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कोरोना का प्रकोपः गिरने नहीं दें अपने साथियों का मनोबल, बेहतर रिजल्ट पाएं

Fri, 01 May 2020 12:16 PM IST
Arjun Nirala एन. अर्जुन
Updated Fri, 01 May 2020 12:16 PM IST
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corona virus covid 19 lockdown work from home boost up employee by this simple steps
अपने साथियों का मनोबल गिरने नहीं दें

आधी दुनिया इस समय कोरोना के प्रकोप के कारण लॉकडाउन में है। गली-मोहल्ले, सड़के सुनी हैं और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में सन्नाटा पसरा हुआ है। जहां कल तक हर ओर चहल-पहल थी, रौनक थी और जीवन था, देखते ही देखते, वहां ताले लटक गए। मजबूर हैं लोग घरों में ही दुबके रहने को। बदल रहा है जीवन पल-पल। कुछ समय पहले तक जो काम ऑफिसों में होते थे, वह स्थान बदलकर अब घर का एक कमरा हो गया है। स्थिति अब यहां तक पहुंच गई है कि क्या बड़ी और क्या छोटी कंपनियां हर कोई संघर्ष कर रही हैं।

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ऐसी स्थिति में वही लीडर बाजी जीतेगा, वही कोरोना को हराकर अपनी कंपनी और संस्थान को आगे ले जाने में कामयाब होगा, जो हर दम अपने साथियों का मनोबल ऊंचा और ऊंचा बनाए रखने में कामयाब होगा।
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वही बेहतर रिजल्ट दे पाएगा, जो अपने साथियों की मनोदशा को समझकर फैसले लेगा और किसी भी हाल में अपने साथियों का मनोबल गिरने नहीं देगा, डिगने नहीं देगा। तो आइए, जानते हैं उन तरीकों के बारे में जिन पर चल कर बेहतर रिजल्ट पाया जा सकता है...

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अपने साथियों की काम करने इच्छाशक्ति को कभी मरने नहीं दें...

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कामयाब होना है तो सबसे जरूरी है इच्छाशक्ति - फोटो : सोशल मीडिया
  • इच्छाशक्ति को मरने नहीं दें

चाहे लॉक डाउन का समय हो या कोई अन्य। अगर कामयाब होना है तो सबसे जरूरी है इच्छाशक्ति। किसी काम को जब्जे से करने की इच्छा और उसमें सफल होने की चाहत।

मार्टिन मीडोज ने अपनी किताब ‘आत्म अनुशासन कैसे बनाएं’ में लिखा है कई लेखक जैसे कैली मेकगोनिगल और रॉय बॉईमेस्टर अपनी पुस्तकों में इच्छाशक्ति की एक सीमित स्त्रोत के रूप में व्याख्या करते हैं, जिसका सही प्रबंधन किए जाने की जरूरत है। उनकी शोध मुख्यतः माईमेस्टर की रिसर्च पर आधारित है, काफी मनोरंजक है-हमारी इच्छाशक्ति एक मांसपेशी की तरह काम करती है और हम इसे मजबूत भी बना सकते हैं और थका भी सकते हैं।

उनका यह मॉडल हमको बताता है कि हमारी इच्छाशकित हमारे खून में मौजूद शर्करा के स्तर पर निर्भर करती है। जब शर्करा का स्तर गिरता है तो उसके साथ ही हमारा खुद पर नियंत्रण भी कमजोर हो जाता है।

दूसरे शब्दों में भूखे लोगों में गलत निर्णय लेने की संभावना काफी अधिक होती है। अतः सबसे पहली प्राथिकता है कि लीडर अपने साथियों की काम करने इच्छाशक्ति को कभी मरने नहीं दें।
 

लीडर को समझना होगा कि वह खुद भी किन परिस्थितियों से गुजर रहा है...

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घरों की चार दीवारी के अंदर रहकर लगातार काम करना बहुत मुश्किल है। - फोटो : फाइल फोटो
  • साथियों की मनोदशा को समझें

पिछले काफी समय से लॉकडाउन चल रहा है। लॉक डाउन एक मनः स्थिति है। मन पल-पल बदलता है। मानव मन का स्वभाव है कि कुछ समय तक जो छुट्टी अच्छी लगती है वही समय बीतने के साथ हमारे लिए घातक सिद्ध होने लगती है।

लगातार एक जगह बैठने से मन उचटने लगता है। इसलिए टीम लीडर को अपने साथियों की मानसिक स्थिति और मनोदशा को समझना होगा। उसके हिसाब से उनसे बातचीत करें। उनको बताएं कि अपनी इच्छा शक्ति को मजबूत करें, उसके तरीके बताएं।

लीडर को समझना होगा कि वह खुद भी किन परिस्थितियों से गुजर रहा है। अतः दूसरों की स्थिति को समझने के लिए उनके पास धैर्य होना चाहिए।

