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मोदी सरकार-2 के सामने होंगी ये चुनौतियां, इन मुद्दों पर बड़े फैसले ले पाएंगे पीएम?

Fri, 31 May 2019 05:31 PM IST
Gautam Chaudhary गौतम चौधरी
Updated Fri, 31 May 2019 05:31 PM IST
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challenges of modi government performance till now bjp congress
क्या इस बार मोदी सरकार के सामने ज्यादा चुनौतियां होंगी? - फोटो : PTI

नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में तो लौट आया है लेकिन इस सरकार की चुनौतियां कम नहीं है। सच पूछिए तो मोदी के सिर पर इस बार कांटे का ताज सजा है। मसलन दूसरी बार पीएम बने मोदी के लिए सबसे पहली चुनौती देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना है। इस मामले में डाॅ. मनमोहन सिंह की सरकार की तुलना में नरेन्द्र मोदी, बेहद कमजोर साबित हो रहे हैं। इनके 5 साल के शासनकाल में आर्थिक प्रगति की दर बहुत धीमी पड़ गई है।

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यह देश की शांति व्यवस्था के लिए खतरनाक है। डॉलर के मुकाबले पैसा दिन-व-दिन कमजोर होता जा रहा है। रोजगार के मामले में मोदी सरकार पार्ट-1 फिसिड्डी साबित हुई है। देश में अशांति की आशंका को देखते हुए निवेश का माहौल जितना बनना चाहिए था उतना नहीं बन पाया है और निवेश की गति धीमी पड़ गई है।
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हालांकि मोदी सरकार का दावा है कि वह भ्रष्टाचार के मामले में सतर्क है और यह दावा कहीं न कहीं सही भी साबित हो रहा है, लेकिन केवल भ्रष्टाचार पर नकेल कसने से ही काम को गति नहीं मिलेगी। काम को गति प्रदान करने के लिए व्यवस्था का चुस्त होना बेहद जरूरी है। मोदी सरकार पार्ट वन में इस प्रकार की योजना कहीं दिखाई नहीं दी। 
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और किन-किन चुनौतियों से घिरी है सरकार? 
मोदी सरकार की दूसरी सबसे बड़ी चुनौती उनके अपनों द्वारा खड़ी की जा रही है। मतलब साफ है पहले कार्यकाल में हुए हिन्दू-मुस्लिम, हिन्दू-सिख, दक्षिणपंथी-वामपंथी, अगड़-पिछड़ा, दलित-सवर्ण, हिन्दू-ईसाई के बीच तकरार के मामलों को रोकना होगा। खासतौर पर गौरक्षकों की अराजकता, भीड़तंत्र, मारपीट और हिंसा की घटनाओं को रोकना आसान नहीं होगा। पीएम मोदी के सामने चुनौती होगी कि वे हिंसा की ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाए जो पूरी दुनिया में भारत की अलग छवि को प्रस्तुत करती है। 

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मोदी सरकार की तीसरी सबसे बड़ी चुनौती कानून-व्यवस्था की है। - फोटो : PTI

राम मंदिर, कश्मीर और कानून व्यवस्था
मोदी सरकार की तीसरी सबसे बड़ी चुनौती कानून-व्यवस्था की है। कानून-व्यवस्था पर से सरकार का नियंत्रण धीरे-धीरे कमजोर होता जा रहा है। हालांकि इसके लिए केन्द्र सरकार को कम और राज्य सरकारों को ज्यादा दोषी ठहराया जाना चाहिए, लेकिन केन्द्रीय गृहमंत्रालय को इस दिशा में व्यापक पहल करने की जरूरत है। 

ऐसे में पुलिस व्यवस्था को पेशेवर और आधुनिक तकनीक से लैस करना होगा। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आंतरिक और बाह्य गुप्तचर एजेंसियों को चुस्त बनाने पर बल देना होगा। प्रधानमंत्री को इस दिशा में सोचना चाहिए कि भारत की पुलिस, जनता का मित्र कैसे बने? इस पर तसल्ली से सोचना होगा। वैसे आजतक भारत की पुलिस समाज का हिस्सा नहीं बन पाई है, वह शासन व्यवस्था का ही हिस्सा है। पुलिस का आधुनीकीकरण मोदी सरकार की चुनौतियों में एक है। 

मोदी सरकार की चौथी चुनौती कश्मीर से अनुच्छेद 35ए को हटाना है। यह चुनौती बड़ी है लेकिन इसका हटना जरूरी है। या तो सरकार कश्मीर जैसी व्यवस्था पूरे मुल्क में लागू करे या फिर कश्मीर को जो विशेषाधिकार दिया गया है उसे वापस ले। कश्मीर में इस कानून के कारण ज्यादा समस्या हो रही है। हालांकि कश्मीर में जमीन खरीदना और वहां बसने वाले मामले में भले सरकार कुछ रियायत दे, लेकिन भारत के संविधान के कई अंग कश्मीर में लागू नहीं होते हैं, जैसे पंचायती राज व्यवस्था, भारत का सूचना का अधिकार, महिला अधिकार कानून।

दूसरी बात यह है कि पूरे देश की जनता ने इस बार नरेन्द्र मोदी को राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर वोट दिया है। कश्मीर राष्ट्रीय सुरक्षा का एक अहम पक्ष है। मोदी को कश्मीर की समस्या का समाधान करना ही होगा तभी मोदी इस बार जनता का विश्वास जीत पाएंगे। अगर इस काम में मोदी असफल रहे तो फिर मोदी की समस्या बढ़ेगी और यह भाजपा के लिए भी शुभ साबित नहीं होगा। 
 

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क्या राम मंदिर का वादा पूरा कर पाएगी सरकार ? - फोटो : पीटीआई

