मुंबई: आरे जंगल में पेड़ों की कटाई पर बीजेपी-शिवसेना आमने-सामने, बना चुनावी मुद्दा
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देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आजकल मेट्रो कारशेड बनाने के लिए गोरेगांव पूर्व के आरे जंगल के क़रीब 2700 से अधिक पेड़ काटने के मुद्दे पर घमासान मच गया है। इस मसले में राजनीतिक दलों के दख़ल के बाद यह अगले महीने होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव में मुंबई में एक अहम चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है।
भारतीय जनता पार्टी जहां मेट्रो कारशेड बनाने का पूरा समर्थन कर रही है, वहीं गठबंधन की ही सहयोगी शिवसेना इतने बड़े पैमाने पर पेड़ काटने का विरोध कर रही हैं। पेड़ काटने का विरोध करने वालों में कांग्रेस और एनसीपी समेत कई विपक्षी दल भी हैं।
पर्यावरण को लेकर कितने चिंतित हैं मुंबईकर
मुंबई में पर्यावरण संरक्षण हर मुंबईकर के एजेंडे में होता है। हर नागरिक चाहता है कि शहर के पर्यावरण की हिफाजत हो, इसीलिए हर राजनैतिक दल इस मुद्दे पर जनता के साथ होते हैं। लेकिन महाराष्ट्र में विधानसभा में सीटों के बंटवारे से ठीक पहले आरे जंगल में पेड़ काटने के मुद्दे पर भाजपा-शिवसेना गठबंधन में मतभेद पैदा हो गया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस कहते हैं, “सरकार मुंबई की ट्रैफिक समस्या को हल करने के लिए कृतसंकल्प है। शहर के हर कोने को मेट्रो से जोड़ना हम सबका सपना है। सरकार सारे विकल्पों पर विचार कर चुकी है, हमारे पास मेट्रो कारशेड के लिए आरे के अलावा और कोई जगह नहीं है। आरे में मेट्रो कारशेड बनाना ज़रूरी है, लिहाज़ा, यहां ज़मीन के पेड़ों को काटने के अलावा हमारे पास कोई विकल्प नहीं है।”
दूसरी ओर शिवसेना के युवा नेता आदित्य ठाकरे मेट्रो कारशेड बनाने का तो समर्थन कर रहे हैं, लेकिन आरे के जंगल के पेड़ काटने का तीव्र विरोध कर रहे हैं। कई लोग इसे फड़णवीस बनाम ठाकरे मुद्दा कह रहे हैं। इस बारे में आदित्य कहते हैं, ‘‘यह मुद्दा न तो आदित्य बनाम मुख्यमंत्री है और न ही शिवसेना बनाम भाजपा है।
दरअसल, यह मुंबई के पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा है। मुख्यमंत्री की तरह यह हमारा भी सपना है कि मुंबई में मेट्रो का जाल बिछे। शहर का बहुमुखी विकास हो। लेकिन यहां मुद्दा पेड़ काटने का नहीं ही नहीं बल्कि मुंबई के पर्यावरण का भी है। इसीलिए हम नागरिकों की मुहिम का समर्थन कर रहे हैं।”
पेड़ों की कटाई के पक्ष में जयराम रमेश भी नहीं, कांग्रेस भी सामने
पूर्व केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश भी आरे में पेड़ काटने का विरोध कर रहे हैं। मुंबई प्रवास के दौरान उन्होंने कहा, “यह मुद्दा सिर्फ आरे में मेट्रो कारशेड के निर्माण तक सीमित नहीं है। कारशेड के बहाने आरे के पर्यावरण संपन्न क्षेत्र में घुसपैठ का सुनियोजित प्रयास है। अभी तो केवल कारशेड बनाने की बात की जा रही है। भविष्य में आरे में बड़ी-बड़ी इमारतें बनेंगी। इस तरह आरे का कुदरती स्वरूप नष्ट हो जाएगा।
वे कहते हैं- हम विकास के विरोधी नहीं हैं, विकास होना ही चाहिए, लेकिन पर्यावरण को नष्ट करने वाला विकास हमें नहीं चाहिए।” रमेश आरे के आदिवासियों, पर्यावरणप्रेमियों और आरे बचाओ आंदोलन से जुड़ी सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों से मिलने मुंबई आए थे।
जयराम रमेश के दौरे के बाद मुंबई कांग्रेस आरे में पेड़ काटने के विरोध में चल रहे इस आंदोलन में सबसे अधिक मुखर हो गई है। मुंबई कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व सांसद एकनाथ गायकवाड़ और पूर्व मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम आरे में पेड़ काटने के विरोध में आदिवासी समाज और सेव आरे के साथ मिलकर वृक्षपूजन कार्यक्रम का आयोजन कर चुके हैं।
22 सितंबर को निरुपम के साथ बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरे पिकनिक पॉइंट के पास क्रांतिवीर बिरसा मुंडा चौक के पास पेड़ काटने के ख़िलाफ़ चिपको आंदोलन का आयोजन किया। एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे भी आरे कॉलोनी में पेड़ काटने का विरोध दर्ज करा चुके हैं।
