सीएम भूपेश बघेल के पिता की गिरफ्तारी: कांग्रेस की सियासत के मायने, ऐसा होगा राजनीतिक असर
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने पिता नंद कुमार बघेल को गिरफ्तार करवा कर ये जताने की कोशिश की है कि अगर उनके पिता के बयान ब्राह्मण समाज को आहत करने वाले हैं तो गलत हैं। कम से कम उनकी पार्टी यानी कांग्रेस ऐसा नहीं मानती और ऐसा मानने वालों के खिलाफ कार्रवाई करती है, भले ही वो मुख्यमंत्री के पिता ही क्यों न हों।
इस पूरे घटनाक्रम के राजनीतिक असर के बारे में बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार अतुल सिन्हा-
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इसे इत्तेफाक कहिए या सोची-समझी सियासत का हिस्सा। एक मुख्यमंत्री अपने ही बेहद बुजुर्ग पिता को इसलिए गिरफ्तार करवा देता है, क्योंकि आने वाले वक्त में चुनाव हैं, उसे पार्टी और देश को ये संदेश भी देना है कि कानून की नजर में सब बराबर हैं। अगर पिता भी कुछ गलतबयानी करते हैं तो उन्हें भी सज़ा का हक है।
दरअसल, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने पिता नंद कुमार बघेल को गिरफ्तार करवा कर ये जताने की कोशिश की है कि अगर उनके पिता के बयान ब्राह्मण समाज को आहत करने वाले हैं तो गलत हैं। कम से कम उनकी पार्टी यानी कांग्रेस ऐसा नहीं मानती और ऐसा मानने वालों के खिलाफ कार्रवाई करती है, भले ही वो मुख्यमंत्री के पिता ही क्यों न हों।
इस समय उत्तर प्रदेश की सियासत गरमाई हुई है। प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद से ब्राह्मण समाज में पहले से ही बहुत नाराज़गी है। योगी राज में ब्राह्मण खुद को अलग-थलग महसूस करते हैं और ब्राह्मणों पर जुल्म के किस्से सुनाए जाते हैं।
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ऐसे में सभी पार्टियों की नजर ब्राह्मणों पर है। खासकर दलितों, पिछड़ों, अति पिछड़ों के नाम पर ब्रांडेड पार्टियां खुलकर ब्राह्मणों के सम्मेलन कर रही हैं, उनको लुभाने और अपने साथ जोड़ने का अभियान चला रही हैं।
आखिर क्या चाहती है कांग्रेस?
कांग्रेस को बेशक प्रदेश में कमजोर माना जाए, लेकिन उनके एजेंडे पर भी तो ब्राह्मण हैं ही। ऐसे में नंद कुमार बघेल अगर ये कहें कि ब्राह्मण बाहरी हैं, उन्हें भगाओ या ये कहें कि राम ने लोगों को अशिक्षित किया, सीता को अग्नि में जलाया और समाज में अछूत की भावना पैदा की तो जाहिर है ब्राह्मणों के नाम पर सियासत करने वालों और सभी मुक्य धारा की पार्टियों को ये बात चुभेगी।
कहा जाता है कि भूपेश बघेल पर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत आलाकमान ने दबाव बनाया कि वो ऐसे नाजुक वक्त में अपने पिता की बयानबाजी को रोकें या कोई कार्रवाई करें। और भूपेश ने वही किया।
कौन हैं नंद कुमार बघेल? क्या है आखिर एजेंडा?
अब आपको नंद कुमार बघेल के बारे में थोड़ा बता दें। ऐसा नहीं है कि उन्होंने ब्राह्मणों को लेकर कोई पहली बार ऐसा कोई बयान दिया है। उनका पूरा चिंतन शुरु से ही ऐसा रहा है। नंद कुमार बघेल ओबीसी के एक बड़े नेता रहे हैं।
नंद कुमार कांग्रेस की विचारधारा मानते हैं, मूलत: कांग्रेसी ही हैं, नेहरू गांधी परिवार के भक्त हैं लेकिन कांग्रेस के सदस्य नहीं हैं। अपना एक एनजीओ चलाते हैं – मतदाता जागृति मंच। उन्होंने एक बहुत चर्चित किताब लिखी है – ब्राह्मणकुमार रावण को मत मारो। किताब पर अच्छा खासा विवाद हुआ। उनके खिलाफ केस मुकदमे हुए और इसे लिखने के जुर्म में उन्हें 24 दिन जेल में भी रहना पड़ा।
दुर्ग जिले के पाटन के रहने वाले नंदकुमार बघेल के मुताबिक इस किताब में बाकायदा वाल्मीकि और तुलसीदास के रामायण के संदर्भों सहित ये साबित करने की कोशिश की गई है कि राम गलत थे और रावण को मारना गलत था।
इस किताब में मनु स्मृति का भी जिक्र है और देश में ब्राह्मणवाद के वर्चस्व को बताने, समाज में भेदभाव पैदा करने और बुद्ध के दर्शन को सही ठहराने की कोशिश की गई है। ये किताब करीब तीन दशक पहले लिखी गई थी, इसपर प्रतिबंध भी लगा और बघेल बरसों से देश में अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
एक इंटरव्यू में नंद कुमार बघेल ने हंसते हंसते कहा था-
जेल अच्छी जगह है, वहां आपको कोई पकड़ने नहीं आता, बिजली पानी बिल की चिंता नहीं होती, लिखने-पढ़ने का वक्त मिलता है। अब उनके बेटे ने कुछ समय के लिए उन्हें ये वक्त दे दिया है।
भूपेश बघेल कहते हैं कि वो पिता का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन अगर उनके किसी बयान से किसी समाज को ठेस पहुंची है और वह कानून के खिलाफ है तो कार्रवाई होगी।
सवाल ये है कि आखिर नंद कुमार बघेल की गिरफ्तारी से कांग्रेस क्या संदेश देना चाहती है? क्या इस कदम से यूपी या उत्तराखंड के ब्राह्मण उसके साथ आ जाएंगे? क्या भूपेश बघेल यूपी में कांग्रेस के चुनाव कैंपेन के स्टार प्रचारक हो सकते हैं? क्या इस कदम को चंद ब्राह्मण संगठनों के विरोध को शांत करने की रणनीति मानी जाए? क्या कांग्रेस अब भी समाजवादी पार्टी से गठबंधन की आस लगाए बैठी है?
फिलहाल यूपी पर सबकी नज़र है। सियासी पारा आसमान पर है। मायावती ब्राह्मण सम्मेलन कर रही हैं, अखिलेश यादव भी ब्राह्मणों को लुभाने में लगे हैं। भाजपा अपने नाराज़ ब्राह्मण वोटरों को राम मंदिर के नाम पर साथ लाने की कोशिश में लगी है।
कांग्रेस बेशक हाशिए पर पड़ी दिख रही हो, लेकिन भीतर ही भीतर उसने अपनी तैयारियां तेज़ कर रखी हैं। ऐसे में कोई भी रणनीतिक भूल उसके लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो सकती है। नंद कुमार बघेल की गिरफ्तारी से एक संदेश देने की कोशिश तो जरूर है, लेकिन ये कदम कितना फायदेमंद होगा, देखने वाली बात होगी।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं, जो एक वरिष्ठ खेल पत्रकार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।