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दूसरा पहलू: जब धूमकेतु से खौफ पैदा हो जाता था, आज खगोलीय परिघटना कहते हैं, कभी राजाओं के पतन का संकेत समझते थे

Tue, 27 Oct 2026 03:37 AM IST
ज्योति भास्कर गाइल्स गैस्पर (साथ में, ब्रायन टैनर (द कन्वर्सेशन)
गाइल्स गैस्पर (साथ में, ब्रायन टैनर (द कन्वर्सेशन) Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 27 Oct 2026 03:37 AM IST
सार

आज जिसे खगोलीय परिघटना कहते हैं, कभी उसे राजाओं के पतन का संकेत समझा जाता था। 1066 में हैली धूमकेतु ने ऐसी ही मान्यताओं को बल दिया। विलियम ऑफ पोइटियर्स ने धूमकेतु को राजा हेरोल्ड के लिए दुर्भाग्यपूर्ण, जबकि उनके विरोधियों के लिए शुभ संकेत माना था।

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bizzare comets are now termed celestial phenomena In history fearsome seen as omens of downfalling kings
खगोलीय घटना (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

बायेक्स टेपेस्ट्री (कपड़ा, जिस पर चित्र कढ़े होते हैं) पर एक दृश्य में राजा हेरोल्ड को आकाश की ओर देखती भीड़ के साथ दिखाया गया है। हेरोल्ड के ऊपर हैली धूमकेतु है और नीचे की ओर भूत जैसी हमलावर नौकाएं दिखाई दे रही हैं। यह चित्र हेरोल्ड को सत्ता हथियाने वाले एक ऐसे राजा के रूप में बता रहा है, जिसके विनाश का कारण विश्वासघात बना।
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नॉर्मन लेखक विलियम ऑफ पोइटियर्स ने लिखा था कि एक धूमकेतु या राजाओं के आतंक को व्यापक रूप से मानव जीवन में बदलाव का संकेत माना जाता था। पश्चिमी यूरोप के अधिकांश स्रोतों के अनुसार, धूमकेतु 24 अप्रैल, 1066 से हर शाम दिखाई देने लगा था। यह हेरोल्ड के राज्याभिषेक के करीब चार महीने बाद तक नजर आता रहा।
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आधुनिक गणनाओं से पता चलता है कि धूमकेतु तब पृथ्वी से लगभग डेढ़ करोड़ किलोमीटर की दूरी पर आया था। तत्कालीन चीनी रिपोर्टों के मुताबिक, यह धूमकेतु शुक्र ग्रह जैसा ही चमकीला था और इसकी पूंछ आकाश में 15 डिग्री तक फैली थी। विलियम ऑफ पोइटियर्स ने इस धूमकेतु को हेरोल्ड के लिए दुर्भाग्यपूर्ण, जबकि उनके विरोधियों के लिए शुभ संकेत माना।
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समकालीन इतिहासकार विलियम ऑफ ज्यूमिएजेस के अनुसार, धूमकेतु के दिखने का मतलब था कि सत्ता में बदलाव आने वाला है। अंग्रेज इतिहासकार विलियम ऑफ माल्म्सबरी का भी यही कहना था कि धूमकेतु किसी महामारी के आने या फिर सत्ता में परिवर्तन की सूचना देते हैं। वहीं, अरस्तू के अनुसार, धूमकेतु एक मौसमी या ‘सब-ल्यूनरी’ (चंद्रमा के नीचे की) घटना थी।

हालांकि, रोमन दार्शनिक सेनेका व मध्ययुगीन इस्लामी विचारकों ने इस धारणा को चुनौती दी। उन्होंने धूमकेतुओं को चंद्रमा के ऊपर के आकाशीय क्षेत्रों में होने वाली जटिल खगोलीय घटना माना। अंग्रेज दार्शनिक रॉबर्ट ग्रोसटेस्ट का ग्रंथ ऑन कॉमेट्स संभवतः 1222 में हैली धूमकेतु के दोबारा दिखाई देने के समय लिखा गया था। उनका तर्क था कि धूमकेतु पृथ्वी के उस पदार्थ से बनते हैं, जो ऊपर की ओर खिंच जाता है और आकाशीय शक्तियों के प्रभाव में आकर चमकीले तारे में रूपांतरित हो जाता है। ये जिन क्षेत्रों में दिखाई देते हैं, वहां के लोगों में भय पैदा करते हैं।


टेपेस्ट्री में दर्शाई गई तबाही केवल मध्ययुगीन अंधविश्वास नहीं थी। एक ऐसे ब्रह्मांड में जहां आकाशीय घटनाएं सीधे तौर पर मानव जीवन को प्रभावित करती थीं, हैली धूमकेतु को एक बदलाव के संकेत के रूप में एक घातक संकेत के रूप में देखा गया था।
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