प्रधानमंत्री मोदी की पांचवी सबसे बड़ी चुनौती अयोध्या में राम का मंदिर है। यदि विवादित भूमि पर भगवान रामलला का भव्य मंदिर बन गया तो मोदी कई पीढ़ियों तक याद किए जाएंगे और इस काम में असफल रहे तो देश कभी उन्हें नहीं माफ करेगा। यह मोदी के लिए बड़ी चुनौती है। अयोध्या का मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के पास लंबित है। बहस पर बहस चल रही है। ऐसे में यदि कोर्ट का फैसला आ भी जाता है तो मंदिर की भूमि कोर्ट में प्रस्तुत पार्टियों को मिलेगी। कानूनी निर्णय के बाद भी राम मंदिर मंदिर तभी वहां संभव हो पाएगा जब सरकार का हस्तक्षेप होगा। जाहिर है आज नहीं तो कल मोदी सरकार को वहां हस्तक्षेप करना ही होगा। 

किसानों की समस्या का समाधान 
किसानों की समस्या अभी भी वहीं मुंह बाए खड़ी है। पश्चिम उत्तर प्रदेश में गन्ना किसान, गुजरात में पटेल, पंजाब-हरियाणा में जाट, राजस्थान में गुर्जर, बिहार, उत्तर प्रदेश में यादव, कुर्मी, कुशवाहा चाहे इस चुनाव में प्रभावशाली भूमिका में नहीं दिखे हों लेकिन जमीन पर इनकी जबरदस्त ताकत है। यदि ये आन्दोलन पर उतारू हो जाएं तो मोदी जी के लिए सरकार चलाना कठिन हो जाएगा। किसानों की समस्या का समाधान इतना आसान नहीं है। यह समस्या आने वाले समय में और बढ़ेगी। इसलिए नरेन्द्र मोदी को इस दिशा में अभी से सोचने की जरूरत है।

सरकारी कर्मचारियों का नियोजन भी नरेन्द्र मोदी के लिए चुनौती साबित होने वाली है। सरकार के स्वामित्व वाली कई कंपनियों घाटे में चल रही हैं। सरकार अपने ऊपर आर्थिक बोझ को कम करने के लिए इन कंपनियों का अधिकतर शेयर बेचने का मन बना रही है। ऐसा हुआ तो ये कंपनियां निजी हाथों में चली जाएंगी और कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों को अपना अलग रास्ता चुनना होगा। यह बड़ा संकट मोदी सरकार के सामने मुंह बाए खड़ा है। इसके लिए भी मोदी सरकार को सोचना होगा। 

यही नहीं दूसरी ओर सरकारी कंपनी की ओर से यह संकट काॅरपोरेट संकट है। अधिकतर काॅरपोरेट कंपनियां बैंक में जाम जनता के पैसे से अपना कारोबार कर रही है। कुछ कंपनियों के द्वारा बैंक ऋण लेकर भाग जाने से कंपनियों के ऊपर से बैंकों का विश्वास कम हो गया है। अब बैंक एनपीए निकालने के चक्कर में है और ऋण पर थोड़ी सख्ती कर दी है।

काॅरपारेट इस मामले को लेकर बेहद गंभीर है। आने वाले समय में यह समस्या और बढ़ने वाली है। इस चुनौती के समाधान के लिए भी मोदी सरकार को सोचना होगा क्योंकि विगत् दिनों उद्योग संगठनों के नेताओं ने मोदी सरकार को इस मामले में चेतावनी भी दी थी लेकिन सरकार शायद इस दिशा में पहल नहीं कर पा रही है। इसके अलावा जीएसटी की विसंगति भी सरकार के सामने चुनौती पेश करेगी।

कॉमन सिविल लॉ का मुद्दा 
मोदी सरकार के समान नागरिक संहिता यानी काॅमन कोर्ट भी एक बड़ी चुनौती है। हालांकि मोदी सरकार पार्ट वन ने उसको मिनिमाईज करने के लिए तीन तलाक अध्यादेश लेकर आई थी, लेकिन इससे बात बनती नहीं दिख रही है। यह मामला केवल तलाक का नहीं है। इस देश में एक प्रकार की व्यवस्था होनी चाहिए। जानकारों के मुताबिक देश की एकता और अखंडता के लिए जरूरी है, जिस प्रकार हिन्दू विवाह कानून में संशोधन किया गया और हिन्दू महिलाओं को अलग से समानता का अधिकार प्रदान किया गया उसी प्रकार मुस्लिम महिलाओं को भी समानता का अधिकार मिलना चाहिए।

फिर जो जनजातीय क्षेत्र हैं उनको भी अलग से अधिकार प्राप्त है, इसलिए इस देश में सबके लिए एक प्रकार का कानून होना चाहिए। समान नागरिक संहिता हो और उसी के आधार पर देश चले। हालांकि यह काम उतना आसान नहीं है लेकिन नरेन्द्र मोदी जिस घोड़े पर बैठकर सत्ता का संचालन कर रहे हैं उसकी कमान उन तत्वों के हाथ में हैं जो इस प्रकार के कानून के समर्थक हैं। इसलिए मोदी को इस चुनौती के साथ भी दो-चार होना होगा। 

संपूर्णता में देखें तो नरेन्द्र मोदी प्रचंड बहुमत के साथ साथ सत्ता में तो लौट आए हैं लेकिन इस बार पार्ट टू सरकार में पहले की अपेक्षा चुनौतियां ज्यादा हैं। इन चुनौतियों का समाधान करने में मोदी यदि सफल रहे तो मोदी लंबे समय तक इतिहास पुरुष बने रहेंगे अन्यथा इतिहास उन्हें अपने पन्नों में दफन कर लेगा। 
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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