ट्रंप का भारत दौराः स्वागत की तैयारियों में कितना सच दिखेगा कितना छुपेगा?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इसी महीने की 24-25 तारीख को भारत दौरे पर आ रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस्तकबाल में गुजरात के अहमदाबाद में एक झुग्गी बस्ती को छुपाने के लिए दीवार खड़ी जा रही है, वजह है कि इस रास्ते से जब ट्रंप का काफिला गुजरे तो उन्हें यह झुग्गी बस्ती यानी गरीब भारत की झलक न दिखे।
वह भी एयरपोर्ट से महात्मा गांधी के साबरमती आश्रम के रास्ते में स्थित यह बस्ती सरकार की आंख की किरकिरी बन गई है। या यूं कहें कि विकास के ढिंढोरे में बाधा बन रही है। ट्रंप को इसी रास्ते से बापू का आश्रम दिखाने ले जाना है।
गांधी के देश और प्रदेश में उनकी 150वीं जन्म जयंती वर्ष पर सत्य को इस तरह क्यों ढंका जा रहा है? क्या अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं जानते कि भारत के रुपये का उनके डॉलर के मुकाबले क्या हाल है? और यह भी कि भारतीय अर्थव्यवस्था क्यों हिचकोले खा रही है? ये वही ट्रंप हैं जो हाउडी मोदी में मोदी की तारीफ और भारत की प्रशंसा करने के साथ ही कश्मीर मुद्दे पर भारत को मुश्किल में डालने और नापाक पाकिस्तान की तरफदारी करते दिखते रहे हैं।
अपने देश में भारी विरोध और अभियोग का सामना कर उसे खारिज कराने में कामयाब रहे ट्रंप हाउडी मोदी में भी और यहां अहमदाबाद में भी उसकी नकल केम छो ट्रंप जो अब संशोधित होकर नमस्ते राष्ट्रपति ट्रंप कर दी गई है, में भी अमेरिकी चुनाव की कैंपेनिंग के लिए ही तशरीफ ला रहे हैं।
सवाल ये है कि करीब ढाई हजार आबादी वाली झुग्गी बस्ती जब बार-बार अहमदाबाद आने वाले विदेशाी महानुभावों को भारत के असल गरीबी वाले दर्शन की झलक दिखाती है तो सरकार ने उस बस्ती को शानदार क्यों नहीं बना दिया अब तक। अब तक ऐसे मौकोंं पर उसे पर्दे से ढंका जाता रहा और अब जाकर उसे दीवार खड़ी करके परमानेंट रूप से छुपाने की जुगत सूझी है।
झुग्गी बस्ती को छुपाने के लिए दीवार खड़ी किए जाने का लोग विरोध कर रहे हैं। यह झुग्गी बस्ती एयरपोर्ट से साबरमती आश्रम के रास्ते पर आती है। इस दीवार से लोगों को कितनी तकलीफ और अपमानजनक स्थिति झेलना पड़ेगी इसका अंदाज पांच ट्रिलियन इकोनॉमी का सपना देख रहे मुल्क के हुक्मरानों को होना ही चाहिए।
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 24-25 फ़रवरी को भारत के दो दिवसीय दौरे के दौरान दिल्ली के अलावा अहमदाबाद भी पहुंचेंगे। उनका भारत में स्वागत कुछ उसी अंदाज़ में करने की तैयारियां चल रही हैं जैसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अमेरिका में हुआ था। इसके लिए ह्यूस्टन में हुए 'हाउडी मोदी' की तरह अहमदाबाद में जलसा- केम छो ट्रंप- यानी ट्रंप आप कैसे हैं? की तैयारी हो रही थी। हालांकि क्षेत्रीयता को बढ़ावा देने का आरोप न लगे इसलिए अब इस कार्यक्रम का नाम बदलकर -नमस्ते राष्ट्रपति ट्रंप- कर दिया गया है।
गौरतलब है कि खुद मोदी गुजरात में भी पूरा भाषण गुजराती में देने के बजाय हिंदी में ही देते हैं। वे ऐसा प्रधानमंत्री बनने से पहले ही शुरू कर चुके थे। भले कार्यक्रम का नाम बदलना पड़ा हो, लेकिन रहेगा वह गुजरात में ही और उस पर पूरी छाप भी। कार्यक्रम में ट्रंप के साथ प्रधानमंत्री मोदी भी मौजूद रहेंगे।
