आसान नहीं है युवराज होना जबकि आपको हर बार नई तरह से खुद को साबित करना हो
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क्रिकेट की पिच पर कई खिलाड़ियों का आना-जाना लगा रहता है। कई खिलाड़ी इस खेल के आसमान का सितारा बन जाते हैं तो कई की यादें बस कभी कभार ऑफ द रिकॉर्ड निकलती रहती हैं। सुनील गावस्कर से लेकर सचिन तेंदुलकर जैसे खिलाड़ियों का देश के इस लोकप्रिय खेल से रुखसत होना किसी महान विदाई की घटना से कम नहीं था। इसमें भी सचिन तेंदुलकर की भव्य विदाई का मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम ही साक्षी नहीं बना बल्कि पूरे देश में मास्टर ब्लास्टर की क्रिकेट से विदाई की भावुक लहर दौड़ पड़ी।
बहरहाल, संन्यास की परंपरा और श्रृंखला में युवी का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से जाना एक खामोश विदाई की ओर ही संकेत करता है। युवराज जितने अच्छे खिलाड़ी रहे, उतने ही अच्छे जुझारु योद्धा भी रहे। पिच हो, मैदान हो या फिर जिंदगी की जंग, सभी जगह पंजाब के इस युवा खिलाड़ी ने जूझते हुए अपनी जगह बनाई। आसान नहीं है युवराज होना जबकि आपको हर बार नई तरह से खुद को साबित करना हो और कैंसर जैसी बीमारी से लौटकर जिंदगी की लय को दोबारा पकड़ना हो।
युवराज का अपना फैन क्लब था। उनके चाहने वालों की अलग दुनिया थी। कई रिकॉर्ड इस युवा खिलाड़ी के नाम रहे हैं। जो उन्हें चाहते हैं, उनके लिए यह मायूस करने वाली खबर है, लेकिन उनके जाने बाद भी युवराज जिस रूप में याद किए जाएंगे, वह जूझने वाले सितारा खिलाड़ी के रूप में ही याद किए जाएंगे। एक तौर पर देखा जाए तो वे वाकई में युवराज ही निकले।
2011 वर्ल्ड कप के 'युवराज'
युवराज सिंह के लिए साल 2011 जितना सफल रहा था, उतना ही दुखदायी भी। ये वो साल था जब वो कैंसर जैसी घातक बीमारी से जूझ रहे थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और भारत के वर्ल्ड कप जीतने में सबसे सफल भूमिका निभाई।
उस समय युवराज सिंह ने एक इंटरव्यू में कहा था, 'मैं जब इस बारे में सोचता हूं तो मुझे लगता है कि मेरे जीवन में अंग्रेजी के 'सी' शब्द की काफी अहम भूमिका रही है। मैं चंडीगढ़ में पैदा हुआ, मैं क्रिकेटर बना, दुनियाभर में एक क्रिकेटर के रुप में अपनी टीम के साथ कप के लिए लालायित रहा। अब अंग्रेजी का एक नया 'सी' शब्द फिर से मेरी जिंदगी में जुड़ गया है, जिसका नाम कैंसर है'।
हालांकि बाद में वो कैंसर से तो जंग जीत गए, लेकिन उसकी वजह से उनके करियर पर जरूर लगाम लग गया। अब जब चूंकि उन्हें अंतरराष्ट्रीय मैचों में खेलने का मौका ही नहीं दिया जा रहा तो उनके लिए सबसे बेहतर था संन्यास ले लेना, जो उन्होंने अब किया। खैर... उनके 6 छक्के और 12 गेंद में 50 रन हमेशा लोगों को याद रहेंगे, जो एक विश्व रिकॉर्ड है।