कोरोना संग जीना है: संक्रमित लोगों की सेहत में तेजी से हो रहा सुधार, आधों ने पेश की मिसाल, शेष हराने को तैयार
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कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप के मध्य गत् रविवार एक सुखद खबर आई। जब देशवासियों को ज्ञात हुआ कि भारत में इस वैश्विक प्रकोप से स्वस्थ होने वाले मरीजों की दर अब बढ़ कर 50 फीसदी से भी अधिक हो चुकी है।
इस शुभ समाचार को सुनकर देश के उन हजारों कोरोना मरीजों को जीवनदायक ऊर्जा हासिल हुई, जो इन दिनों जिंदगी व मौत की जंग में पराजित होने की कगार पर खड़े थे तथा अपने आप को असहाय से महसूस कर रहे थे।
अब उनके परिवारजनों को भी मानसिक संतुष्टि नसीब हुई है, जो अब तक कोविड-19 को असाध्य व काल का गाल मान रहे थे। अब आमजन भी यह समझने लगा है कि महामारी से पार पाना उतना जटिल नहीं जितना मुश्किल लोगों की भ्रांतियों से छुटकारा पाना है।
आज इस 50 फीसदी रूपी टॉनिक के प्रभाव से कोरोना मरीजों के स्वास्थ्य में वह सुधार हो रहा है जिसकी प्रतिक्षा देशवासी विगत तीन माह से लगातार कर रहे थे। भारत के प्रमुख संक्रमित राज्यों में सर्वाधिक कोरोना मरीजों का रिकवरी रेट राजस्थान में दर्ज किया जा रहा है।
जहां अब तक इस भयानक महामारी से 75 फीसदी मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। जबकि मध्यप्रदेश में अब तक 69 फीसदी, गुजरात में 68 फीसदी तथा तमिलनाडु में 54 फीसदी बीमार व्यक्ति स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं।
हालांकि, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में स्थिति अभी भी नाजुक बनी है परंतु महाराष्ट्र में स्थिति में सुधार होना शुरू हो गया है। राज्य में अब तक 47 फीसदी से अधिक मरीज हत्यारे कोरोना को परास्त करके सामान्य जीवन जीने लगे हैं।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उडीसा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड इत्यादि राज्यों में भी कोरोना मरीजों की संख्या काफी नियंत्रण में है।
देश के कुछ चुनिंदा शहर ऐसे भी हैं जहां मामले अभी भी चिंताजनक बने हुए हैं। बावजूद इसके भारत में वैश्विक महामारी का प्रकोप दुनिया के नामी मुल्कों की अपेक्षा कम है। विश्व में कोरोना संक्रमण से अब तक 77 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हो चुकें है तथा 04 लाख 30 हजार से अधिक मरीज आकाल ही काल के गाल में समाने को मजबूर हुए हैं।
जानलेवा विषाणु के हत्यारे प्रकोप से अमेरिका सर्वाधिक प्रभावित हुआ है। वहीं ब्राजील और रूस की कोरोना क्षति को भी कमतर आंकना नाइंसाफी हो सकती है। एक सच्चाई यह भी है कि 35 करोड़ की आबादी वाले अमेरिका में कोविड-19 के दंश से लगभग 01 लाख 15 हजार अभागे बेमौत मौत का शिकार हो चुके हैं।
जबकि 130 करोड़ की जनसंख्या वाले भारत में इस हत्यारे वायरस से अब तक 10 हजार से भी कम मरीजों की मृत्यु हुई है। जो दर्शाता है कि देश कोरोना के कहर को निष्क्रिय करने में कितना कामयाब हुआ है।
