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कोरोना और टीकाकरण: इस 'टीके' पर एक ही टिप्पणी याद रखें, दो गज की दूरी, बार-बार साबुन से हाथ धोते रहें..

Mon, 05 Apr 2021 02:50 PM IST
Hari Verma हरि वर्मा
Updated Mon, 05 Apr 2021 02:50 PM IST
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coronavirus vaccination program in india and condition of indian people
वैक्सीनेशन पर सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। - फोटो : अमर उजाला।

मैं इस वक्त नोएडा के सरकारी अस्पताल की लिफ्ट में हूं। पांचवीं मंजिल की ओर। लिफ्ट में हूं सो लिफ्ट वाला गाना गुनगुना रहा हूं.. मुझको भी तो लिफ्ट करा दो। इतने में हमारी लिफ्ट रूकी। मैं पांचवीं मंजिल पर था। लिफ्ट का दरवाजा खुलते ही सामने टीकाकरण वाला कमरा दिखा। कमरे के बाहर बैठी सिस्टर ने रजिस्टर और कंप्यूटर में ऑफलाइन-ऑनलाइन औपचारिकता मेंटेन कीं। इससे पहले जमीनी तल की खिड़की पर आधार व पंजीयन की औपचारिकता पूरी कर ली गई थी। टीकाकरण कमरे के बाहर बैठी सिस्टर ने कमरे में जाने का इशारा किया। अंदर दाखिल हुआ। वहां भी एक सिस्टर। सामने कई सीरिंज। ठंडा-ठंडा कूल-कूल वाला बक्सा भी। उसी बक्से में कोविशील्ड वैक्सीन। अंदर वाली सिस्टर ने पहले मैन्यूअल पर्ची मांगी। फिर आधार देखा। बोला- हरि वर्मा। मैंने कहा- जी।

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कोरोना से डर लगता है, वैक्सीन से नहीं
सिस्टर ने कुर्सी की ओर इशारा किया। बोलीं- आराम से बैठ जाएं। उसी समय सोचा क्यूं न टीके के लिए मैं भी शर्ट उतार कर फोटो खिंचवा लूं। जब सोशल मीडिया पर डालूं तो कम से कम सौ-दो सौ लाइक्स तो मिल जाए। अरे, लाइक से याद आया। मैंने सिस्टर को कैमरा ऑन कर अपना मोबाइल थमाया- एक फोटो प्लीज। सिस्टर का सवाल था- कौन लेगा फोटो। फिर उन्होंने कमरे के बाहर वाली सिस्टर को बुलाया- बोलीं वैक्सीन लेते इनकी फोटो ले लो। मैंने वैक्सीन देने वाली सिस्टर से पूछा- आपकी फोटो साथ आएगी, सोशल मीडिया पर डालना है, आपको कोई आपत्ति, वरना अकेले फोटो खिंचवा लूं। सिस्टर ने कहा- मेरी फोटो ले सकते है, इसमें मुझे कोई आपत्ति नहीं।
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मैंने पूछा- आप कहां से हैं, केरल से, पुडुचेरी से ? उन्होंने कहा- नहीं। फिर मैंने अपना मिथिलांचल वाला खादी का गमछा उनकी मेज पर रख दिया। सिस्टर से लबराया- अच्छा है कि आप केरल-पुडुचेरी की नहीं। और अच्छा यह भी है कि मैंने गमछा हटा दिया वरना पता नहीं विरोधी इसे तिल का तार बना देते। चुनाव आचार संहिता का हवाला देते। शोर मचाते। कितनों को सफाई देता रहता कि सिस्टर केरल-पुडुचेरी की नहीं हैं। गमछा भी असमिया नहीं, मिथिलांचल का खादी वाला है। इनका चुनाव से कोई लेनादेना नहीं है। फिर मैंने सिस्टर की ओर देखकर पूछा, मेरी चमड़ी थोड़ी पतली है, चुभेगी तो नहीं। हां बुद्धि जरूर मोटी है। सिस्टर मुस्कराईं। इसी मु्स्कान व लबर-लबर के बीच सिस्टर ने कब वैक्सीन लगा दी, कब फोटो खींच गई, पता भी नहीं चला। फोटो खींचने वाली दूसरी सिस्टर ने मोबाइल मेरी ओर बढ़ाया। बोलीं- देख लीजिए फोटो ठीक है न।
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वैक्सीन देने वाली सिस्टर ने बांह पर लगी सूई वाली रुई को एक-दो मिनट दबाए रखने को कहा। चेताया- इसे मलना-रगड़ना नहीं है। इतने में उन सिस्टर्स की ड्यूटी वाली चाय भी आ गई। सिस्टर ने एक कुल्हड़ चाय मेरी ओर बढ़ाते हुए कहा-पी लीजिए। मैंने मुस्कराते हुए बोला- जी धन्यवाद। फिर लबराया, थोड़ा बुदबुदाया। वडनगर वाली चाय होती तो पी लेता, असम वाली है, इसलिए नहीं पीता।


