जीवन धारा: क्रोध को हावी मत होने दीजिए, विचार करके कदम बढ़ाने का कारगर सूत्र अपनाएं
क्रोध की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वह हमारे निर्णय लेने की क्षमता का ह्रास कर देता है। इससे हम ऐसे फैसले कर बैठते हैं, जिनका दुष्परिणाम लंबे समय तक भुगतना पड़ता है।
विस्तार
मेरे विचार में क्रोध उन भावनाओं में से है, जो बाहर से भले छोटी दिखाई दें, लेकिन भीतर बहुत कुछ नष्ट करने की क्षमता रखती हैं। किसी की बात हमें बुरी लगती है, किसी का व्यवहार हमारी अपेक्षाओं के विपरीत होता है या हमें लगता है कि हमारे साथ अन्याय हुआ है और देखते ही देखते मन क्रोध से भर जाता है। उस क्षण हमें लगता है कि गुस्सा हमें ताकत दे रहा है। लेकिन, सच तो यह है कि क्रोध सबसे पहले हमारी ही शांति, विवेक और खुशी को छीनता है।
क्रोध की असली समस्या यह नहीं है कि वह कुछ समय के लिए हमें बेचैन कर देता है। बड़ी समस्या यह है कि क्रोध हमारे निर्णय लेने की क्षमता का ह्रास कर देता है। ऐसे में, हम ऐसी बातें कह देते हैं, जिन पर बाद में पछतावा होता है। ऐसे फैसले कर लेते हैं, जो लंबे समय तक दुख देते हैं।
कभी कुछ मिनटों का गुस्सा पुराने रिश्ते को नुकसान पहुंचा देता है। हालांकि, इसका अर्थ यह भी नहीं है कि हर परिस्थिति में चुप रहना चाहिए। गलत व्यवहार को रोकना जरूरी है। अपनी सीमाएं तय करना भी महत्वपूर्ण है और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना हमारा नैतिक कर्तव्य है। लेकिन, इन सबके लिए क्रोध की जरूरत नहीं है। मेरा मानना है कि शांत मन से लिया गया दृढ़ निर्णय अक्सर गुस्से में दी गई प्रतिक्रिया से अधिक प्रभावी होता है। क्रोध को समझने के लिए हमें अपनी धारणाओं पर भी ध्यान देना होगा। ह
म अक्सर दूसरों की नीयत के बारे में बहुत जल्दी निष्कर्ष निकाल लेते हैं। कोई व्यक्ति हमारे साथ रूखा व्यवहार करता है, तो हम मान लेते हैं कि वह जानबूझकर हमारा अपमान कर रहा है। कभी-कभी हमें लगता है कि कोई व्यक्ति हमें महत्व नहीं दे रहा। पर, हर घटना के पीछे वही कारण नहीं होता, जो पहली नजर में दिखाई देता है। संभव है कि सामने वाला स्वयं किसी परेशानी से गुजर रहा हो। यदि हम हर छोटी घटना को अपने विरुद्ध किया गया कदम मानने लगें, तो हमारा मन हमेशा लड़ाई के लिए तैयार रहेगा। इसलिए, क्रोध पर नियंत्रण का एक महत्वपूर्ण तरीका अपनी सहनशीलता बढ़ाना है।
मेरे लिए अच्छे जीवन का एक अर्थ यह भी है कि हम अपनी मानसिक शांति को उन छोटी-छोटी घटनाओं के हवाले न करें, जो हमारे जीवन में बहुत मायने नहीं रखतीं। यदि हम हर छोटी बात पर क्रोधित होकर अपनी शांति खोते रहेंगे, तो धीरे-धीरे हमारा जीवन महत्वहीन चीजों में ज्यादा बीतेगा। इसलिए, जब कोई घटना आपको क्रोधित करे, तो तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय एक क्षण रुकिए। खुद से पूछिए कि क्या यह बात वास्तव में इतनी महत्वपूर्ण है कि मैं इसके बदले अपनी शांति खो दूं? कई बार एक छोटे-से ठहराव में ही हमें वह विवेक मिल जाता है, जिसकी जरूरत जीवन को बेहतर बनाने के लिए होती है।
-ए गाइड टू द गुड लाइफ के अनूदित अंश
सूत्र: विचार करके कदम बढ़ाएं
क्रोध में प्रतिक्रिया देना आसान है, लेकिन शांत रहकर सही निर्णय लेना असली ताकत है। हर बात को व्यक्तिगत बनाना जरूरी नहीं। इसलिए, जब कोई बात मन को विचलित करे, तो तुरंत उत्तर देने के बजाय स्वयं को कुछ क्षण दें। खुद से पूछें कि आपका अगला कदम आपकी जिंदगी को बेहतर बनाएगा या आपकी शांति छीन लेगा।