फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   history of literature The Book Thief Novel by Markus Zusak

विश्व साहित्य का आकाश: 'द बुक थीफ' और मृत्यु की कहानी

Mon, 06 Oct 2025 07:52 PM IST
Dr. Vijay Sharma डॉ. विजय शर्मा
Updated Mon, 06 Oct 2025 07:52 PM IST
सार

  • 'द बुक थीफ'  दोस्ती, प्रेम, घृणा, क्रोध, भूख-प्यास, हिंसा और मृत्यु जैसी कई भावनाओं को कुशलता से एक साथ बुनती है। यह उन लोगों की आवाज है, जो चुपचाप अपने तरीके से मनुष्यता को बचाने में लगे रहे।

विज्ञापन
history of literature The Book Thief Novel by Markus Zusak
साहित्य की दुनिया - फोटो : Freepik.com

विस्तार

मार्कुस जुसक की ‘द बुक थीफ’ (2005) एक असाधारण साहित्यिक कृति है। यह एक ऐसी पुस्तक है जो यहूदियों के भयावह नरसंहार को उन जर्मन लोगों की नजरों से देखने का प्रयास करती है। नाजी जर्मनी के एक छोटे से कस्बे में घटित होने वाली मार्मिक कहानी। यह उन युवा किशोरों की कहानी है, जो यहूदियों की जान बचाना चाहते थे। उन्हें ब्रेड का एक टुकड़ा देना चाहते थे, भले ही इसके लिए उन्हें अपना सब कुछ दांव पर लगाना पड़ जाये।

विज्ञापन


यह युद्ध के भयावह परिणामों को बताने वाली पुस्तक है, जो मृत्यु को कथावाचक बनाती है। इससे पहले मैंने कभी ऐसी कोई कहानी नहीं पढ़ी थी, जिसमें ऐसा प्रयोग दिखा हो। इस वर्णन में एक गहरी विडंबना है, क्योंकि मृत्यु स्वीकार करती है, नाजी जर्मनी में क्रूरता के विशाल पैमाने से वह ‘थक चुकी’ है, अक्सर कुछ आत्माओं को ‘अपने साथ ले जाने’ में अपनी अनिच्छा व्यक्त करती है।
विज्ञापन


कितनी अद्भुत विडंबना है कि मृत्यु, जो जीवन के अंतिम सत्य के रूप में जानी जाती है, वह यहां मनुष्य की हिंसा, नफरत और विवेक-हीनता से भयभीत हो गयी है। ‘मृत्यु का भी हृदय है।’
विज्ञापन
विज्ञापन


यह कहानी 1939 की नाजी जर्मनी में बसे एक छोटे-से कस्बे मोलचिंग की है। जहां युद्ध की धमक, हिटलर की क्रूर छाया, और बालमन की कांपती, जिजीविषा से भरी धड़कनें हैं। एक जर्मन बच्ची लीसेल मेमिंगर जिसका छोटा भाई सर्दी और भूख से दम तोड़ देता है। पुस्तक शुरू होती है उसके अंतिम संस्कार के क्षण से।

कब्र के लिए ताजी खोदी गई मिट्टी के बीच, उसे एक छोटी, साधारण पुस्तक मिलती है- कब्र खोदने और दफनाने की एक पुस्तिका, ‘द ग्रेव डिगर’स हैंडबुक’। वह उसे चुरा लेती है। लीसेल की मां उसे पालक माता-पिता के पास छोड़ जाती है- 33 हिम्मल स्ट्रीट पर रहने वाले हैंस उबरमान दंपति के पास। यहीं से शुरू होती है द बुक थीफ  की असली कथा।

यहां पर हैंस उबरमान, उसका पालक पिता, उसके जीवन में प्रवेश करता है, उसका प्यारा ‘पापा’ बन जाता है। पेशे से एक विनम्र दीवार पेंटर और जुनून से एक अकॉर्डियन वादक, हैंस कोमल लेकिन अडिग दयालुता का प्रतीक है। जो धैर्यपूर्वक लीसेल को शब्दों की दुनिया से परिचित कराता है। उसे पढ़ने के रहस्यों के बारे में बताता है।

बुक थीफ बनने की कहानी

लीसेल धीरे-धीरे किताबों से प्रेम करने लगती है, और नाजियों द्वारा सार्वजनिक रूप से जलायी जा रही पुस्तकों की राख से कुछ अक्षर, कुछ अर्थ चुरा लेती है। वहां से शुरू होता है उसका बुक थीफ बनना- एक ऐसा चोर जो ज्ञान और सत्य के पक्ष में खड़ा है। चोरी के अपने कृत्यों में उसे रूडी स्टीनर नाम का एक अटूट साथी मिलता है। उसका समवय और आत्मा का साथी।

रूडी, एक अदम्य, जीवंत और निडर लड़का लीसेल की विचित्र किताबों की चोरियों में उसके साथ खड़ा रहता है। रूडी की साहसी भावना और जेसी ओवेन्स के प्रति उसकी प्रशंसा उसके चारों ओर के परिवेश और उसकी नस्लीय घृणा के विपरीत खड़ी है।

