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Friendship Day 2021: पूरी फैमिली के बराबर हो सकता है एक अच्छा और सच्चा दोस्त

Sun, 01 Aug 2021 09:40 AM IST
Swati sharma स्वाति शैवाल
Updated Sun, 01 Aug 2021 09:40 AM IST
सार

बदलते समय के साथ दोस्ती के इमोशन में भी कई और रंग शामिल हुए हैं। अब इमोशन्स के साथ प्रैक्टिकल सोच भी इस रिश्ते के साथ जुड़ी होती है। यानी मदद का हाथ और दोस्त का साथ तो है पर इमोशनल फूल होने का जमाना गया अब। 

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Happy Friendship Day 2021 friends stories in hindi
फ्रेंडशिप डे 2021 - फोटो : Pixabay

विस्तार

दोस्ती या फ्रेंडशिप किसी रिश्ते से भी आगे एक ऐसा इमोशन है, जिसमें कई सारे रिश्ते शामिल हैं। एक अच्छा और सच्चा दोस्त पूरी फैमिली के बराबर हो सकता है। बदलते समय के साथ दोस्ती के इस इमोशन में भी कई और रंग शामिल हुए हैं। अब इमोशन्स के साथ प्रैक्टिकल सोच भी इस रिश्ते के साथ जुड़ी होती है। यानी मदद का हाथ और दोस्त का साथ तो है पर इमोशनल फूल होने का जमाना गया अब। 

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तेरी-मेरी दोस्ती के इमोशन्स वही हैं,
थोड़े हैं रूल्स अलग लेकिन दोस्ती वही है।
रिश्ते में भले ही हम न जुड़े हों,
जरूरी है मगर कि मुश्किल में साथ खड़े हों।
तुम मेरे बडी, मेरे सखा हो,
बस यही भाव सबसे सच्चा हो। 
हमेशा रखना भरोसा ये पक्का,
कहूं मैं प्राउड से हमेशा मेरा दोस्त है सबसे सच्चा। 

BUDDY, BRO और BRAH का रिश्ता 

सुबह 10.30 का टाइम है। नंदिनी के मोबाइल पर एक मैसेज चमकता है। 'ब्रो, थर्मोडायनामिक्स के नोट्स मिल गए हैं। टेंशन मत करना।' ये मैसेज नंदिनी के क्लॉसमेट का है। यही मैसेज पांच और लोगों को भी जाता है। केमिकल इंजीनियरिंग के फर्स्ट ईयर में ये इन छः लोगों का ग्रुप है। कोई जेंडर बायसनेस नहीं। सिर्फ दोस्ती। लड़के-लड़कियों सबके लिए सेम-सेम संबोधन 'ब्रो'। एक को नोट्स मिलें तो सबके होते हैं। सबके अचीवमेंट्स पर मिलकर खुश होते और एक की मुश्किल पर मिलकर रोते हैं। कॉलेज में और क्लास से लेकर ऑनलाइन पढ़ाई और प्रैक्टिकल सेशन के लिए दौड़भाग करने तक ये दोस्ती पक्की है। लड़के-लड़कियों दोनों का मानना है कि ये साथ मिलकर आगे बढ़ने का जमाना है। और आगे बढ़ना है तो सिर्फ मेहनत पर फोकस करना है, जेंडर पर नहीं। इसलिए जब एक्जाम्स होती हैं तो सब अपने बेस्ट पर फोकस करते हैं। लड़कियां बाजी मारती हैं तो भी नूडल्स और चाय की पार्टी होती है और लड़के आगे बढ़ते हैं तो भी। सबके लिए ब्रो, BUDDY और BRAH ही समान संबोधन हैं। सारे रूल्स दोनों के लिए समान हैं। सारे दोस्त हैं पतंगें तो इनके सामने खुला आसमान है। 

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दोस्ती में नो कन्सेशन, ओनली प्रोफेशन 

'ये एक साझा समझौता है हमारे बीच। केशव अगर मेरी बाइक ले जाएगा तो पेट्रोल भी वही भरवाएगा। बर्गर या पिज्जा खाने के बाद बारी बारी से सबका बिल चुकाने का मौका आएगा।' कहते हैं एमबीए फाइनल ईयर के छात्र मितेश। केशव, मितेश और देवांश, इन तीन दोस्तों की तिकड़ी स्कूल टाइम से अब तक शायद इसलिए ही टिकी हुई है। देवांश कहते हैं- 'हम तीनों मिडिल क्लास से हैं। स्कूल टाइम से एक-दूसरे को जानते हैं। हम ही नहीं हमारे परिवारों को भी इस दोस्ती का पता है। हम तीनों ही पैसे के लेन-देन को क्लियर रखते हैं।

हमें पता है कि हमारे घरों में किस तरह से हर महीने का बजट मैनेज होता है। इसलिए हमारा हिसाब किताब एकदम साफ होता है। जरूरत पड़ती है तो हम एक दूसरे की मदद भी करते हैं, लेकिन लंबा उधार नहीं रखते। शायद इन वजह से भी हमारी दोस्ती टिकी हुई है, क्योंकि अक्सर दोस्ती में दरार की वजह पैसों का लेन-देन भी बन जाता है।'  

सखी या सखा की गप्पें 

पच्चीस साल पुरानी है अड़ोस-पड़ोस में रहने वाली उमा और निर्मला की दोस्ती। ठीक तबसे जब उमा ब्याह कर इस घर में आई थीं और पड़ोस में कुछ ही महीने पहले आई नई ब्याहता निर्मला ने उन्हें बहन की तरह सहेज लिया। आज दोनों घरों में रिश्तेदारों से ज्यादा अपनापन है। दोनों के पति और बच्चे भी जानते हैं कि शाम की 6 बजे से साढ़े छह तक दोनों अपनी-अपनी मुंडेर पर खड़ी गप्पें मारेंगी। इसलिए उस समय कोई व्यवधान नहीं डालता। दोनों घरों में राशन और सब्जी भाजी से लेकर त्योहारों की खरीदारी और ब्याह शादी का व्यवहार तक एक-दूसरे की राय के बिना नहीं होता। घर के बच्चों की ऐश है, क्योंकि निर्मला के बच्चों को मालूम है अगर घर मे उनकी पसंद की सब्जी नहीं बनी तो भागकर उमा आंटी के घर चले जाना है और उमा के बच्चे जानते हैं कि हर संडे छोले-पूरी या आलू पराठे का नाश्ता निर्मला आंटी के घर ही मिलेगा। इसलिए ये दोस्ती सालों से कायम है।  

दोस्ती के तरीके और संबोधन भले ही बदल गए हों, पर अब भी भावना वही है। सच्ची दोस्ती में अगर मेरे साथ न हुआ तो तू मेरा भाई नहीं है। 

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