  • तारीफ करने में कंजूसी कैसी

घरों की चार दीवारी के अंदर रहकर लगातार काम करना बहुत मुश्किल है। कइयों के घर परिवार बड़ा होगा। किसी-किसी के घर में ऐसा माहौल नहीं होगा कि वह लीडर के मुताबिक काम कर सके।

कइयों के घर वाले कम पढ़े-लिखे होते हैं, वे इस बात को समझ नहीं पाते। भारत के संदर्भ में देखें तो ऐसे मामले ज्यादा होंगे। दूसरी तरफ लॉकडाउन के कारण काम भी कम ही हो पा रहा है।

अतः ऐसे समय में साथी जितना काम कर पाए, उसकी तारीफ कर, उसका उत्सावर्धन करें। उसके उतने किए काम के लिए उसका हौसला बढ़ाएं। क्योंकि वस्तुस्थिति से तो लीडर भी जानकार है। तारीफ सुनकर निश्चित ही वह अगली बार और उत्साह से काम करेगा।
 

लीडर को समझना होगा कि यह समय बहुत ही क्रूशियल है...

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साथियों के साथ रोजाना बातचीत करें। - फोटो : Amar Ujala
  • बातचीत का सिलसिला जारी रखें
लीडर को समझना होगा कि यह समय बहुत ही क्रूशियल है। हर कोई मानसिक दवाब में काम कर रहा है। इस समय चौतरफा दवाब हर किसी पर है। कोशिश करें कि अपने साथियों के साथ रोजाना बातचीत करें।

बातचीत की शुरुआत उनकी सेहत और फिर घर परिवार से होते हुए काम तक आए, तो बेहतर होगा। सेहत के बार में पूछना नहीं भूलें। उसके बाद बिजनेस की बातचीत करें। साथ ही बातचीत में उनके काम और फिर उसके आगे की बात करें।

बातचीत करने का सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि एक तो रोजना के काम के बारे में पता चलेगा और दूसरी तरफ साथियों के मन में एक तरह का आत्म विश्वास भी आता है, कि उनके लीडर उनके साथ  हैं।
  • नए-नए तरीके बताएं
लीडर का काम होता है कि वह किसी काम का नुक्श नहीं निकालें बल्कि साथियों को बताएं कि यह काम अगर ऐसे नहीं हो रहा है तो ऐसे करें। उनको नए-नए तरीके बताएं और करने के लिए प्रोत्साहित करें।

उनको लगातार देश और दुनिया में क्या हो रहा है, उनकी जानकारी दें और उनको भी इस तरह की चीजों को देखने के लिए प्रोत्साहित करें। तरीकों में बदलाव की स्वतंत्रता दें। यह तभी हो पाएगा जब आप लगातार उनसे बातचीत करेंगे। साथियों को इतनी स्वतंत्रता दें कि वे नए प्रयोग कर सकें।


 

यह घबराने का समय नहीं यह मिल-जुल कर एक-दूसरे से कंधा से कंधा मिलाकर काम करने का समय है...

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अपने साथियों के सहयोग के लिए सदैव तत्पर रहें
  • सहयोग के लिए तत्पर रहे
कई बार देखने में आता है कि साथियों को लगता है कि उनका लीडर केवल बातें ही करता है, जबकि मौका आने पर वह साथ नहीं देता या सहयोग नहीं करता। यह लॉकडाउन का समय है।

इस समय खास तौर पर लीडर को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उनके साथी किसी भी बात से, किसी भी तरह से आपसे यह महसूस नहीं करें कि आप उनका सहयोग नहीं कर रहे। उनको इस समय सबसे ज्यादा आपकी जरूरत है, आपके सहयोग की जरूरत है।

असली नाविक की पहचान तो तूफान में ही होती है। इसलिए अपने साथियों के सहयोग के लिए सदैव तत्पर रहें। ताकि वे भी आपका पूरा सहयोग करेंगे। एक-एक बूंद से ही सागर बनता है। तभी यह कहावत चरितार्थ होगा।

यह लॉक डाउन का तूफान है। लाखों-लाखों लोग इसकी चपेट में आए हुए हैं। लोग घरों में बंद हैं और घरों से ही अपने जीवन की नैया पार लगाने की कोशिश में लगे हैं। ऐसे में लीडर को सकारात्मकता का पतवार अपने हाथों में लेकर टीम का नेतृत्व करना होगा।

यह घबराने का समय नहीं यह मिल-जुल कर एक-दूसरे से कंधा से कंधा मिलाकर काम करने का समय है। अगर ऐसा करने में लीडर कामयाब हो गए, तो समझ लीजिए वे बाजी तो मार ही लेंगे साथ ही हर घर में खुशी होगी, हर घर में रोशनी होगी, हर घर में आनंद होगा। बिना परेशानी के कोरोना से पार पा लेंगे।
 
 डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
 
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