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जलवायु परिवर्तन की चुनौतियां और भारतीय खेती: आखिर मौसम पूर्वानुमान का कृषि उत्पादन में कितना और कैसा योगदान?

Dr Laxman Singh Rathore डॉ लक्ष्मण सिंह राठौड़
Updated Sat, 11 Jan 2025 06:22 PM IST
सार

भारत मौसम विज्ञान विभाग, कृषि मंत्रालय एवं कृषि विश्व-विधालयों से मिलकर कृषि समुदायों को मौसम के साथ-साथ संबंधित सेवाएं प्रदान करती है। विगत दशक में मौसम पूर्वानुमान की गुणवत्ता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, जिससे किसानों की क्षमताओं को बढ़ाने, स्थायी और आर्थिक रूप से व्यवहार्य कृषि प्रणालियों के विकास में मौसम सूचना की महत्ती भूमिका रहती है।

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Contribution of weather forecast in agricultural production agriculture challenges in india
कृषि सुधार - फोटो : Freepik.com

विस्तार

खेती-किसानी मौसम और जलवायु के प्रति बहुत संवेदनशील है। यह भूमि, जल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों पर भी बहुत अधिक निर्भर करती है, जो जलवायु द्वारा प्रभावित होते हैं। ऐसे में मौसम आधारित कृषि-कार्य करने की सलाह, किसानों को बुवाई और कटाई का उचित समय तय करने, पानी और उर्वरक प्रबंधन, कीट और रोग नियंत्रण, एवं अन्य कृषि कार्यों पर मौसम अनुरूप निर्णय लेने में मदद करती हैं।

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इन सलाहकार सेवाओं का आधार अल्प, मध्यम एवं दीर्घ अवधि का मौसम पूर्वानुमान होता है, जिनके साथ जब फसल की स्थितियों की जानकारी संयुक्त होती है, तो कृषि खाद्य प्रणाली में किसानों को व्यावहारिक कृषि सलाह देने में मददगार होती है।
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भारत मौसम विज्ञान विभाग, कृषि मंत्रालय एवं कृषि विश्व-विधालयों से मिलकर कृषि समुदायों को मौसम के साथ-साथ संबंधित सेवाएं प्रदान करती है। विगत दशक में मौसम पूर्वानुमान की गुणवत्ता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, जिससे किसानों की क्षमताओं को बढ़ाने, स्थायी और आर्थिक रूप से व्यवहार्य कृषि प्रणालियों के विकास में मौसम सूचना की महत्ती भूमिका रहती है।
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विकसित भारत 2047 पहल, साल 2047 में अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी तक भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में परिकल्पित करती है। यह परिवर्तनकारी रोडमैप, समावेशी विकास, सतत-प्रगति और प्रभावी शासन पर जोर देता है। कृषि उत्पादकता और लचीलापन बढ़ाना विकास भारत 2047 को प्राप्त करने हेतु निर्धारित रणनीति के अनुरूप पर्याप्त अवसर पैदा करने के लिए शीर्ष नौ प्राथमिकताओं में से एक है। इन लक्ष्यों को किसानों, विशेष रूप से सीमांत और छोटे किसानों की सक्रिय भागीदारी के बिना प्राप्त नहीं किया जा सकता है, क्योंकि वे पौष्टिक भोजन की उपलब्धता में सुधार के प्रमुख चालकों में से एक हैं।

विकसित भारत के लिए लक्ष्य

विकसित भारत के विभिन्न पहलुओं में आर्थिक विकास, पर्यावरणीय स्थिरता, सामाजिक प्रगति और सुशासन जैसे विकास के विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है, जो सभी मौसम संवेदी हैं, ताकि 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाया जा सके। इसके लिए, अभी तक पहुंच से वंचित छोटे और सीमांत किसानों को लक्षित करते हुए देश में कृषि मौसम विज्ञान सेवा को मजबूत करने की आवश्यकता है। साथ ही इसे खाध्य प्रसंस्करण प्रणालियों, कृषि उपज मंडियों तथा कृषि विपणन प्रणालियों से जोड़ने पर भी विशेष बाल देना होगा। 

लघु और सीमांत जोत देश में कुल धारिता का लगभग 86% है। कृषि की व्यवहार्यता को बढ़ाए बिना और छोटे और सीमांत किसानों की आय में वृद्धि किए बिना विकसित भारत का विचार हासिल नहीं किया जा सकता है। निरंतर उत्पादकता और बाजार के दबावों का सामना करते हुए, भारत में कृषि को अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता और नवाचार क्षमता बढ़ाने के लिए नए उपकरणों की आवश्यकता है।