यहूदी युवक मैक्स वैडनबर्ग का आगमन होता है। ‘पापा’ हैंस उबरमान उस यहूदी को अपने घर में छिपाने का जोखिम उठाता है। प्रतिरोध का यह गहरा कार्य, हैंस उबरमान की अत्यधिक गरीबी को देखते हुए अकल्पनीय जोख़िमों से भरा हुआ है।

मैक्स जो भूख और ठण्ड से लड़ता है, लेकिन लीसेल को कहानियां सुनाता है, मीन काम्फ  (हिटलर की आत्मकथा) के पन्नों को रंगकर उनमें अपने शब्द सजाता है। यह एक सांकेतिक क्रांति है- घृणा और नस्लवाद के सबसे विकृत प्रतीक को बदल डालना। मैक्स उस परिवार की कठिनाइयों से अवगत है। मैक्स की उपस्थिति हुबेरमैन परिवार को बदल देती है, और लीसेल और मैक्स के बीच प्रेम और दोस्ती का एक गहरा रिश्ता खिलता है।

history of literature The Book Thief Novel by Markus Zusak
नॉवेल और कहानी - फोटो : Freepik.com

लीसेल, हैंस- ये सब लोग कोई राजनैतिक कार्यकर्ता नहीं हैं, ये सहज नैतिकता से संचालित लोग हैं। उन्हें यहूदियों को छुपाना, भूखे को रोटी देना, या किताब जलाए जाने से पहले उठा लेना सही लगता है। अंत में लीसेल एक सशक्त स्त्री बन कर निकलती है।

मार्मिक और हृदयविदारक घटनाओं का सामंजस्य

जैसे-जैसे युद्ध अपने भयानक रूप में सामने आता है, बमबारी से पूरा कस्बा तबाह हो जाता है। 33 हिम्मल स्ट्रीट मलबे में बदल जाता है। लीसेल एक तहखाने में बैठी होती है- जहां वह अपने शब्दों के सहारे उस भयावह दुनिया से लड़ रही है। रूडी स्टीनर, जो जीवन भर लीसेल से एक चुंबन मांगता रहा, अंत में उसे युद्ध की भेंट चढ़ा हुआ, मृत देह में मिलता है।

यह पल सबसे मार्मिक और हृदयविदारक है। रूडी का जीवन अधूरे बचपन और युद्ध की अमानवीयता दोनों की एक साथ गवाही देता है। लीसेल ने शब्दों को चुराया, जिन्होंने उसे जिंदा रखा, उन शब्दों के बल पर अपने भीतर एक दुनिया को बचा लेती है। वह सिर्फ बाहरी दुनिया से नहीं लड़ती, बल्कि शब्दों के माध्यम से अपनी आंतरिक दुनिया को भी सुरक्षित रखती है।

द बुक थीफ  दोस्ती, प्रेम, घृणा, क्रोध, भूख-प्यास, हिंसा और मृत्यु जैसी कई भावनाओं को कुशलता से एक साथ बुनती है। यह उन लोगों की आवाज है, जो चुपचाप अपने तरीके से मनुष्यता को बचाने में लगे रहे।

यह छोटी बच्ची, चुप रहने वाली माताओं, अकॉर्डियन बजाने वाले पिताओं और तहख़ाने में कहानी लिखते यहूदियों की कथा है- जो इतिहास की गलियों में शायद अनसुने रह जाते। यह हमें सिखाता है कि सबसे भयावह परिस्थितियों में भी, प्रेम और शब्दों की शक्ति, मानवीयता हमें जीवित रख सकती है।

भाषा की युद्ध-भूमि वाली रचना

‘द बुक थीफ’  को अक्सर ‘एक युद्ध में फंसी बच्ची की कहानी’ समझा जाता है, लेकिन यह भाषा की युद्ध-भूमि है- जहां शब्दों का इस्तेमाल हत्या के लिए भी हो सकता है, और किसी को जीवित रखने के लिए भी। हिटलर ने शब्दों से सत्ता बनायी, मैक्स ने शब्दों से प्रतिरोध, और लीसेल ने शब्दों से स्मृति। मृत्यु ने अंत में यह जाना, मनुष्य केवल अपने कर्मों से नहीं, अपने कहे-अनकहे शब्दों से भी अमर होता है।

मार्कुस जुसक का यह उपन्यास एक अनिवार्य पाठ है, जो शब्दों की असाधारण शक्ति और मानव आत्मा की स्थायी और अदम्य जिजीविषा को स्पष्ट रूप से हमारे सामने लाता है और एक अद्वितीय ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य भी प्रदान करता है।

किताब न पढ़ सकें तो इसी पर आधारित, इसी नाम की फिल्म देखें। जिसे 2013 में ब्रायन पेर्चिवल ने निर्देशित किया है। इस फिल्म में सोफी नेलिसे, जिओफ्रे रश एवं एमिली वाट्सन ने भूमिकाएं की हैं।


---------------
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed