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साहस, विश्वास और सफलता: डरें नहीं कि लोग आपके बारे में क्या सोचेंगे
Thu, 12 Mar 2026 07:32 AM IST
Nitin Gautam
अल्बर्ट हबर्ड
अल्बर्ट हबर्ड
Published by: Nitin Gautam
Updated Thu, 12 Mar 2026 07:32 AM IST
सार
जब मन में डर घर कर जाता है, तो निर्णय शक्ति कमजोर हो जाती है और जब मन में द्वेष भर जाता है, तब दिशा खो जाती है। इसलिए आप अपना ध्यान उन्हीं कार्यों पर केंद्रित रखें, जिन्हें जीवन में हासिल करना चाहते हैं।
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साहस और विश्वास की ताकत
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सफलता खून में होती है। कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें किस्मत कभी रोक नहीं सकती, वे जोश में आगे बढ़ते हैं, और भगवान का हुक्म मानकर दुनिया की हरेक चीज में से सबसे अच्छी चीजें ले लेते हैं। ऐसे लोग जीवन को पूरे उत्साह से जीते हैं। उनका स्वभाव खुला और स्पष्ट होता है, इसलिए उन्हें इस बात का भय नहीं होता कि लोग उनके बारे में क्या सोचेंगे।
सफलता पाने के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा भय और घृणा होती है। भय मनुष्य की बुद्धि को भ्रमित कर देता है और घृणा उसके मार्गदर्शन को नष्ट कर देती है। जब मन में डर घर कर जाता है, तो निर्णय शक्ति कमजोर हो जाती है और जब मन में द्वेष भर जाता है, तो दिशा खो जाती है। इसलिए आवश्यक है कि मनुष्य अपना ध्यान उन महान और उज्ज्वल कार्यों पर केंद्रित रखे, जिन्हें वह जीवन में हासिल करना चाहता है। जब मन किसी श्रेष्ठ लक्ष्य पर स्थिर हो जाता है, तब समय के साथ ऐसे अवसर स्वयं सामने आने लगते हैं जो उस लक्ष्य को पूरा करने में सहायक होते हैं। मनुष्य जैसा सोचता है, धीरे-धीरे वैसा ही बनता जाता है। यदि वह अपने मन में एक सक्षम, ईमानदार और उपयोगी व्यक्ति की छवि बसाए रखे, तो वही विचार धीरे-धीरे उसके व्यक्तित्व को उसी दिशा में ढालने लगते हैं। सही मानसिक दृष्टिकोण ही जीवन की दिशा तय करता है। साहस, स्पष्टता और प्रसन्नता का भाव मनुष्य को भीतर से मजबूत बनाता है। बहुत-से लोग मित्रता पाने के लिए लोगों के पीछे भागते हैं, पर सच्ची मित्रता पाने का एक ही मार्ग है कि पहले स्वयं एक सच्चे मित्र बनें। आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास के बिना कोई भी संबंध स्थायी नहीं हो सकता। जब मनुष्य अपने भीतर इतनी शक्ति विकसित कर लेता है कि वह अकेले भी संतुलित और संतुष्ट रह सके, तब वही शक्ति उसे दूसरों के जीवन में सहयोग और स्नेह देने योग्य बनाती है।
जीवन में एक और महत्वपूर्ण बात है सही मानसिक अवस्था बनाए रखना। जो व्यक्ति आशा, साहस और विश्वास के साथ आगे बढ़ता है, उसका मार्ग धीरे-धीरे स्पष्ट होता जाता है। चरित्र का निर्माण भी इन्हीं दो बातों से होता है-हम क्या सोचते हैं और अपना समय किस प्रकार बिताते हैं। जब मनुष्य यह समझ लेता है कि वह इस विशाल सृष्टि का एक आवश्यक हिस्सा है, तब उसके भीतर एक नई शक्ति जन्म लेती है। वह अपने जीवन को अर्थपूर्ण बनाने का संकल्प करता है और उसी दिशा में आगे बढ़ता है। और जब मनुष्य पूरे विश्वास के साथ ब्रह्मांड की शक्तियों को अपने साथ जोड़ लेता है, तब उसके भीतर नई ऊर्जा प्रवाहित होने लगती है। जैसे ही वह इस सत्य को पहचान लेता है, बाकी सब सरल हो जाता है। तब उसके हृदय में यह अटूट संकल्प जन्म लेता है कि वह अपने जीवन में कुछ सार्थक कर सकता है और स्वयं को श्रेष्ठ बना सकता है। -लव लाइफ एंड वर्क के अनूदित अंश
