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Chhattisgargh assembly elections 2018ः जनता की नब्ज क्यों नहीं पकड़ पाए डॉक्टर साहेब? 

Tue, 11 Dec 2018 07:58 PM IST
Updated Tue, 11 Dec 2018 07:58 PM IST
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Chhattisgarh assembly elections 2018 dr.raman singh congress bjp ajit jogi
डॉ रमन सिंह - फोटो : amar ujala

11 दिसंबर की तारीख भाजपा के लिए आने वाले लोकसभा चुनावों की तैयारी की प्लानिंग लेकर आई है। बीजेपी के लिए माथा-पच्ची करने का समय है और हो भी रही है। राजस्थान निकल चुका है, एमपी में कांटे की टक्कर है लेकिन मामला फंसा हुआ है, जबकि छत्तीसगढ़ के 15 साल पुराने डॉ. रमन सिंह जनता की नब्ज और मूड दोनों ही नहीं समझ पाए। सरकार तकरीबन विदाई की ओर है। 

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बहरहाल, छत्तीसगढ़ के परिणाम बीजेपी के ओवर कॉन्फिडेंस की कहानी कहते हैं। सवाल सीधे उठते हैं कि आखिर जब सबकुछ अच्छा था और दिग्गज नेता से लेकर खुद अमित शाह राज्य में वापसी की उम्मीद लगाए थे, तो फिर डॉक्टर रमन सिंह सरकार साहेब से ऐसी क्या नाराजगी थी जो इस हार के रूप में सामने आई। डॉक्टर साहब अनुभवी होने के बाद बहुत कुछ समझ नहीं पाए। 
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खास बात यह थी कि राज्य में पिछले विधानसभा चुनाव की तरह ही करीब 76 फीसदी मत पड़े, लेकिन परिणाम बीजेपी के खिलाफ ही आए। यही नहीं पिछले तीन चुनाव से उलट इस बार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रह चुके अजीत जोगी की नई पार्टी, बसपा और भाकपा के गठबंधन ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया। 
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राज्य में एक नहीं कई कारण रहे हार के 
दरअसल, छत्तीसगढ़ में एंटी इनकमबेंसी डॉ.रमन सिंह सरकार के लिए एक बड़ा फैक्टर रहा। इसके अलावा राज्य में बसपा, अजित जोगी की जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जकांछ) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के गठबंधन ने बीजेपी को हिलाकर रख दिया। हालांकि खास बात यह है कि इस गठबंधन के चुनावी मैदान में आने के बाद भाजपा के रणनीतिकारों भी कुछ ऐसे ही नतीजों की आस लगाए बैठे थे।

यही नहीं भाजपा के रणनीतिकारों का अनुमान था कि माया, जोगी और सीपीआई के गठबंधन को यदि आठ फीसदी तक वोट मिलते हैं तो भाजपा फिर से सत्ता हासिल कर लेगी। लेकिन इसके उलट उनका यह अनुमान था कि यदि गठबंधन का वोट प्रतिशत 10 फीसदी को पार कर गया तो पार्टी के लिए वापसी की राह भी मुश्किल हो सकती है। 
 

Chhattisgarh assembly elections 2018 dr.raman singh congress bjp ajit jogi
भाजपा को गुजरात की तर्ज पर ग्रामीण वोटर और किसानों की नाराजगी का सामना करना पड़ा। - फोटो : रमन सिंह ट्विटर

भाजपा को कैसे लगा सबसे बड़ा झटका 
भाजपा के एक रणनीतिकार की मानें तो इस गठबंधन को आठ फीसदी तक वोट हासिल होने का अर्थ है कि अजित जोगी कांग्रेस के परंपरागत मतदाताओं सतनामी, आदिवासी, इसाई, मुस्लिम बिरादरी को साधने में कामयाब रहे हैं। इसके उलट यदि गठबंधन का मत प्रतिशत बढ़ता है तो इसका सीधा सा अर्थ है कि इसने भाजपा के  परंपरागत मतदाताओं में भी सेंध लगाई।

दूसरी ओर भाजपा को गुजरात की तर्ज पर ग्रामीण वोटर और किसानों की नाराजगी का सामना करना पड़ा। इसके अलावा नाममात्र की शहरी सीटें और कथित तौर पर पार्टी के साहू वोट बैंक में कांग्रेस की सेंधमारी ने भी परेशानी खड़ी की है। चूंकि पार्टी यहां पिछले 15 वर्षों से सत्ता में है, इसलिए राज्य में स्वाभाविक सत्ता विरोधी रुझान भी सामने आए।

आदिवासी क्षेत्र में भारी मतदान भाजपा के खिलाफ?
प्रथम चरण में बस्तर क्षेत्र में भारी मतदान को लेकर भी अटकलों का बाजार गर्म रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मुताबिक यदि मतदान कराने में नक्सलियों की भूमिका रही है तो भाजपा को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। 
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है. आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं. लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें.

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