वैश्विक महामारी के इस भयावह संकट में भारत की अमेरिका, रूस, ब्राजील इटली इत्यादि से तुलना जायज नही है। क्योंकि हमारे संसाधनों और उन्नत राष्ट्रों के संसाधनों में भारी अंतर है। वजह चाहे जो भी हो पर इतना सुनिश्चित है कि देशवासियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता दुनिया के विकसित कहलाए जाने वाले मुल्कों से काफी बेहतर है।
हमारा रहन सहन, चाल चलन, खान पान और वेश भूषा दुनिया के उन्नत राष्ट्रों से भिन्न व समृद्ध है। ग्रामीणों की तपती दुपहरी में काम करने की आदत, सुबह जल्दी जागने व रात को जल्दी सोने की रूटीन हमें प्रसिद्ध राष्ट्रों से पृथक बनातीं है।
जिन प्रमुख आदतों का जिक्र सरकारों के लिए अब तक नगण्य सा प्रतीत होता था आज उन्ही रूटीन आदतों की वजह से भारत दुनिया में बेहतरीन स्थिति में है। फलस्वरूप देश में कोरोना मरीजों के मरने की दर दूसरे मुल्कों से कहीं बेहतर है।
देश के कई राज्यों, जिलों और उपमंडलों में रोजमर्रा की गतिविधियां तेजी से बढ़ रही है। हालांकि महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, हरियाणा आदि राज्यों में स्थिति असहज आवश्य है पर देशवासियों को पूर्ण विश्वास है कि बहुत जल्द हम इन विशेष राज्यों में भी हालातों को सामान्य बना देंगे।
तथ्य यह भी है कि देश में चेन्नई, आर्थिक राजधानी मुम्बई और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में संक्रमण के मामले बड़ी तेजी से बढ़ रहें हैं।
इन प्रमुख शहरों में कोरोना मरीजों की संख्या तेजी से दुगुनी हो रही है। देश के कुल संक्रमित मरीजों में इन शहरों का एक बड़ा हिस्सा है।
महानगरों में वायरस के फैलाव की प्रमुख वजह शहरों का बेतहाशा जनसंख्या घनत्व है। कामकाजी लोगों का प्रति दिन घर से बाहर निकलना, शहरवासियों का आपसी मेल-मिलाप आमजन के लिए घातक साबित हो रहा है। इसके विपरीत देश के जिन राज्यों में ग्रामीण जनसंख्या का हिस्सा अधिक है वहां संक्रमण का प्रकोप भी कम है।
शहरी लोगों को संक्रमित व्यक्ति की पहचान करने में मुश्किल होती है, जबकि ग्रामीण आसपास के गांव के सभी लोगों को अच्छे से पहचानता है। जिससे गांवों में संक्रमित व्यक्ति की शिनाख्त आसानी से हो जाती है।
फलस्वरूप शहरों में कोविड-19 का फैलाव गांवों की अपेक्षा कहीं अधिक हो रहा है। इसके अलावा शहरों में संक्रमण के हत्यारे दुस्साहस का असर ज्यादा इसलिए भी है क्योंकि यहां विदेशों से भी भारी संख्या में देशवासियों की घर वापसी हुई है।
कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि भारत में कोरोना महामारी का खतरा अब काफी नियंत्रण में है। देश में स्थिति को सामान्य बनाने के लिए राज्य सरकारें जो प्रयास कर रहीं हैं उनका असर अब प्रत्यक्ष दिखाई दे रहा है।
राज्य की अधिकतर सरकारों ने इन दिनों अपने 100 फीसदी कर्मचारियों के साथ कामकाज करना शुरू कर दिया है।
राज्यवासी आज कल शासकीय निर्देशों के अनुरूप अपनी दिनचर्या में बदलाव कर रहे हैं तथा कोरोना को सहजता से परास्त करने में महारत हासिल कर रहे हैं।
यदि स्थिति इसी तरह नियंत्रित होती रही तो आगामी दो तीन माह के अंदर हम देश के अंदर समस्त गतिविधियां सुचारू रूप से चला सकते हैं तथा देश इस भयावह वायरस को भगाने में कामयाब हो जाएगा।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।