 

coronavirus vaccination program in india and condition of indian people
कोरोना से देश में 5 अप्रैल तक 1 लाख 65 हजार 101 लोगों की जान जा चुकी है। - फोटो : अमर उजाला

सिस्टर का वादा याद रखा जाएगा
कोरोना से देश में 5 अप्रैल तक 1 लाख 65 हजार 101 लोगों की जान जा चुकी है। क्या इतने बलिदान हम व्यर्थ जाने देंगे। क्या हम यूं ही लापरवाह रहेंगे। ऐसे में सिस्टर की वह बात याद आती है, जो टीका लगाने के बाद उन्होंने मुझे विदा करते हुए कही। मैंने कहा- थैंक यू सिस्टर। आपने रक्षा सूत्र (रक्षा कवच वाला वैक्सीन) बांध दिया है, अब इस भाई का बाल बांका नहीं होगा।

सिस्टर ने मुझसे कहा- भैया, यह तो ठीक है लेकिन रक्षा सूत्र के बदले मुझसे वादा करें कि साथ-साथ मास्क, दो गज की दूरी, बार-बार साबुन से हाथ धोना याद रखेंगे। यानी दवाई भी कड़ाई भी। क्या हम मिलकर संकल्प ले सकते हैं कि जब हम आजादी की 75 वीं वर्षगांठ मनाएं तो भारत पूरी तरह से कोरोना मुक्त हो। तब हम पूरी तरह से जंग जीत चुके हों। यह तभी संभव है जब जैसे-जैसे पात्रता आती जाए, हरेक स्वेच्छा से टीका लगवाता जाए। दवाई के साथ-साथ कड़ाई (मास्क, दो गज की दूरी, बार-बार हाथ धोना) का मंत्र याद रखे। दरअसल, वैक्सीन आने के बाद लोगों में लापरवाही काफी बढ़ी है। अब दवाई के बाद कड़ाई नहीं, ढिलाई बढ़ती जा रही है।


काम की बातें, इसे दिमाग में जरूर रखना
पहले से पंजीयन कराकर ही टीका कराने पहुंचे, आधार या एक पहचान साथ रखें -पंजीयन नहीं करा पाए हैं तो आधार या एक पहचान की मूल व फोटो कॉपी लेकर जाएं, जिसमें जन्मतिथि हो -पुरुषों के लिएः हो सके तो हाफ बाजू की ढीली शर्ट पहन कर टीका लगवाने जाएं -सौ से ज्यादा लाइक्स चाहते हैं तो पूरी बाजू वाली शर्ट पहन कर जा सकते हैं।

महिलाओं के लिए स्लीवलेेस से आसानी होगी -फोटो जरूर खिंचवाएं, हो सके तो उसे टीकाकरण के 72 वर्किंग घंटे बाद सोशल मीडिया पर डालें -टीका लगवाते 56 इंच का सीना हो जाएगा, लेकिन मास्क, सामाजिक दूरी, बार-बार हाथ धोना बेहद जरूरी -यदि आपने पहली डोज ले रखी है और फोटो नहीं खिंचवा पाए तो सर्टिफिकेट डाउनलोड कर लें -आरोग्य सेतु एप के ऊपर बने कोविन पर सर्टिफिकेट डाउनलोड करने का विकल्प है -उमंग डिजिलॉकर एप के जरिये भी सर्टिफिकेट डाउनलोड कर सकते हैं -सर्टिफिकेट यात्रा के दौरान, आंशिक लॉकडाउन सख्ती व कुंभ जैसे आयोजनों के लिए उपयोगी साबित हो सकता!

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।



 

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