कोरोना से जंग: कोविड-19 से बदल रहा यूरोप, पीएम से लेकर दिग्गज लोग कर रहे ये काम
कोरोना को हराने के लिए दुनिया के अधिकांश देश युद्धस्तर पर मोर्चा खोल चुके हैं। क्या राजा और क्या रंक सभी अपने स्तर पर सहयोग दे रहे हैं। यूरोप के कई राजपरिवारों में कुछ ऐसा नया देखने को मिल रहा है जो पहले कभी भी नहीं हुआ। मसलन ब्रिटिश शाहीघराने के प्रिंस विलियम्स और केट मिडल्टन परंपराओं से इतर आम जनता से रोज़ाना डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के सहारे मिल रहे हैं।
कोरोना के तांडव से बेहाल जनता के दर्द बांंटने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं पिछले हफ़्ते बरमिंघम में अस्थाई अस्पताल भी खोला गया। इसी तरह स्वीडिश शाहीपरिवार की प्रिंसेस सोफिया का अस्पताल के मानद अध्यक्ष पद पर होने के साथ-साथ उसी अस्पताल में बतौर सहायक कर्मचारी या नर्स बनकर काम करना। जबकि आयरलैंड के प्रधानमंत्री का दोबारा डॉक्टरी का पेशा शुरू करना।
इन सब का मक़सद एक है कि जबतक इस वायरस को निष्क्रिय करने की कोई सटीक दवा या वैक्सीन नहीं निकल जाती तब तक आवाम में मज़बूती बनी रहे। लोगों का भरोसा नहीं टूटे और मुश्किल घड़ी में सब साथ होने का अहसास कराए। कोरोना वायरस ने लोगों के शरीर के साथ साथ उनकी सोच को भी अच्छा ख़ासा प्रभावित किया है। यही वजह है कि अब लोगों की सोच और व्यवहार में अंतर दिखने लगा है।
यह भी एक वजह है कि राजघराने से ताल्लुक़ रखने वाले कोरोना से लड़ाई में आम जनता व डॉक्टरों का साथ देने के लिए आगे आ रहे हैं। तो कहीं प्रधानमंत्री अपनी डॉक्टरी का पेशा फिर से अपनाकर मरीज़ों के इलाज में लग जाते हैं। जी हांं, यूरोपीय देश आयरलैंड के प्रधानमंत्री लियो वरडकर ने मेडिकल प्रैक्टिशनर के तौर पर अपना नाम दोबारा पंजीकृत करा लिया है। ताकि वे अपनी योग्यता का उपयोग कोरोना के मरीज़ों को स्वस्थ करने में कर सके। लियो वरडकर का पारिवारिक इतिहास भारत से जुड़ा हुआ है। कोंकण में उनका पुश्तैनी गांंव है। वे भारतीय मूल के आयरलैंड के पहले प्रधानमंत्री भी है।
हालांंकि इस दौरान वे देश की ज़िम्मेदारी को भी निभाते रहेंगे। यानी वे ज़रूरत के मुताबिक़ डॉक्टर और प्रधानमंत्री दोनों रहेंगे। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में वे शिफ़्ट के आधार पर काम करेंगे। दरअसल, आयरलैंड में कोरोनावायरस से लड़ने में दिनोंदिन चुनौतियाँ बढ़ती जा रही थी। इसमें सबसे बड़ी समस्या स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में पेशेवरों की कमी थी। देश में बढ़ रही चुनौतियों के मद्देनज़र वरडकर ने खुद पुराने पेशे में वापसी के साथ एक बड़ा ही दिलचस्प व महत्वपूर्ण रोज़गार अभियान चलाया।
अभियान के तहत जनता से अपील की गई कि देश को आपकी ज़रूरत है। इसलिए स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र से जुड़े सक्षम लोग अगर चाहें तो दोबारा अपना योगदान देना शुरू कर सकते हैं। कुछ समाचार रिपोर्ट्स बताते हैं कि सरकार की इस अपील का इतना असर हुआ कि क़रीब सत्तर हज़ार सकारात्मक प्रतिक्रियाएंं मिली। और बड़ी संख्या में लोगों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में अपना योगदान देना शुरू कर दिया। हालांंकि इतने के बावजूद यहांं 15 हज़ार से अधिक लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं और मरने वालों की संख्या भी 600 से ज़्यादा है।
वरडकर राजनीति में आने से पहले सात सालों तक बतौर डॉक्टर अपनी सेवाएंं दे चुके हैं। साल 2013 के बाद उन्होंने यह काम बंद कर दिया और राजनीति में पूरी तरह से सक्रिय हो गए। लेकिन मौजूदा समय की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने पिछले महीने फिर से डॉक्टर बनने का मन बना लिया। ताकि वे इस क्षेत्र में दोबारा अपना योगदान दे सके।
प्रधानमंत्री के इस निर्णय से वहांं की जनता काफ़ी खुश है वहीं कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ने में उन्हें अधिक बल भी मिला है। उनके परिवार और दोस्तों में अधिकांश स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों जुड़े हुए हैं। और इस मुश्किल घड़ी का डटकर मुक़ाबला कर रहे हैं। उनके माता-पिता और बहनें सभी इसी क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं। लियो आयरलैंड के सबसे युवा प्रधानमंत्री भी हैं। साल 2017 में महज 38 साल की उम्र में वे देश के प्रधानमंत्री बन गए थे।
तो दूसरी ओर स्वीडन की प्रिंसेस सोफिया स्टॉकहोम के सोफियाहेम्मेट अस्पताल में अपनी सेवाएंं देने का आधिकारिक ऐलान कर चुकी हैं। वे इस अस्पताल की मानद अध्यक्ष भी हैं। चूंकि उन्होंने नर्सिंग का कोर्स किया है इसलिए उन्हें बतौर फ्रेसर पहले-पहल अस्पताल के हेल्थकेयर स्टाफ़ की मदद की ज़िम्मेदारी सौंपी जा रही है। वे उपकरणों को कीटाणुमुक्त करने, मरीज़ों की सेवा, भोजन और साफ़ सफ़ाई के कार्य में सहयोग देंगी। हाल में ही अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर उन्होंने अस्पताल की नई ड्रेस और टैग जिसपर बड़े अक्षरों में सोफिया लिखा था, फ़ोटो पोस्ट करते हुए अपनी ख़ुशी ज़ाहिर की।
उन्होंने लिखा कि ऐसे मुश्किल समय में लोगों की सहायता करने का अवसर मिलना वाक़ई ईनाम मिलने की तरह है। यह पहली बार है जबकि रॉयल फ़ैमिली से ताल्लुक़ रखने वाला कोई व्यक्ति इसतरह जनता से जुड़ने को मुखर हुआ है। आपको बता दूँ कि कि स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में कोरोना संक्रमित मरीज़ों और मरने वालों की संख्या देश में सबसे ज़्यादा है। स्वीडन में अबतक क़रीब पंद्रह हज़ार लोग संक्रमित हो चुके हैं और पंद्रह सौ से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
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