दूसरा पहलू: आखिर यह ऊर्जा बनती किससे है... वैज्ञानिकों के मुताबिक यह चीज नहीं, क्षमता या सामर्थ्य की तरह है
वैज्ञानिकों के लिए ऊर्जा कोई चीज नहीं है, जो किसी सामग्री से बनी हो। ऊर्जा क्षमता या सामर्थ्य की तरह है। जिस तरह से एक संगीतकार के पास वाद्ययंत्र बजाने की क्षमता होती है, ऊर्जा भी दरअसल किसी कार्य को करने की क्षमता को दर्शाती है। कुछ ऐसी चीजें जिनका कोई द्रव्यमान नहीं होता, फिर भी उनमें ऊर्जा हो सकती है। जैसे कि प्रकाश’ जो फोटॉन के छोटे कणों से बना होता है, जिसका कोई द्रव्यमान नहीं होता।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
एक बार एक बच्ची ने मुझसे पूछा कि आखिर यह ऊर्जा किससे बनी होती है। मैंने उसे समझाते हुए कहा कि वैज्ञानिकों के लिए ऊर्जा कोई चीज नहीं है, जो किसी सामग्री से बनी हो, जैसे कि घर ईंटों से बना होता है। ऊर्जा क्षमता या सामर्थ्य की तरह है। क्षमता किसी कार्य को करने की योग्यता है। जिस तरह से एक संगीतकार के पास वाद्ययंत्र बजाने और चित्रकार के पास चित्र बनाने की क्षमता होती है, ऊर्जा भी दरअसल किसी कार्य को करने की क्षमता को दर्शाती है। कोई भी वस्तु तभी कार्य करती है, जब अन्य वस्तु द्वारा उसपर बल लगाकर उसे विशेष दिशा में गति दी जाए।
कल्पना कीजिए कि आप क्रिकेट खेल रहे हैं, गेंद आपकी तरफ आती है और आप उसे बल्ले से मारते हैं। जब बल्ला गेंद को मारता है, तो गेंद की गति और दिशा बदल जाती है। जब आप बल्ले को घुमाते हैं, तो आप अपनी मांसपेशियों में संग्रहित ऊर्जा को उसमें स्थानांतरित करते हैं। चूंकि काम करने के कई तरीके होते हैं, उसी तरह ऊर्जा विभिन्न प्रकार की होती है। हम पहले ही एक प्रकार से परिचित हो चुके हैं, बल्ले को घुमाना। इसे ‘गतिज ऊर्जा’ कहते हैं। ऊर्जा का एक और प्रकार है स्थितिज ऊर्जा। स्थितिज ऊर्जा किसी वस्तु की वह क्षमता है, जो अन्य वस्तुओं के संबंध में उसकी स्थिति के कारण कार्य करने के लिए होती है। यानी चीजों को निश्चित स्थानों पर रखने से उन्हें ऊर्जा मिलती है।
इसका एक मजेदार उदाहरण है, कल्पना कीजिए कि आप एक बाल्टी पानी को आधे खुले दरवाजे के ऊपर रखते हैं। जब कोई उस दरवाजे से गुजरता है, तो बाल्टी उस व्यक्ति के सिर पर गिरेगी। बाल्टी दरवाजे के ऊपर है, इसलिए गिर सकती है। और जब यह गिरती है, तो कुछ कार्य करती है। यह न केवल व्यक्ति को भिगो देगी, जो दरवाजे से गुजरेगा, बल्कि उनके सिर पर भी प्रहार करेगी। बाल्टी में काम करने की क्षमता इसलिए है कि उसे दरवाजे के ऊपर रखा गया है, न कि इसलिए कि वह हिल रही है। यह क्षमता बाल्टी की ‘स्थितिज ऊर्जा’ है। ऊर्जा के बारे में आइंस्टीन का प्रसिद्ध समीकरण है, E= mc²। इसमें E ऊर्जा व m द्रव्यमान (वस्तु में मौजूद पदार्थ की मात्रा) के लिए है, वहीं c प्रकाश की गति को दर्शाता है। इससे प्रतीत होता है, ऊर्जा द्रव्यमान को प्रकाश की गति के वर्ग से गुणा करने के बराबर होती है। कुछ ऐसी चीजें जिनका कोई द्रव्यमान नहीं होता, फिर भी उनमें ऊर्जा हो सकती है। जैसे कि प्रकाश’ जो फोटॉन के छोटे कणों से बना होता है, जिसका कोई द्रव्यमान नहीं होता। तो, यदि ऊर्जा द्रव्यमान से बनी होती, तो प्रकाश में कोई ऊर्जा ही नहीं होती! -द कन्वर्सेशन से