क्या है मुंबई में विकास की योजना
मुंबई में इन दिनों मेट्रो रेल का जाल बिछाया जा रहा है। अभी हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चौदहवें मेट्रो लाइन का शिलान्यास किया है। मुंबई के दो ग्रीन जोन्स में से एक आरे कॉलोनी में मेट्रो कारशेड बन रहा है। कारशेड के लिए कम से कम पच्चीस हेक्टेयर ज़मीन की आवश्यकता पड़ रही है।
क़रीब तेरह सौ हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले आरे का जंगल बहुत घना है, इसलिए कारशेड के लिए ज़मीन विकसित करने के लिए पेड़ काटना बहुत ज़रूरी है। मेट्रो कारशेड के लिए आरे में पेड़ काटने के मुद्दे पर पर्यावरण प्रेमी और बीएमसी एवं एमएमआरसीएल पहले ही आमने सामने हैं। आरे में इस मसले पर आए दिन धरना प्रदर्शन हो रहा है।
आरे कॉलोनी में पेड़ काटने के खिलाफ बॉम्बे हाइकोर्ट में याचिका दायर करने वाले एक्टिविस्ट जोरू बथेना का कहना है कि कांक्रीट शहर में तब्दील हो चुके मुंबई में हरियाली वैसे भी कम है। हमारे पास संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान और आरे कॉलोनी के अलावा और कोई ग्रीन ज़ोन नहीं है। लिहाज़ा, पेड़ों की रक्षा की जानी चाहिए।
आरे की जमीन ईको-सेंसिटिव जोन है, इसलिए यह मेट्रो कारशेड के लिए ठीक नहीं है। पर्यावरण विशेषज्ञ बार-बार कह रहे हैं कि इससे यहां के वन्यजीव को ख़तरा है। कारशेड के लिए वैकल्पिक जगहें उपलब्ध हैं। वहां मेट्रो कारशेड बनाया जाना चाहिए, लेकिन सरकार जानबूझकर लोगों को भ्रमित कर रही है। पेड़ काटने का विकल्प तलाशने की जगह सरकार अपनी ज़िद पर अड़ी हुई है।
अमिताभ बच्चन भी निशाने पर, पर्यावरण प्रेमी सड़क पर
अमिताभ बच्चन ने ट्वीट कर मेट्रो का समर्थन किया। एक किस्से का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मेट्रो रेल यातायात का तेज, सुविधाजनक और सबसे कुशल साधन है। बिग बी के इस ट्वीट को सोशल मीडिया पर बहुत ज्यादा नकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। यूजर्स ने लिखा कि अमिताभ ने मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए आरे कॉलोनी में इतने ज्यादा पेड़ों को काटे जाने का समर्थन करके आम मुंबईकर्स की भावनाओं को हर्ट किया है। एक व्यक्ति ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि सितंबर 2010 में अमिताभ मेट्रो प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे थे, क्योंकि वह उनके बंगले प्रतीक्षा के पास से गुज़र रही थी।
पेड़ों को काटने के मुद्दे पर प्रशासन और पर्यावरण प्रेमियों के बीच टकराव चरम पर हैं। पर्यावरण प्रेमियों ने आखिरी सांस तक लड़ने का ऐलान कर दिया है। इसी विषय पर पिछले दिनों एसएनडीटी कॉलेज में एक चर्चा का आयोजन किया गया। चर्चा में प्रशासन और पर्यावरण प्रेमियों के बीच सहमति नहीं बन पाई।
सरकार का नुमाइंदा बनकर आईं मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की प्रबंध निदेशक अश्विनी भिडे ने कहा कि आरे फॉरेस्ट में मेट्रो के लिए 2700 पेड़ काटे जाएंगे। इतने पेड़ साल भर में 64 टन कार्बन डाईऑक्साइड का अवशोषण करते हैं, जबकि चार दिन में मेट्रो-3 लगभग 194 ट्रिप करेगी। इससे इन दिनों में 64 टन कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन कम होगा। यानी मौजूदा प्रदूषण कम हो जाएगा।
बीएमसी कमिश्नर प्रवीण परदेशी ने कहा, “डेढ़ करोड़ मुंबईकर्स के लिए पब्लिक यातायत में सुधार की ज़रूरत है, क्योंकि बढ़ती निजी गाड़ियों से वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। मुंबई आज सबसे अधिक प्रदूषित शहरो में से एक है। प्रदूषण का मुख्य कारण निजी गाड़ियों से आने वाले धुएं के कार्बन मोनो ऑक्साईड और अन्य प्रदुषित घटक जिम्मेदार है।” परदेशी ने साफ कर दिया कि मेट्रो तीन के लिए आरे के अलावा कहीं भी कारशेड नहीं बनाया जा सकता।
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