उल्लेखनीय है कि पिछले साल सितंबर में भारतीय प्रधानमंत्री मोदी और अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ह्यूस्टन में लगभग 50 हज़ार अमेरिकी और भारतीय मूल के लोगों को संयुक्त रूप से सम्बोधित किया था। अहमदाबाद में भी कुछ ऐसी ही योजना है। गुजरात के अखबारों में छपी खबरों के मुताबिक़ ट्रंप और मोदी अहमदाबाद के मोटेरा इलाक़े में हाल ही में बने सरदार वल्लभ भाई पटेल क्रिकेट स्टेडियम का उद्घाटन भी करेंगे।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड अध्यक्ष सौरव गांगुली तथा अन्य पदाधिकारी भी इस कार्यक्रम में पहुंचेंगे। इस जलसे में स्टेडियम में लगभग एक लाख लोग मौजूद रहेंगे। स्टेडियम की क्षमता एक लाख 10 हजार लोगों के बैठने की है।
अमेरिकी राष्ट्रपति के दौरे के मद्देनज़र मोटेरा स्टेडियम और साबरमती आश्रम के आस-पास के लगभग 16 रास्तों का पुनर्निमाण किया जा रहा है और उन्हें सजाया जा रहा है। शहर के स्कूलों और कॉलेजों से छात्रों को मोटेरा स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए बुलाया जा रहा है।
नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, जापानी प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे और इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू भी अहमदाबाद आ चुके हैं।
अमेरिका में चुनाव और ट्रंप भारत यात्रा का समीकरण
अमेरीका में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को देखते हुए डोनल्ड ट्रंप के लिए यह दौरा अहम माना जा रहा है। ट्रंप का यह भारत दौरा एक तरह से उनके चुनावी अभियान का ही हिस्सा है। अमेरिका में गुजराती मूल के लोगों की अच्छी-ख़ासी संख्या है और गुजरात से बड़ी संख्या में लोग अमेरिका जाते हैं।
केम छो ट्रंप में शामिल होने के लिए गुजराती मूल के चुनिंदा अमेरिकियों को अहमदाबाद बुलाया जा सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की यह पहली भारत यात्रा है और वे सीनेट में अपने ख़िलाफ़ महाभियोग का मुक़दमा ख़ारिज होने के ठीक बाद यहां आ रहे हैं।
पाकिस्तान में इमरान की आलोचना और राग कश्मीर
जाहिर है पाकिस्तान भले ही भारत के मुकाबले अमेरिका के लिए ज्यादा महत्व न रखता हो, लेकिन चीन के खतरे को संतुलित रखने के लिए डोनॉल्ड ट्रंप कश्मीर मसले पर मध्यस्थता का राग अलापते रहे हैं और भारत को अप्रिय लगने के बावजूद वे बार-बार ऐसा करते हैं।
पाकिस्तानी सरकार और मीडिया ट्रंप के भारत दौरे से बिलबिलाए हुए हैँं और वे फिर उम्मीद से हैं कि ट्रंप कश्मीर पर भारत से एक दफा फिर मध्यस्थता को कह सकते हैं। लेकिन ट्रंप भी राजनीतिज्ञ हैं और वे चुनाव में जाने वाले हैं तो ऐसे में वे भारत और अमेरिका में भारतीय समुदाय को नाराज करने का जोखिम नहीं उठाना चाहेंगे।
हालांकि चीन में कोरोना वायरस से मचे हाहाकार और उसका भारत सहित विश्व कारोबार पर पड़ रहे विपरीत असर के हालात के मद्देनजर ट्रंप भारत पर व्यापार के लिहाज से और दबाव बनाने के संकेत दे सकते हैं। उन्होंने मोदी को अपनी पसंद बताते हुए हाल ही में भारत पर अमेरिका से अच्छा व्यवहार नहीं करने का आरोप लगाया है। उनकी भारत यात्रा के ऐन पहले यह बयान इसी दिशा में संकेत दे रहा है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।