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आखिर कब मिलेगी दूषित पेयजल की समस्या से मुक्ति?

Tue, 17 Dec 2019 06:52 PM IST
Devendra Suthar देवेंद्र सुथार
Updated Tue, 17 Dec 2019 06:52 PM IST
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contaminated water problem in india water pollution facts
भारत में प्रतिवर्ष कम से कम 1,25,000 लोगों की मृत्यु जल-जनित रोगों के कारण होती है। - फोटो : अमर उजाला

देश के ज्यादातर हिस्सों में जमीन के भीतर का पानी गंदा और जहरीला हो चुका है। भू-जल में फ्लोराइड, आर्सेनिक, लौह व नाइट्रेट जैसे तत्वों, लवणों और भारी धातुओं की मात्रा इस कदर बढ़ चुकी है कि ऐसा पानी पीने वाले गंभीर बीमारियों के शिकार होते जा रहे हैं। इससे त्वचा संबंधी रोग, हड्डियां कमजोर पड़ना, कैंसर, हैजा, टाइफाइड, डायरिया व गठिया जैसे रोग दस्तक दे रहे हैं।

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भारत की 67 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और 7 प्रतिशत ग्रामीण आबादी तक स्वच्छ पानी की पहुंच नहीें है। भारत के अधिकांश ग्रामीण गरीब मौसम की घटनाओं और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं।
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भारत में प्रतिवर्ष कम से कम 1,25,000 लोगों की मृत्यु जल-जनित रोगों के कारण होती है। विडंबना है कि देश में हर साल 3 प्रतिशत आबादी बीमारियों पर होने वाले खर्च के कारण गरीबी रेखा के नीचे चली जाती है। 
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संसद में जल शक्ति मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, 27 नवंबर, 2019 तक स्थिति यह है कि देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 3.22 प्रतिशत ग्रामीण बस्तियों और ग्रामीण आबादी के कुल 3.73 प्रतिशत लोग कम गुणवत्ता के पानी का प्रयोग कर रहे हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि आयरन पानी में पाया जाने वाला प्रमुख संदूषक है, जिससे 18,000 से अधिक ग्रामीण बस्तियां प्रभावित हैं। इसके बाद खारापन (लवणता) है, जिससे लगभग 13,000 ग्रामीण बस्तियां के लोग प्रभावित हैं। वहीं, आर्सेनिक (12,000 बस्तियां), फ्लोराइड (लगभग 8000 बस्तियां) और अन्य भारी धातुओं से भी कई ग्रामीण बस्तियों के लोग प्रभावित हैं।
 

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स्वच्छ पेयजल किसी भी लोकतांत्रिक देश में नागरिकों का बुनियाद अधिकार होता है। - फोटो : PTI

रिपोर्ट में बताया गया है कि राजस्थान में सबसे ज्यादा ग्रामीण बस्तियां इससे प्रभावित हैं। यहां 16,833 बस्तियों के लोग खराब पानी पीने को मजबूर हैं। इनमें से अधिकांश (12,182) बस्तियां खारे पानी से प्रभावित हैं।

वहीं, आर्सेनिक और लौह प्रदूषक के मामले में बंगाल और असम सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। भारत में कुल 30,000 ग्रामीण बस्तियां आर्सेनिक और लौह प्रदूषण से प्रभावित हैं, जिसमें से 20,000 बस्तियां केवल असम और बंगाल में हैं।

बंगाल में आर्सेनिक से प्रभावित बस्तियां (6,207) सबसे ज्यादा हैं। इसके बाद असम (4,125), बिहार (804), पंजाब (651) और उत्तर प्रदेश (650) हैं।

लौह प्रदूषक से असम में सबसे ज्यादा बस्तियां (5,113) हैं। इसके बाद बंगाल (5,082), त्रिपुरा (2,377), बिहार (2,299) और ओडिशा (2,377) का नंबर आता है।

स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छ पेयजल बेहद जरूरी है। और स्वच्छ पेयजल किसी भी लोकतांत्रिक देश में नागरिकों का बुनियाद अधिकार होता है। लेकिन भारत के ग्रामीण इलाकों की अधिकांश आबादी अभी भी स्वच्छ पेयजल के लिए मोहताज है।

जल शक्ति मंत्रालय की एक रिपोर्ट में पाया गया है कि भारत में अभी भी 55,511 ग्रामीण बस्तियां के पेयजल में आयरन, आर्सेनिक आदि संदूषक बहुत मात्र में मौजूद हैं। सवाल है कि क्या गरीबों को पीने का साफ पानी कभी नसीब हो पाएगा या नहीं?

जनता को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की सरकार की क्या कोई जिम्मेदारी नहीं है? कहने को पेयजल के मसले पर कितनी योजनाएं और परियोजनाएं बनीं, लेकिन दूषित पेयजल से मुक्ति नहीं मिली।

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केवल हैंडपंप लगा देना काफी नहीं है, पानी पीने लायक भी हो, यह सुनिश्चित करना भी सरकारों की जिम्मेदारी है। - फोटो : फाइल फोटो

ये इस बात का प्रमाण है कि इन योजनाओं पर ठोस तरीके से अमल नहीं हुआ। भू-जल दूषित होने का सबसे बड़ा कारण कारखानों और फैक्ट्रियों से निकलने वाले जहरीले अपशिष्टों का जमीन के भीतर रिसाव है।

समय-समय पर सर्वोच्च अदालत ने इन औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्टों के बहाव पर रोक लगाने के लिए राज्यों को सख्त निर्देश भी दे रखे हैं, लेकिन कुछ को छोड़ दें तो ज्यादातर जगहों पर ये बेअसर ही साबित हुए हैं। ग्रामीण इलाकों में संकट ज्यादा गंभीर है।

केवल हैंडपंप लगा देना काफी नहीं है, पानी पीने लायक भी हो, यह सुनिश्चित करना भी सरकारों की जिम्मेदारी है। हालांकि, केंद्र सरकार राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना के तहत राज्य सरकारों को पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए तकनीकी और आर्थिक मदद मुहैया करा रही है। लेकिन ये काम बहुत ही मंथर गति से हो रहे हैं, जबकि समस्या काफी तेजी से अपने पांव पसार रही है। 

आवश्यकता है सरकार प्रभावित इलाकों में तत्काल पेयजल के रूप में दूषित पानी का प्रयोग रोककर वैकल्पिक स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराते हुए इन इलाकों में पानी को माइक्रो ट्रीटमेंट तकनीक से साफ करें। साथ ही भूजल को दूषित कर रही औद्योगिक इकाइयों को तत्काल बंद करने के उच्चतम न्यायालय के आदेश का पालन भी सुनिश्चित करें।

 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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