फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   Bhupinder Singh Death Speak melodious dialects Succulent bids of sour sweet eyes

यादों में भूपेंदर सिंह: बोलिए सुरीली बोलियां, खट्टी-मीठी आंखों की रसीली बोलियां

Tue, 19 Jul 2022 01:02 PM IST
Yatindra Mishra यतीन्द्र मिश्र
Updated Tue, 19 Jul 2022 01:02 PM IST
सार

गायक भूपेंद्र सिंह नहीं रहे। उनका जाना एक स्पेस का छूट जाना है। दरअसल वे ऐसे बहुत थोड़े, मगर अमर गीतों में खुद की आवाज को हौले से दर्ज हैं। उनकी यही अप्रोच उनको बड़ा गायक बनाती है। बाकी, उनके उन्मुक्त गानों पर झूमने के भी कई बहाने बनते हैं।

विज्ञापन
Bhupinder Singh Death Speak melodious dialects Succulent bids of sour sweet eyes
भूपेंद्र सिंह ऐसे बहुत थोड़े, मगर अमर गीतों में खुद की आवाज को हौले से दर्ज होने देते हैं। - फोटो : twitter

विस्तार

एक आवाज, जो माइक्रोफोन से निकलकर अपने भारी एहसास में खरज भरती सी लगती थी। कहीं पहुंचने की बेचैनी से अलग,बाकायदा अपनी अलग सी राह बनाती हुई, जिसे खला में गुम होते हुए भी आरकेसट्रेशन के ढेरों सुरों के बीच दरार छोड़ देनी थी। ये भूपी थे.. सत्तर-अस्सी के दशक में ऐसे कई गीतों के सिरजनहार, जिन्होंने जब भी गाया, सुनने वाले को महसूस हुआ जैसे कुछ गले में अटका रह गया है। 

विज्ञापन


एक कभी ना कही गई दुःख की इबारत, जिसके सहारे जज़्बात की शाख पर गीतकारों ने कुछ फूल खिला दिए थे। याद कीजिए-
 

'आज बिछड़े हैं कल का डर भी नहीं /
जिंदगी इतनी मुख्तसर भी नहीं..' (थोड़ी सी बेवफाई), '
करोगे याद तो हर बात याद आएगी..'(बाज़ार), '
एक अकेला इस शहर में' (घरौंदा)'
फिर तेरी याद नए दीप जलाने आई '.. (आई तेरी याद), '
ज़िंदगी, जिंदगी मेरे घर आना'.. (दूरियां)...


फिर उनकी गले की तैयारी, हर उस गाने में भी अलग से सुनी जा सकती है, जहां उनके करने के लिए बहुत ज्यादा नहीं था, उनकी छोटी सी मौजूदगी भी कहीं दर्ज रह जाती है मन में..जैसे एस. डी. बर्मन के संगीत में लता मंगेशकर के शाहकार गीत 'होठों पे ऐसी बात मैं दबा के चली आई '( ज्वेल थीफ) में उनका 'ओ! शालू '.. भर पुकारना, याकि मदन मोहन के लिए 'हकीकत'  में मो. रफ़ी, मन्ना डे और तलत महमूद जैसे दिग्गजों के संग 'होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा ..'

विज्ञापन


भूपेंद्र सिंह ऐसे बहुत थोड़े, मगर अमर गीतों में खुद की आवाज को हौले से दर्ज होने देते हैं। उनकी यही अप्रोच उनको बड़ा गायक बनाती है। बाकी, उनके उन्मुक्त गानों पर झूमने के भी कई बहाने बनते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


मिताली के संग के कुछ गीतों में आप उन दोनों को सुनिए -

'राहों पे नज़र रखना/ होठों पे दुआ रखना/
आ जाए कोई शायद / दरवाज़ा खुला रखना..'
वो दरवाज़ा खुला ही रहने वाला है।

भूपी भला अब कहां लौटने वाले हैं? हम बस उनकी यादों में उन गानों की प्लेलिस्ट में डूबते -उतराते रहेंगे, जो उनकी सोज़ भरी गायकी पीछे छोड़ गई है।


ऐसे ही कुछ और भी गाने हैं, जिन्हें बरबस गुनगुनाने का मन करता है। उसमें मेरा सर्वप्रिय गीत 'सितारा' फ़िल्म का है...
थोड़ी सी जमी, थोड़ा आसमां, तिनकों का बस इक आशियां...


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed