलोरी से शादी की उससे भी तलाक हुआ और तीसरी पत्नी कैथी बेन्विन अंत तक उनके साथ बनी रहीं। रोम और न्यूयॉर्क में एंटनी क्विन के घर हैं।

1952 में एंटनी क्विन को बायोपिक ‘एमिलिआनो जपाटा, वीवा जपाटा’ में सहायक भूमिका के लिए अकादमी पुरस्कार मिला। वे पहले मैक्सिकन अभिनेता थे यह पुरस्कार पाने वाले। यह फिल्म मैक्सिको के एक क्रांतिकारी की जीवनी थी और क्विन ने क्रांतिकारी के भाई की भूमिका की थी। यही पुरस्कार उन्हें दूसरी बार 1956 में मिला इस बार पॉल गोगिन बने थे। यह भी बायोपिक थी। यह ‘विन्सेंट वैन गॉग, लस्ट फॉर लाइफ’ थी, फिल्म में उनके समक्ष कर्क डगलस थे।

काफी समय वे इटली में रहे और विश्व सिनेमा में नाम किया। उन्होंने इटली की बहुत सारी फिल्मों में काम किया। इसी समय उन्होंने फेडेरिको फेलिनी की प्रसिद्ध फिल्म ‘ला स्ट्राडा’ में काम किया। ‘ए वॉक इन द क्लाउड्स’ में संग काम करते हुए किआनू रीव्स से दोस्ती हो गई और वे उसे खूब पसंद करने लगे।

इसी तरह ‘द ब्लैक स्वान’, ‘बफेलो बिल’, ‘सिन्दबाद, द सेलर’, ‘अगेन्स्ट ऑल फ्लैग्स’, ‘द मैग्नीफिसेन्ट मेटाडोर’ तथा ‘ओनली द लोनली’ छ: फिल्मों में साथ काम करने वाली अभिनेत्री मौरीन ओ’हारा से भी उनकी अच्छी दोस्ती थी।

गहन-स्मूद आवाज के धनी एंटनी क्विन ने धीरे-धीरे चरित्र अभिनेता के रूप में अपना मजबूत स्थान बना लिया। ‘वाइल्ड इज द विन्ड’, ‘गन्स ऑफ नवरोन’, ‘द शोज ऑफ द फिशरमैन’, ‘द सीक्रेट ऑफ सांता विटोरिया’, ‘द ग्रीक टाइकून’, ‘द मैसेज’, दि इनहेरिटेनस’, ‘कैरावान्स’ आदि उनकी कुछ प्रसिद्ध फिल्में हैं।  

क्विन ने अमेरिकन, अरब, मुगल, चाइनीज, इंग्लिश, ग्रीक, इटैल्यन, मंगोल, आइरिश, फ्रेंच, पुर्तगाली, हूण, युक्रेनियन आदि तमाम लोगों की भूमिकाएं कीं। इस बीच वे टीवी में भी काम करते रहे। बाद में वे ब्रिस्टल चले गए और पेंटिंग तथा मूर्तिकला करते रहे। वियेना, पेरिस, सियोल आदि स्थानों पर जिनके प्रदर्शन हुए। 1915 में मृतोपरांत उन्हें हॉल ऑफ फेम दिया गया।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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