फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   comrade atul lagu passed away in madhya pradesh indore due to cancer

अतुल लागू स्मृति शेषः उनकी बेटी बोल रही हूं। आप मिलने आएंगे पापा को लास्ट स्टेज का कैंसर बताया है

Sat, 27 Jul 2019 05:52 PM IST
सारंग उपाध्याय कीर्ति राणा
कीर्ति राणा Published by: सारंग उपाध्याय Updated Sat, 27 Jul 2019 05:52 PM IST
विज्ञापन
comrade atul lagu passed away in madhya pradesh indore due to cancer
कॉमरेड अतुल लागू को गॉल ब्लैडर का कैंसर था। - फोटो : Social Media

मोबाइल की घंटी बजी। स्क्रीन पर अतुल लागू नाम चमक रहा था। हां बोलो-कॉमरेड। दूसरी तरफ से महिला स्वर में जवाब मिला मैं उनकी बेटी बोल रही हूं। आप को जानकारी देने के लिए कॉल किया है कि पापा की हालत ठीक नहीं है। डॉक्टर ने लॉस्ट स्टेज का कैंसर डिक्लियर किया है। आप आएंगे क्या मिलने, पापा को अच्छा लगेगा।

विज्ञापन


यह सुनकर धक्क सा रह गया। ज्यादा कुछ पूछने की अपेक्षा कहा- हां जरूर, कल ही आता हूं। सिलिकॉन सिटी पहुंचकर फोन लगाया। लोकेशन तलाशते घर पहुंचा। एक चादर ओढ़े, पलंग पर गठरी की तरह सिमटे अतुल लागू की दुबली-पतली देह देखकर एक पल को विश्वास नहीं हुआ कि यह वही हंसी-ठिठोली करने और गीत-संगीत कार्यक्रमों में  गेट पर ही नजर आने वाला अपना मित्र है।
विज्ञापन


इंदौर के श्रमिक आंदोलन में सांसद कॉमरेड होमीदाजी के दांए हाथ माने जाने वाले अनंत लागू के पुत्र अतुल लागू को शहर प्रगति पुस्तक भंडार के संचालक के रूप में भी पहचानता है। जब तक पुस्तक की दुकान थी, हर साल गांधी हॉल में पुस्तक प्रदर्शनी साहित्य प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र रहती थी। चिकमंगलूर चौराहे पर कांग्रेस नेता छोटू शुक्ला के ऑफिस के ठीक पीछे उनकी पुस्तक की यह दुकान रात आठ बजे बाद मित्रों की महफिल में तब्दील हो जाती थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


वर्षों पहले पुस्तकों का कारोबार समेटने के बाद भी अतुल लागू की सक्रियता में कोई कमी नहीं आई। अभ्यास मंडल के साथ ही शहर में सांस्कृतिक-संगीत समारोह आयोजित करने वाली संस्थाओं के वे अघोषित मार्गदर्शक-सलाहकार हो गए।

वे बिस्तर पर करवट लिए लेटे हुए थे। बेटा उदय बता रहा था, बस एक करवट ही लेटे रहते हैं। बातचीत में पता चला करीब डेढ़ महीने पहले कॉमरेड-पत्रकार मित्र अतुल लागू और भाभी कान्हा किसली घूमने गए। जाना था ट्रेन से, लेकिन मजबूरी में कार से जाना-आना करना पड़ा। लौटे तो अतुल भाई कि कमर में दर्द की शिकायत हो गई। सोचा कि कार में लंबे सफर, एक सी बैठक आदि कारण से दर्द है।

चिकित्सक को दिखाया, दवाई गोली से खास फर्क नहीं पड़ा। रिश्तेदार-डॉ विनीत लागू को दिखाया, कुछ परीक्षण के बाद उन्होंने डॉ गुजराती को दिखाने की सलाह दी। वहां फिर जांच-परीक्षण आदि के बाद जब बताया कि गॉल ब्लेडर में कैंसर है और वह भी लॉस्ट स्टेज में पहुंच गया है तो परिजनों के होश उड़ गए।

पहले लागू परिवार कालिंदी कुंज में रहता था, पिछले डेढ़ साल से सिलिकॉन सिटी, राऊ रोड पर शिफ्ट हो गए हैं। लागू जी की देखरेख में पूरा परिवार लगा हुआ था लेकिन लॉस्ट स्टेज का कैंसर तेजी से अपना असर दिखा रहा था। अभी दो दिन पहले पूरे शरीर का आधा हिस्सा पक्षाघात का शिकार हो गया है। शरीर सूखता जा रहा है। दिन भर में कुछ लिक्विड गले से पेट में चला जाता है लेकिन दर्द है कि कम नहीं होता। ठीक से बोलना तो क्या बस बुदबुदाते हैं, यह बोलना भी परिजन ही समझ पाते हैं।

हां कुछ देर उनके पास बैठें, नाम बताएं तो कुछ पल बाद लगता है कि पहचान लिया है। परिवार के मुखिया को कैंसर हो तो घर के सभी सदस्यों की मानसिक स्थिति कैसी होगी सहज कल्पना की जा सकती है। बीमारी और दर्द की तीव्रता से ध्यान हटाने के लिए जब अतुल लागू से कहा चलो फैमिली के साथ फोटो लेते हैं 'स्माइल प्लीज'... काफी देर से आंखें मूंदे बात करने की कोशिश कर रहे लागू के चेहरे पर मुस्कान तो नहीं आई हां, आंखें जरूर खुल गईं। शायद यह चेंज देखकर ही परिजनों के चेहरों पर हल्की सी मुस्कान चस्पा हो गई। 


प्रेस क्लब और शहर के अधिकांश जागरूक लोगों से अतुल लागू गर्मजोशी से मिलते रहे। लेकिन अंतिम समय में हालात ऐसे हो गए कि दो सदस्य मिलकर जैसे तैसे उन्हें उठाते, तकियों का सहारा देते तो बैठ पाते। लागू परिवार बीमारी और उसके चलते होने वाली दिक्कतों का सामना करता रहा। और आज अचानक एक सूचना से दिल बैठ गया। अब अतुल लागू हमारे बीच नहीं हैं। 

कई सारी स्मृतियां अतुल जी के साथ जुड़ी हुई हैं। अब केवल वही शेष हैं। भावभींनी श्रद्धांजलि अतुल जी। 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed