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दूसरा पहलू: जापान में अंतिम संस्कार पर लाखों का खर्च, कब्र के लिए भी जगह नहीं; अब पेड़ों के पास दफन हो रही राख

Wed, 28 Oct 2026 06:45 AM IST
शिवम गर्ग मिमि हानाओका
मिमि हानाओका Published by: शिवम गर्ग Updated Wed, 28 Oct 2026 06:45 AM IST
सार

जमीन की भारी कमी और लाखों के खर्च के चलते जापान में अंतिम संस्कार इतना महंगा हो गया है कि लोग अब कब्र की जगह पेड़ों के पास राख दफनाने लगे हैं।

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Japan Burial Crisis: High Funeral Costs and Shortage of Grave Space Push People Toward Tree Burials
जापान में महंगा हुआ आखिरी सफर - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

पीढ़ियों तक जापान में अंतिम संस्कार की व्यवस्था परिवार, सामुदायिक नेटवर्क और बौद्ध मंदिरों पर टिकी रही और 20वीं सदी तक दफनाने की पारंपरिक व्यवस्था कायम रही। पर, आज जापान अंतिम संस्कार और दफनाने से जुड़े एक बड़े संकट का सामना कर रहा है। 2024 के एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार, जापान में अंतिम संस्कार का औसत खर्च लगभग 12 लाख येन (करीब 7,600 अमेरिकी डॉलर) आता है, जो वहां के एक औसत कर्मचारी की कुल सालाना कमाई का लगभग एक-चौथाई हिस्सा बैठता है।

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आज जापान में अंतिम संस्कार के लिए दाह-संस्कार ही सबसे आम तरीका है। यहां 99.9 फीसदी मृतकों का दाह-संस्कार ही किया जाता है। शव को ताबूत में रखकर जलाने के बाद परिवार के सदस्य हड्डियों के कुछ या ज्यादातर टुकड़ों को एक कलश में रख लेते हैं। वे इस कलश को घर ले जाते हैं और एक बौद्ध वेदी पर रखते हैं। बाद में, इन हड्डियों को किसी कब्र, अस्थि-पात्र में रख कर एक जगह दफना दिया जाता है।
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2025 में समाधि के लिए पत्थर, कब्र के लिए जमीन व कब्रिस्तान के इस्तेमाल का कुल खर्च 15 लाख येन के करीब था। कब्र के लिए सीमित जगह व अत्यधिक खर्चों की वजह से ही लोग अब पारंपरिक कब्रों के बजाय दूसरे विकल्पों का रुख कर रहे हैं। इनमें से एक है वृक्ष-समाधि, जिसे जापानी भाषा में ‘जुमोकुसो’ कहा जाता है। इसमें मृतक की हड्डियों या राख को किसी पेड़ के आसपास दफनाया जाता है। 2022 के एक सर्वे के अनुसार, नई कब्रों में से 40 फीसदी से ज्यादा कब्रें इसी तरह की हैं। टोक्यो के दो सार्वजनिक कब्रिस्तानों में अब ‘वन-शैली’ या ‘जुरिन-गाता’ समाधि की सुविधा भी उपलब्ध है। इसमें मृतक की राख या अवशेषों को रेशमी थैलियों में रख कर जमीन के एक तय हिस्से में दफनाया जाता है।
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कुछ ऑटोमेटेड अस्थिगृह भी हैं, जहां अस्थि-कलश एक केंद्रीय सिस्टम में रखे जाते हैं। कुछ लोग आजकल हकाजिमाई प्रथा (कब्र बंद करने की प्रक्रिया) का विकल्प चुन रहे हैं। इसमें कब्र में दफनाए गए कलशों को बाहर निकाला जाता है और हड्डियों को सामूहिक अस्थि-भंडार जैसी किसी दूसरी जगह फिर से दफना दिया जाता है। इस प्रक्रिया से नियमित शुल्क चुकाने की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है। जापान में पारंपरिक रीति-रिवाजों को निभाना मुश्किल होता जा रहा है। फिर भी, लोग मृतकों से जुड़े रहने के तरीके खोज ही लेते हैं। दफनाने के तरीकों में बदलाव एक ऐसा ही तरीका है। -द कन्वर्सेशन

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