बड़ी संख्या में छोटे और सीमांत किसानों और कृषि क्षेत्र के विशाल विस्तार को ध्यान में रखते हुए, कृषि आर्थिक विकास में सुधार के लिए किसानों के इस वर्ग को सरकारी एजेंसियों से समर्थन देश के आर्थिक विकास को मजबूत करेगा। साथ ही, उन्हें अपने हितों की रक्षा करने के लिए मौजूदा विनियामक ढांचे को संशोधित करने में महत्वपूर्ण हितधारक बनाना होगा, जिससे वे कृषि नवाचार को बढ़ावा देने के लिए नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने में सक्षम हो सकें जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके।

Contribution of weather forecast in agricultural production agriculture challenges in india
कृषि सुधार - फोटो : Freepik.com

जलवायु परिवर्तन और इससे संबंधित चुनौतियां

किसानों के लिए जलवायु परिवर्तन एक बड़ी चुनौती रही है क्योंकि यह उनकी उत्पादन क्षमता, खाद्य सुरक्षा और आजीविका को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। जलवायु परिवर्तन से किसानों की जीवन स्थितियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। उन्हें फसल की विफलता और पशुधन के नुकसान के तत्काल जोखिम का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन और शमन रणनीतियों के लिए किसानों की क्षमता कमजोर है।

छोटे और सीमांत किसान बड़े किसानों की तुलना में भूजल पर अधिक निर्भर करते हैं जो तेजी से घट रहा है। इसलिए उन्हें भविष्य में पानी के संबंध में और अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। अतः किसानों के लिए मौसम आधारित जल प्रबंधन महत्वपूर्ण है। सतही सिंचाई प्रणालियों में मौसम आधारित प्रबंधन करने की नितांत आवश्यकता है। एकीकृत कीट प्रबंधन जिसमें विभिन्न कीटों एवं रोगों की मौसम आधारित रोक-थाम के लिए भी किसानों की क्षमता को मजबूत करने की आवश्यकता है।
 

कृषि मौसम विज्ञान सेवाओं की पहुंच को मजबूत करना जरूरी

किसानों के सामने आने वाले कई मुद्दों और चुनौतियों के बीच, उपयुक्त कृषि मौसम विज्ञान सेवाओं तक खराब पहुंच एक बड़ी बाधा है।  इस कारण खेती के तरीकों में उपयुक्त मौसम संवेदनशील निर्णय जैसे कि बुवाई, निराई-गुड़ाई, इनपुट प्रबंधन, प्रौद्योगिकी उपयोग, भूमि और जल प्रबंधन इत्यादि प्रभावित होते हैं। 

उपयुक्त कृषि मौसम सलाह सेवा प्रदान करने हेतु 'अंतिम मील' बाधा को संबोधित करने की आवश्यकता है क्योंकि सेवा का लाभ इस बात पर निर्भर करता है कि कितने किसानों तक यह सूचना पहुंचती है। एक शोध के अनुसार सूचना के 24%, 50% और 100% किसानों तक पहुंचने पर राष्ट्र के किसानों द्वारा अर्जित आर्थिक लाभ क्रमशः 44,321, 92,335 तथा 1,84,671 करोड़ रुपये होगा। कृषि मौसम सलाह सेवाएं, आंकड़ों की उपलब्धता और गुणवत्ता और उनका विश्लेषण करने वाले सूचना उत्पादकों की क्षमता से प्रेरित होती हैं।

चूंकि यह सलाह कृषक समुदायों की आजीविका पर सकारात्मक प्रभाव डालती है और खाद्य सुरक्षा में सुधार करती है, इसकी सूचना को उचित संदर्भ और स्थान विशिष्ट जानकारी सहित अंतिम उपयोगकर्ता किसानों तक उचित समय पर एवं सही भाषा में पहुंचानी आवश्यक है। इसके लिए सूचना-प्रसारण प्रोधोगिकी माध्यमों जैसे की रेडियो, टेलिविज़न, मुद्रण सामग्री, नवीनतम मोबाइल प्रौद्योगिकियों एवं सामाजिक मीडिया की सहायता ली जाती है।

सीमांत व मझोले किसानों और सबसे अधिक हाशिए वाले समुदायों तक पहुंचना बहुत बड़ी चुनौती है। यदि कार्रवाई योग्य जानकारी को उपयोगकर्ताओं तक न्यायसंगत और प्रभावी तरीके से संप्रेषित किया जाना है, तो यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि कोई भी पीछे न छूटे। खाद्य एवं कृषि संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार जलवायु सेवाओं पर अंतिम मील की पहुंच के लिए इन सेवाओं के निवेश में महत्वपूर्ण अंतर है। यह दुर्भाग्य की बात है। 


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नोट- लेखक मौसम विज्ञान विभाग के पूर्व महा-निदेशक हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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