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अयोध्या राम मंदिर: कैसा पड़ेगा चुनावी प्रभाव? क्या बढ़ेंगी इंडिया गठबंधन की मुश्किलें

Wed, 24 Jan 2024 12:18 PM IST
Vinod Patahk विनोद पाठक
Updated Wed, 24 Jan 2024 12:18 PM IST
सार

कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न लेकर नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर सबको चौंकाया है। बिहार की राजनीति में सक्रिय राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल (यू) ने शायद यह कल्पना नहीं की थी कि नरेंद्र मोदी उनसे कर्पूरी ठाकुर की विरासत इस तरह छीन लेंगे। दरअसल, बिहार भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण राज्य है और यहां नीतीश कुमार कुछ-कुछ सालों में पाला बदलने का खेल खेलते रहते हैं।

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Ayodhya Ram Mandir: Will Modi govt award of Bharat Ratna to Karpoori Thakur affect the Lok Sabha elections
कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न लेकर नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर सबको चौंकाया है। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

राजनीति और चुनाव में टाइमिंग का बहुत बड़ा महत्व है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टाइमिंग के खेल में महारत हासिल है। चुनावों के समय कौन सा मुद्दा उठाना है और कौन सा छोड़ना है? इसे वो वर्तमान के किसी भी अन्य राजनेता से ज्यादा बेहतर जानते हैं। अयोध्या में राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद हिंदी पट्टी में उन्होंने एक और मास्टरस्ट्रोक चल दिया है।

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बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर, जिन्हें पिछड़ों का जनक कहा जाता है, को उनकी जन्म शताब्दी पर भारत रत्न देकर नरेंद्र मोदी ने हिंदी पट्टी के पिछड़ों और अति पिछड़ों को साध लिया है। कहते हैं, संसद का रास्ता उत्तर प्रदेश और बिहार से होकर गुजरता है। दोनों ही राज्यों में पिछड़े और अति पिछड़े चुनावी गणित में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न लेकर नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर सबको चौंकाया है। बिहार की राजनीति में सक्रिय राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल (यू) ने शायद यह कल्पना नहीं की थी कि नरेंद्र मोदी उनसे कर्पूरी ठाकुर की विरासत इस तरह छीन लेंगे। दरअसल, बिहार भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण राज्य है और यहां नीतीश कुमार कुछ-कुछ सालों में पाला बदलने का खेल खेलते रहते हैं। नरेंद्र मोदी की कोशिश यही है कि बिहार की राजनीति से नीतीश कुमार को अप्रासंगिक कर दिया जाए। वर्ष 2014 से इसके प्रयास भी वो लगातार करते आ रहे हैं।
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बिहार से लोकसभा की 40 सीटें हैं। वर्ष 2014 में जनता दल (यू), राजद और भाजपा, तीनों अलग-अलग चुनावी मैदान में उतरे थे। भाजपा के साथ रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी और उपेंद्र कुशवाह की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी जैसे छोटे दल थे। चुनाव में भाजपा ने सहयोगियों के साथ 40 में से 31 सीटों पर विजय हासिल की थी। जनता दल (यू) को दो और राजद को चार सीटें ही मिली थीं।

इसके बाद नीतीश कुमार भाजपा के साथ आ गए थे। वर्ष 2019 में उन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन में रहते हुए बिहार में चुनाव लड़ा और लोकसभा की 16 सीटों पर विजय हासिल की। दोनों दलों के गठबंधन में राजद का सुपड़ा-साफ हो गया था और वो लोकसभा चुनाव में खाता भी नहीं खोल पाई थी। हालांकि, किसके बाद नीतीश कुमार एक बार पलटी मार कर राजद के साथ जा चुके हैं।

Ayodhya Ram Mandir: Will Modi govt award of Bharat Ratna to Karpoori Thakur affect the Lok Sabha elections
इंडिया गठबंधन। - फोटो : Agency

इस साल होने वाले लोकसभा चुनाव में लग रहा है कि राजद और जनता दल (यू) साथ मिलकर बिहार में चुनाव लड़ेंगे। दोनों का गठबंधन भाजपा को नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने से इन दोनों पार्टियों का एक बड़ा वोट शेयर भाजपा की तरफ आ सकता है, यह अब साफ-साफ दिख रहा है।

बिहार में पिछड़ों की राजनीति को लेकर पहले ही भाजपा और विपक्षी दलों में राजनीति तेज हो गई है। कर्पूरी ठाकुर की विरासत को हासिल करने के लिए बिहार के सभी प्रमुख दल एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं, लेकिन बाजी नरेंद्र मोदी मार ले गए हैं। 

जहां तक हिंदी पट्टी के उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, हरियाणा, दिल्ली और भाजपा के गढ़ गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल, कर्नाटक व महाराष्ट्र की बात है तो इन सभी राज्यों में राम मंदिर का असर देखने को मिलेगा। यह वोटों में तब्दील भी होगा। इन राज्यों में लोकसभा की 327 सीटें हैं। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के असम समेत अन्य राज्यों में भाजपा की स्थिति मजबूत दिख रही है। वो यहां पुनः वर्ष 2019 वाला प्रदर्शन दोहरा सकती है। दक्षिण में भी भाजपा को सीटें मिलती दिख रही हैं।

नरेंद्र मोदी जब भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित हुए थे, उससे पहले वर्ष 2009 में लोकसभा चुनाव में भाजपा का वोट शेयर 18.80 प्रतिशत था और पार्टी की 116 सीटें थीं, लेकिन वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के करिश्माई नेतृत्व ने भाजपा का वोट शेयर 31 प्रतिशत कर दिया और 282 सीटें पार्टी को मिलीं।

भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए ने 336 सीटों पर विजय हासिल की। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी ने भाजपा के वोट शेयर को और बढ़ा दिया। यह बढ़कर 37.7 प्रतिशत हो गया और पार्टी ने अपने बलबूते पर 303 सीटों पर विजय हासिल की, यानी नरेंद्र मोदी जानते हैं कि जनता को क्या पसंद है और कैसे चुनाव-दर-चुनाव जीत हासिल करनी है।

इस साल लोकसभा चुनाव में चंद दिन ही बचे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर में अपना चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है, जबकि विपक्षी दल गठबंधन बनाकर सीटों की शेयरिंग में ही उलझे हुए हैं। नरेंद्र मोदी कोई भी मुद्दा विपक्ष के लिए छोड़ नहीं रहे हैं और हताश-निराश विपक्ष केवल घिसे-पिटे पुराने मुद्दों पर ही उन्हें घेरने की नाकाम कोशिश करता दिख रहा है। 

राम मंदिर और कर्पूरी ठाकुर के मास्टरस्ट्रोक के बाद ऐसा नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तरकश में मु्द्दों के तीर खत्म हो गए हैं। चुनाव से पहले वो ऐसे ही और बड़े मास्टरस्ट्रोक खेल सकते हैं, जिनका अनुमान अभी लगाना बेहद मुश्किल है, क्योंकि अब तक नरेंद्र मोदी अपने निर्णयों से चौंकाते ही आए हैं। राजनीति के जानकारों की मानें तो फिलहाल तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कोई भी चुनौती मिलती नहीं दिख रही है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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