बजट 2024: गठबंधन की मजबूरियां तो दिखीं, पर ज्यादा नहीं झुकीं सीतारमण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गठबंधन के दो प्रमुख घटक दलों आंध्र प्रदेश की तेलुगु देशम पार्टी और बिहार की जनता दल (यू) को साधने की कोशिश बजट में की। बिहार को 59,000 करोड़ रुपए तो आंध्र प्रदेश को 15,000 करोड़ रुपए बजट से सीधे-सीधे मिलेंगे। अन्य योजनाओं का पैसा इससे अलग है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मोदी सरकार 3.0 के पहले बजट में गठबंधन की राजनीति का असर साफ दिखा। वर्ष 2014 और 2019 में पूर्ण बहुमत की सरकार चलाने के बाद यह पहला अवसर है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। यही कारण है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गठबंधन के दो प्रमुख घटक दलों आंध्र प्रदेश की तेलुगु देशम पार्टी और बिहार की जनता दल (यू) को साधने की कोशिश बजट में की। बिहार को 59,000 करोड़ रुपए तो आंध्र प्रदेश को 15,000 करोड़ रुपए बजट से सीधे-सीधे मिलेंगे। अन्य योजनाओं का पैसा इससे अलग है।
बजट से एक दिन पहले बिहार को विशेष दर्जा देने की मांग को ठुकरा कर मोदी सरकार ने विपक्ष को हमलावर होने का मौका दिया था। खासकर बिहार में विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल के लालू प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का इस्तीफा तक मांग लिया था, लेकिन जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश किया तो सबसे अधिक मेहरबानी बिहार पर ही दिखाई। बिहार में सड़क परियोजनाओं के लिए 26,000 करोड रुपए दिए गए हैं, जिसमें पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे, बक्सर-भागलपुर राजमार्ग, बोधगया- राजगीर-वैशाली-दरभंगा और बक्सर में गंगा नदी पर दो लेन के अतिरिक्त पुल का निर्माण होगा।
बिहार के पीरपैंती में 21,400 करोड़ रुपए की लागत से 2400 मेगावाट का पावर प्रोजेक्ट भी लगाया जाएगा। इतना ही नहीं, बाढ़ जो हर साल बिहार में एक बड़ा नुकसान पहुंचती है, उससे निपटने और राहत के लिए 11,500 करोड़ रुपए केंद्र सरकार बिहार सरकार को देगी। गया स्थित विष्णुपद मंदिर और बोधगया में महाबोधि मंदिर को विश्वस्तरीय तीर्थस्थल तथा पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए भी मदद दी जाएगी।
आंध्र प्रदेश को 15,000 करोड़ रुपए नई राजधानी और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए दिए जा रहे हैं, लेकिन यहां वित्त मंत्री की एक तारीफ करनी होगी। उन्होंने सीधे-सीधे किसी पैकेज की घोषणा न करके या कोई अनुदान न देकर, दोनों राज्यों को डेवलपमेंट के लिए पैसा दिया है। स्पष्ट है कि पुल बनाओ, हाईवे बनाओ, बाढ़ नियंत्रण के उपाय करो, नई राजधानी बनाओ, इसे राज्य में विकास तो होगा ही, रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
दरअसल, लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद से नीतीश कुमार, जो इंडी गठबंधन के प्रमुख सहयोगी रहे थे और चंद्रबाबू नायडू, जो आंध्र प्रदेश में न केवल सरकार बनाकर आए हैं, बल्कि उनके बड़ी संख्या में सांसद भी जीते हैं, दोनों पर विपक्ष डोरे डालता आ रहा था। दोनों को कैबिनेट में बड़े पदों के अलावा दोनों राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा देने का लालच भी दे रहा था। हालांकि, यही लग रहा था कि दोनों दल अभी तो ऐसी कोई कोशिश नहीं करेंगे। बजट से पहले दोनों दलों की तरफ से कोई खास बारगेनिंग भी होती नहीं दिखी।
पहली बार गठबंधन की सरकार चला रहे नरेंद्र मोदी भी जानते हैं कि उनकी कुर्सी टीडीपी और जद (यू), दोनों के कारण ही बची रह सकती है। यदि इनमें से कोई एक भी जाता है तो सरकार के अस्थिर होने का खतरा बढ़ता है। इसे गठबंधन की मजबूरियां कहें या दोनों राज्यों को डेवलपमेंट के लिए दिया गया पैसा। फिलहाल तो नीतीश कुमार की पार्टी बजट से प्रसन्न नजर आ रही है और उन्होंने प्रधानमंत्री का धन्यवाद भी कहा है।
बजट को लेकर एक और अच्छी बात यह है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गठबंधन का अधिक दबाव महसूस नहीं किया। बड़ी मुफ्त घोषणाओं के बजाय संतुलित रहते हुए राजकोषीय घाटे को काम करने की दिशा में आगे बढ़ी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सरकार अपने कर्ज को नीचे ले जाने की दिशा में बढ़ेगी। कम से कम कर्ज लेगी। संसाधनों पर ज्यादा निर्भरता बढ़ाएगी। राजकोषीय संतुलन इस बजट में दिखता है। इस साल की शुरुआत में जब सरकार ने अंतरिम बजट पेश किया था, तब उसका अनुमान राजकोषीय घाटे को जीडीपी का 5.1 प्रतिशत रखा था, जो अब 4.9 प्रतिशत रखा गया है। सरकार का लक्ष्य अगले साल इसे 4.5 प्रतिशत पर ले जाने का है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।