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आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें
सफलता उन्हीं को मिलती है, जो भय और संदेह से ऊपर उठकर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते हैं। मनुष्य जैसा सोचता है, धीरे-धीरे वैसा ही बनता जाता है। इसलिए अपने मन में साहस, आशा और श्रेष्ठ लक्ष्य का विचार स्थिर रखें। सकारात्मक दृष्टि और दृढ़ संकल्प से आंतरिक शक्ति आपको निरंतर आगे बढ़ाती रहती है।
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सफलता पाने के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा भय और घृणा होती है। भय मनुष्य की बुद्धि को भ्रमित कर देता है और घृणा उसके मार्गदर्शन को नष्ट कर देती है। जब मन में डर घर कर जाता है, तो निर्णय शक्ति कमजोर हो जाती है और जब मन में द्वेष भर जाता है, तो दिशा खो जाती है। इसलिए आवश्यक है कि मनुष्य अपना ध्यान उन महान और उज्ज्वल कार्यों पर केंद्रित रखे, जिन्हें वह जीवन में हासिल करना चाहता है। जब मन किसी श्रेष्ठ लक्ष्य पर स्थिर हो जाता है, तब समय के साथ ऐसे अवसर स्वयं सामने आने लगते हैं जो उस लक्ष्य को पूरा करने में सहायक होते हैं। मनुष्य जैसा सोचता है, धीरे-धीरे वैसा ही बनता जाता है। यदि वह अपने मन में एक सक्षम, ईमानदार और उपयोगी व्यक्ति की छवि बसाए रखे, तो वही विचार धीरे-धीरे उसके व्यक्तित्व को उसी दिशा में ढालने लगते हैं। सही मानसिक दृष्टिकोण ही जीवन की दिशा तय करता है। साहस, स्पष्टता और प्रसन्नता का भाव मनुष्य को भीतर से मजबूत बनाता है। बहुत-से लोग मित्रता पाने के लिए लोगों के पीछे भागते हैं, पर सच्ची मित्रता पाने का एक ही मार्ग है कि पहले स्वयं एक सच्चे मित्र बनें। आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास के बिना कोई भी संबंध स्थायी नहीं हो सकता। जब मनुष्य अपने भीतर इतनी शक्ति विकसित कर लेता है कि वह अकेले भी संतुलित और संतुष्ट रह सके, तब वही शक्ति उसे दूसरों के जीवन में सहयोग और स्नेह देने योग्य बनाती है।
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जीवन में एक और महत्वपूर्ण बात है सही मानसिक अवस्था बनाए रखना। जो व्यक्ति आशा, साहस और विश्वास के साथ आगे बढ़ता है, उसका मार्ग धीरे-धीरे स्पष्ट होता जाता है। चरित्र का निर्माण भी इन्हीं दो बातों से होता है-हम क्या सोचते हैं और अपना समय किस प्रकार बिताते हैं। जब मनुष्य यह समझ लेता है कि वह इस विशाल सृष्टि का एक आवश्यक हिस्सा है, तब उसके भीतर एक नई शक्ति जन्म लेती है। वह अपने जीवन को अर्थपूर्ण बनाने का संकल्प करता है और उसी दिशा में आगे बढ़ता है। और जब मनुष्य पूरे विश्वास के साथ ब्रह्मांड की शक्तियों को अपने साथ जोड़ लेता है, तब उसके भीतर नई ऊर्जा प्रवाहित होने लगती है। जैसे ही वह इस सत्य को पहचान लेता है, बाकी सब सरल हो जाता है। तब उसके हृदय में यह अटूट संकल्प जन्म लेता है कि वह अपने जीवन में कुछ सार्थक कर सकता है और स्वयं को श्रेष्ठ बना सकता है। -लव लाइफ एंड वर्क के अनूदित अंश
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आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें
सफलता उन्हीं को मिलती है, जो भय और संदेह से ऊपर उठकर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते हैं। मनुष्य जैसा सोचता है, धीरे-धीरे वैसा ही बनता जाता है। इसलिए अपने मन में साहस, आशा और श्रेष्ठ लक्ष्य का विचार स्थिर रखें। सकारात्मक दृष्टि और दृढ़ संकल्प से आंतरिक शक्ति आपको निरंतर आगे बढ़ाती रहती है।